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कोरोनावायरस से कालीन व्यवसाय बैक गियर में

Wed, 12 Feb 2020 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 12 Feb 2020 11:51 PM IST
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: Crores of finished goods dumped in warehouses in bhadohi
भदोही। चीन में कोरोना वायरस से मचे हाहाकार का असर भदोही के कालीन निर्यात पर पड़ गया है। चीनी निर्यातकों ने पुराने ऑर्डरों को होल्ड रखने के लिए कह दिया है। इससे करोड़ों रुपये के तैयार कालीन, निर्यातकों के गोदामों में डंप पड़ गए हैं। इससे उद्योग जगत चिंतित हो उठा है। चीन को भारत से कालीन का सालाना निर्यात 125 से 150 करोड़ के बीच होता है। कोरोना वायरस का असर वर्ष की शुरुआत में ही पड़ गया है और माना जा रहा है कि इसकी मार पूरे साल रहने वाली है। ऐसे में कालीन निर्यात को करोड़ों की चपत लगनी तय मानी जा रही है।
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कोरोना वायरस के असर से कालीन कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वायरस के असर से चीनी आयातकों के पुराने ऑर्डरों को होल्ड रखने की सलाह देने के बाद यहां निर्यातकों के गोदामों में करोड़ों के तैयार माल डंप पड़ गए हैं। पैकिंग रोक दी गई है। चिंता इस बात की बढ़ गई है कि कहीं ऑर्डर रद्द हुए तो इसकी भरपाई करना मुश्किल हो जाएगा। कोरोना वायरस से पहला झटका शंघाई में मार्च में लगने वाले डोमोटेक्स एशिया-चीन फ्लोर के रद्द होने से लगा है। इसमें देशभर से पांच दर्जन और भदोही-मिर्जापुर परिक्षेत्र से डेढ़ दर्जन से अधिक निर्यातक हिस्सा लेते थे। इसके अलावा सितंबर में लगने वाला टेक्सटाइल, इंटीरियर और फ्लोर कवरिंग मेले पर भी फिलहाल संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसके अभी रद होने की खबर नहीं आई है, लेकिन यदि कोरोना वायरस का कहर शीघ्र नहीं थमा तो इसका भी रद्द होना तय है।
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आल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के अध्यक्ष ओएन मिश्रा का कहना है कि चीनी आयातकों ने फिलहाल माल को होल्ड पर रखने को कहा है। माल लोगों के गोदामों में डंप है। आगे माल बनाएं या न बनाएं इसको लेकर भी असमंजस है। असल परेशानी यह है कि कहीं ऑर्डर ही न रद हो जाएं। ऐसा हुआ तो आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। अकेले भदोही में एक दर्जन से अधिक निर्यातक ऐसे हैं, जो चीन से कारोबार करते आ रहे हैं। ऐसे समय जब चीन से कारोबार बढ़ने की बात की जा रही थी, कोरोना वायरस ने व्यवसाय को ठप कर दिया है।
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चीन से कारोबार बढ़ाने के प्रयासों को लगा धक्कासंवाद न्यूज एजेंसी
भदोही। बीते कुछ वर्षों से चीन में हस्तनिर्मित कालीनों का उत्पादन ठप होने और कालीन उत्पादन का पूर्ण रूप से मशीनीकरण हो जाने से चीन में भारतीय कालीन निर्यात बढ़ने की संभावना बढ़ गई थी। केंद्र सरकार भी इसको लेकर गंभीर थी। प्रयास था कि चीन में खपने वाले हस्तनिर्मित कालीन भारत से जाएं, लेकिन इन प्रयासों को धक्का लगा है।

कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के आधिशासी निदेशक संजय कुमार बताते हैं कि चीन से हर तरह के कालीन के निर्यात की संभावनाएं अत्यधिक हैं। यह साल दर साल बेहतर भी हो रहा था। कोरोना वायरस से इन प्रयासों को गहरा धक्का लगा है। बताया कि गत वित्तीय वर्ष में लगभग 125 करोड़ के कालीन निर्यात हुए थे। यह इस वर्ष बढ़ना था, लेकिन अब ऐसा संभव प्रतीत नहीं होता। कहा कि जो चीनी ऑर्डर हैं, वही हमारे गोदामों से खाली होकर निर्यात हो जाए तो बड़ी बात है।
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