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भ्रष्टाचार में पूर्व प्रधानपति को 13 साल कारावास
Updated Fri, 06 Oct 2017 12:31 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने शेरपुर गोपलहां के पूर्व प्रधान पति लाल बहादुर पाल को भ्रष्टाचार के मामले में 13 साल कारावास और ढाई लाख अर्थदंड की सजा सुनाई। 2015 में इंदिरा आवास योजना में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी मिली थी। तत्कालीन डीएम प्रकाश बिंदु ने जांच कराकर मुकदमा दर्ज किया था। प्रकरण में ग्राम पंचायत अधिकारी की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अभियोजन के अनुसार, शेरपुर गोपलहां निवासी राजन शुक्ला ने शिकायत की थी कि उसके गांव में इंदिरा आवास अपात्रों को फर्जी बीपीएल सूची तैयार कराकर दिलाया गया। प्रधानपति लाल बहादुर पाल की ओर से लाभार्थियों से अवैध पैसे की वसूली की गई। तत्कालीन जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने मुख्य विकास अधिकारी को ग्राम प्रधान रजपत्ती देवी और उसके पति लाल बहादुर के अलावा, ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया था। इसमें जांच कराने पर कुल 45 लाभार्थी फर्जी मिले। उनको दूसरे नाम से बीपीएल सूची में हेरफेर कर आवास आवंटित किया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधानपति लाल बहादुर पाल, ग्राम पंचायत अधिकारी शेषमणि पांडेय के खिलाफ दुर्गागंज थाने में 2015 में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। दोनों पक्षों के बहस और तर्क को सुनने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवीण पांडेय की अदालत ने प्रधान पति लाल बहादुर पाल को उपरोक्त प्रकरण में दोषी मानते हुए 13 वर्ष के कारावास और ढाई लाख अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की तरफ से बहस और पैरवी पंकज तिवारी और सहायक अभियोजन अधिकारी घनश्याम सिंह ने किया। इस प्रकरण में प्रधान पति लाल बहादुर पाल पूर्व से ही जेल में हैं।
संवैधानिक उद्देश्य को विफल किया : एसीजेएम
ज्ञानपुर। 79 पन्ने के निर्णय में एसीजेएम प्रवीण पांडेय ने लिखा कि दोषी द्वारा किया गया अपराध सामाजिक एवं आर्थिक होने के साथ-साथ संवैधानिक अपराध है क्योंकि संवैधानिक अवधारणा में सामाजिक न्याय को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए आवास विहीन लोगों को आवास दिलाने की योजना को दोषी ने विफल कर दिया। इसके प्रति किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।
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अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने शेरपुर गोपलहां के पूर्व प्रधान पति लाल बहादुर पाल को भ्रष्टाचार के मामले में 13 साल कारावास और ढाई लाख अर्थदंड की सजा सुनाई। 2015 में इंदिरा आवास योजना में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी मिली थी। तत्कालीन डीएम प्रकाश बिंदु ने जांच कराकर मुकदमा दर्ज किया था। प्रकरण में ग्राम पंचायत अधिकारी की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अभियोजन के अनुसार, शेरपुर गोपलहां निवासी राजन शुक्ला ने शिकायत की थी कि उसके गांव में इंदिरा आवास अपात्रों को फर्जी बीपीएल सूची तैयार कराकर दिलाया गया। प्रधानपति लाल बहादुर पाल की ओर से लाभार्थियों से अवैध पैसे की वसूली की गई। तत्कालीन जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने मुख्य विकास अधिकारी को ग्राम प्रधान रजपत्ती देवी और उसके पति लाल बहादुर के अलावा, ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया था। इसमें जांच कराने पर कुल 45 लाभार्थी फर्जी मिले। उनको दूसरे नाम से बीपीएल सूची में हेरफेर कर आवास आवंटित किया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधानपति लाल बहादुर पाल, ग्राम पंचायत अधिकारी शेषमणि पांडेय के खिलाफ दुर्गागंज थाने में 2015 में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। दोनों पक्षों के बहस और तर्क को सुनने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवीण पांडेय की अदालत ने प्रधान पति लाल बहादुर पाल को उपरोक्त प्रकरण में दोषी मानते हुए 13 वर्ष के कारावास और ढाई लाख अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की तरफ से बहस और पैरवी पंकज तिवारी और सहायक अभियोजन अधिकारी घनश्याम सिंह ने किया। इस प्रकरण में प्रधान पति लाल बहादुर पाल पूर्व से ही जेल में हैं।
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संवैधानिक उद्देश्य को विफल किया : एसीजेएम
ज्ञानपुर। 79 पन्ने के निर्णय में एसीजेएम प्रवीण पांडेय ने लिखा कि दोषी द्वारा किया गया अपराध सामाजिक एवं आर्थिक होने के साथ-साथ संवैधानिक अपराध है क्योंकि संवैधानिक अवधारणा में सामाजिक न्याय को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए आवास विहीन लोगों को आवास दिलाने की योजना को दोषी ने विफल कर दिया। इसके प्रति किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।
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