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कालीन नगरी दीपों से जगमग,आतिशबाजी
ब्यूरो/ अमर उजाला, भदोही
Updated Wed, 11 Nov 2015 08:25 PM IST
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बच्चों से लेकर महिलाओं एवं बड़ों तक ने जमकर खुशियां मनाई। घर एवं प्रतिष्ठान रोशनी से जगमगाते नजर आए।
सुख, समद्धि एवं मंगल की कामना के साथ लोगों ने विधि विधान से घरों एवं प्रतिष्ठानों में लक्ष्मी एवं गणेश की पूजा अर्चना की।
अंधेरा दूर कर रोशनी की ओर जाने का संदेश देने वाला पर्व दीपावली को लेकर सुबह से ही माहौल बनने लगा था। लोग घरों को सजाने में लगे रहे। बच्चों में पर्व को लेकर ज्यादा ही उत्साह रहा, कारण पसंदीदा मिष्ठान के साथ-साथ आतिशबाजी करने के लिए पटाखें जो छोड़ने का मौका मिला था।
नगरीय क्षेत्रों में ज्यादातर लोगों ने घरों को आकर्षक झालरों से सजाया था।
घरों की रंगाई पुताई के बाद स्वच्छ रखने के लिए लोग एक पखवारे से लगे थे। मान्यता है कि बरसात में कीड़े मकौड़े काफी बढ़ जाते हैं, कार्तिक मास में दीपावली के पर्व पर सरसों तेल के दीपक जलाने से कीड़े मकौड़े दीपक के पास जाते हैं और जलकर नष्ट हो जाते हैं।
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किसान भी दीपावली पर अपने खेतों में जाकर दीये जलाते हैं। दीपावली को लेकर रोडवेज परिसर में पटाखों की दुकानें सजाई गई थीं। छुरछुरी से लेकर राकेश, चरखी, अनार बम की भरमार थी।
दिनभर दुकानों पर पटाखा खरीदने वाले पहुंचते रहे। हालांकि दुकानदारों की मानें तो उम्मीद के हिसाब से बिक्री नहीं हुई लेकिन लोगों में उत्साह कम नहीं था। लोगों ने पटाखें खरीदे लेकिन सीमित मात्रा में ही। इसके अलावा मिठाई दुकानों पर देर रात तक खरीदने वालों की भीड़ रही। लोगों ने खोआ व छेना की मिठाई के अलावा लड्डू भी खरीदे। मिठाईयों पर भी महंगाई का असर साफ दिखा। 80 रुपये प्रति किलो के भाव में बिकने वाल लड्डू 120 रुपये प्रति किलो के भाव में बिका। छेना और खोवा की बनी मिठाइयां भी आम दिनों की अपेक्षा 40 से 50 रुपये अधिक भाव पर बिकीं।
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सुख, समद्धि एवं मंगल की कामना के साथ लोगों ने विधि विधान से घरों एवं प्रतिष्ठानों में लक्ष्मी एवं गणेश की पूजा अर्चना की।
अंधेरा दूर कर रोशनी की ओर जाने का संदेश देने वाला पर्व दीपावली को लेकर सुबह से ही माहौल बनने लगा था। लोग घरों को सजाने में लगे रहे। बच्चों में पर्व को लेकर ज्यादा ही उत्साह रहा, कारण पसंदीदा मिष्ठान के साथ-साथ आतिशबाजी करने के लिए पटाखें जो छोड़ने का मौका मिला था।
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नगरीय क्षेत्रों में ज्यादातर लोगों ने घरों को आकर्षक झालरों से सजाया था।
घरों की रंगाई पुताई के बाद स्वच्छ रखने के लिए लोग एक पखवारे से लगे थे। मान्यता है कि बरसात में कीड़े मकौड़े काफी बढ़ जाते हैं, कार्तिक मास में दीपावली के पर्व पर सरसों तेल के दीपक जलाने से कीड़े मकौड़े दीपक के पास जाते हैं और जलकर नष्ट हो जाते हैं।
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किसान भी दीपावली पर अपने खेतों में जाकर दीये जलाते हैं। दीपावली को लेकर रोडवेज परिसर में पटाखों की दुकानें सजाई गई थीं। छुरछुरी से लेकर राकेश, चरखी, अनार बम की भरमार थी।
दिनभर दुकानों पर पटाखा खरीदने वाले पहुंचते रहे। हालांकि दुकानदारों की मानें तो उम्मीद के हिसाब से बिक्री नहीं हुई लेकिन लोगों में उत्साह कम नहीं था। लोगों ने पटाखें खरीदे लेकिन सीमित मात्रा में ही। इसके अलावा मिठाई दुकानों पर देर रात तक खरीदने वालों की भीड़ रही। लोगों ने खोआ व छेना की मिठाई के अलावा लड्डू भी खरीदे। मिठाईयों पर भी महंगाई का असर साफ दिखा। 80 रुपये प्रति किलो के भाव में बिकने वाल लड्डू 120 रुपये प्रति किलो के भाव में बिका। छेना और खोवा की बनी मिठाइयां भी आम दिनों की अपेक्षा 40 से 50 रुपये अधिक भाव पर बिकीं।