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नुकसान के एवज में मुआवजा नाकाफी

Thu, 19 Mar 2020 10:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2020 10:51 PM IST
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Compensation in lieu of loss is insufficient
भुड़की गांव में आंधी और ओलावृष्टि से नष्ट फसल दिखाते विजयशंकर प्रजापति। - फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर। तीन-चार दिनों के प्राकृतिक कोप ने मेहनतकशों के पसीने की कमाई को ओलावृष्टि में बहा दिया। लगभग तैयार हो चुकी गेहूं, चना, मटर, सरसों और सब्जियों पर ओलों की मार देख किसानों का कलेजा बैठा जा रहा है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने ज्ञानपुर तहसील क्षेत्र के गांवों में बर्बादी का मंजर देखा तो किसानों की पीड़ा छलक कर सामने आई। खास बात यह कि जिस हिसाब से नुकसान हुआ है, उसके एवज में मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरा भी साबित नहीं हो पा रहा।
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ज्ञानपुर नगर से सटे भिदिउरा गांव के किसान राजकुमार उर्फ बहादुर यादव की चार बीघे गेहूं और सरसों की फसल पर बिन मौसम बरसात और ओलावृष्टि की ऐसी मार पड़ी है कि परिवार चिंतित हो गया है। समझ में नहीं आ रहा है कि साल भर के अनाज की भरपाई कैसे होगी। इससे भी दर्दनाक कहानी भुड़की के किसान विजय शंकर प्रजापति की है। खेती के अलावा आय का अन्य कोई जरिया उनके पास नहीं है। पिछले दिनों आए आंधी और ओलावृष्टि में तीन बीघे गेहूं की फसल खेतों में गिर गई। अब उनकी पीड़ा यह है कि गिर चुकी फसल को दोबारा खड़ा हो पाना मुश्किल ही है, क्योंकि पौध बड़ी हो चुकी थी और बालियों में दूध दानों की शक्ल ले रहे थे। ऐसे में परिवार को भविष्य की दाल-रोटी का इंतजाम भी अधर में पड़ गया है।
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वह कहते हुए गंभीर हो जाते हैं कि अपनी उपज पर ही साल भर की आजीविका का भरोसा रहता है। प्रशासन का मुआवजा जो मिलता है, वह तो सभी जानते हैं। उससे क्या होगा। यह व्यथा ओलावृष्टि और आंधी की मार से आहत ज्ञानपुर तहसील क्षेत्र के हजारों किसानों की है। पिछले धान के सीजन में अतिवृष्टि के कारण महीनों जलभराव से बर्बाद हो चुके दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों पर तो इस बार की ओलावृष्टि आफत बनकर पड़ी है। धान और पशुओं का चारा तो पहले ही जा चुका था, अब गेहूं का भी भरोसा नहीं। दूसरी ओर क्षति के आकलन को लेकर लेखपालों और राजस्वकर्मियों का रवैया किसानों को रास नहीं आ रहा है। उनका कहना है कि क्षति का सही ढंग से आकलन भी नहीं किया जा रहा। यही वजह है कि समुचित मुआवजा किसानों को नहीं मिल रहा।
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उधर जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि फसलों की क्षति का आकलन कराया जा रहा है। राजस्वकर्मियों को सटीक आकलन करने की हिदायत दी गई है। प्रभावित किसानों को क्षतिपूर्ति भी दी जा रही है।
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