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उम्मीदें टूटी तो अनुदेशकों ने बदल लिया रास्ता
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ज्ञानपुर। जिले के पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाने वाले अनुदेशकों की उम्मीदें टूटी तो धीरे-धीरे वे अपना रास्ता बदल लिए। छह साल बाद भी मानदेय न बढ़ने से जिले के करीब 20 से अधिक अनुुदेशक कृषि, स्वास्थ्य विभाग से लेकर दूसरे प्रांतो में नौकरी के लिए आवेदन कर दिए। कईयों ने तो नौकरी करनी शुरू कर दी है।
परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए छह साल पूर्व सरकार ने खेल, शिक्षा समेत अलग-अलग विषयो के अनुदेशकों की नियुक्ति की। जिले में करीब 400 अनुदेशक चयनित हुए। शुरूआत में उन्हें सात हजार मानदेय पर रखा गया और भविष्य मे मानदेय बढ़ाने का आश्वासन मिला। छह साल तक नौकरी के बाद भी उनके मानदेय में बढ़ोतरी नहीं हो सकी। नियमित कर्मचारी से लेकर दूसरे विभागों में तैनात संविदा कर्मियों का मानदेय बढ़ गया, लेकिन अनुदेशक जस के तस स्थिति में रह गए। सपा से लेकर भाजपा सरकार में 15 हजार मानदेय का प्रस्ताव बना लेकिन धरातल पर प्रभावी नहीं हो सका। अल्प मानदेय में जरूरतें पूरी न होने पर अनुदेशक दूसरे विभाग से लेकर दूसरे प्रांतो में रूख करने लगे है। राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में अनुदेशकों को 20 हजार का मानदेय दिया जाता है। बीते 16 दिसंबर को बिहार अनुदेशक की भर्ती परीक्षा में यूपी के हजारों अनुदेशक ने हिस्सा लिया। उनका मानना है कि घर से भले दूर नौकरी करना पड़ेगा लेकिन सम्मानजनक मानदेय तो मिलेगा। पूर्व माध्यमिक विद्यालय चेतनीपुर के अनुदेशक जय प्रकाश गुप्ता ने इस्तीफा देकर कृषि विभाग में किसान सहायक की नौकरी कर लिया। पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपरिस के कंप्यूटर अनुदेशक विनोद पटेल, सुमन मौर्य ने भी दूसरी नौकरी शुरू की। पूर्व माध्यमिक विद्यालय मोढ़ बाजार की कला अनुदेशक डाली सरोज ने इस्तीफा देकर दूसरी नौकरी की तलाश में लग गई हैं। इसी तरह पूर्व माध्यमिक विद्यालय के विजय कुमार चौरसिया सोनभद्र में आवासीय विद्यालय में नौकरी शुरू कर दी। इसी तरह कई अनुदेशक ठौर ठिकाने की तलाश में दूसरे क्षेत्रों में अपना भाग्य आजमा रहे हैं।
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परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए छह साल पूर्व सरकार ने खेल, शिक्षा समेत अलग-अलग विषयो के अनुदेशकों की नियुक्ति की। जिले में करीब 400 अनुदेशक चयनित हुए। शुरूआत में उन्हें सात हजार मानदेय पर रखा गया और भविष्य मे मानदेय बढ़ाने का आश्वासन मिला। छह साल तक नौकरी के बाद भी उनके मानदेय में बढ़ोतरी नहीं हो सकी। नियमित कर्मचारी से लेकर दूसरे विभागों में तैनात संविदा कर्मियों का मानदेय बढ़ गया, लेकिन अनुदेशक जस के तस स्थिति में रह गए। सपा से लेकर भाजपा सरकार में 15 हजार मानदेय का प्रस्ताव बना लेकिन धरातल पर प्रभावी नहीं हो सका। अल्प मानदेय में जरूरतें पूरी न होने पर अनुदेशक दूसरे विभाग से लेकर दूसरे प्रांतो में रूख करने लगे है। राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में अनुदेशकों को 20 हजार का मानदेय दिया जाता है। बीते 16 दिसंबर को बिहार अनुदेशक की भर्ती परीक्षा में यूपी के हजारों अनुदेशक ने हिस्सा लिया। उनका मानना है कि घर से भले दूर नौकरी करना पड़ेगा लेकिन सम्मानजनक मानदेय तो मिलेगा। पूर्व माध्यमिक विद्यालय चेतनीपुर के अनुदेशक जय प्रकाश गुप्ता ने इस्तीफा देकर कृषि विभाग में किसान सहायक की नौकरी कर लिया। पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपरिस के कंप्यूटर अनुदेशक विनोद पटेल, सुमन मौर्य ने भी दूसरी नौकरी शुरू की। पूर्व माध्यमिक विद्यालय मोढ़ बाजार की कला अनुदेशक डाली सरोज ने इस्तीफा देकर दूसरी नौकरी की तलाश में लग गई हैं। इसी तरह पूर्व माध्यमिक विद्यालय के विजय कुमार चौरसिया सोनभद्र में आवासीय विद्यालय में नौकरी शुरू कर दी। इसी तरह कई अनुदेशक ठौर ठिकाने की तलाश में दूसरे क्षेत्रों में अपना भाग्य आजमा रहे हैं।
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