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छह माह तक मां का दूध बच्चों के लिए सर्वोत्तम आहार
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ज्ञानपुर। मां का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार होता है। जन्म से छह माह की आयु तक के बच्चों के लिए स्तनपान ही पूर्ण आहार है। जिले में व्याप्त भ्रांतियों के कारण कुछ परिवार शिशुओं को छह माह से पूर्व ही ऊपरी आहार व पेय पदार्थ देने लगते हैं। इन भ्रांतियों को दूर करने और गर्भवती और धात्री माताओं को स्तनपान के प्रति जागरूक करने के लिए ‘पानी नहीं - सिर्फ मां का दूध’ नाम का अभियान जिले के 1370 आंगनबाड़ी केंद्रों पर चलाया जा रहा है।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह ने बताया कि कोविड-19 के दौरान भी सभी सावधानियां और बचाव के नियमों का ध्यान रखा जा रहा है। अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वर्चुअल परामर्श, आडियो काल, ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (वीएचएनडी) के दौरान पोषण कार्नर, गृह भ्रमण, व्हाट्सएप संदेश से यू ट्यूब चैनल लिंक एवं घर-घर टीएचआर वितरण के दौरान गर्भवती और धात्री माताओं को शून्य से छह माह तक शिशुओं को सिर्फ स्तनपान कराने के लिए जागरूक कर रही हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी के समय में शिशुओं को स्तनपान के साथ पानी पिलाने का व्यवहार देखा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ परिवारों में पानी, घुट्टी, ऊपरी दूध व अन्य पेय पदार्थों की शुरूआत छह माह की आयु पूर्ण होने से पहले ही कर दी जाती है। यह बच्चों के लिए ठीक नहीं होता है। इसके लिए अगस्त तक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) रोली श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सर्वे के अनुसार सिर्फ 45 प्रतिशत बच्चे ही छह माह की आयु पूर्ण होने तक स्तनपान कर पाते हैं। इसको बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह ने बताया कि कोविड-19 के दौरान भी सभी सावधानियां और बचाव के नियमों का ध्यान रखा जा रहा है। अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वर्चुअल परामर्श, आडियो काल, ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (वीएचएनडी) के दौरान पोषण कार्नर, गृह भ्रमण, व्हाट्सएप संदेश से यू ट्यूब चैनल लिंक एवं घर-घर टीएचआर वितरण के दौरान गर्भवती और धात्री माताओं को शून्य से छह माह तक शिशुओं को सिर्फ स्तनपान कराने के लिए जागरूक कर रही हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी के समय में शिशुओं को स्तनपान के साथ पानी पिलाने का व्यवहार देखा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ परिवारों में पानी, घुट्टी, ऊपरी दूध व अन्य पेय पदार्थों की शुरूआत छह माह की आयु पूर्ण होने से पहले ही कर दी जाती है। यह बच्चों के लिए ठीक नहीं होता है। इसके लिए अगस्त तक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) रोली श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सर्वे के अनुसार सिर्फ 45 प्रतिशत बच्चे ही छह माह की आयु पूर्ण होने तक स्तनपान कर पाते हैं। इसको बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
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