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भोरी-महजूदा का ऐतिहासिक कजरी मेला कल
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सुरियावां। भोरी-महजूदा में एक तरफ नाले के उत्तर की महिलाएं होंगी तो दूसरी तरफ दक्षिण तरफ की। दोनों एक दूसरे को जमकर गाली देंगी। वह भी ऐसी-ऐसी कि पहली बार सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो जाएं। थोड़ी दूरी पर पुरूष तो होंगे, लेकिन वे वहां जाएंगे नहीं। पुलिस, पीएसी भी रहेगी लेकिन वह भी इन महिलाओं को रोकने का प्रयास नहीं करेगी। क्योंकि यह दृश्य कजरी महोत्सव और ऐतिहासिक मेले में होगा। यहां हर साल इसी तरह के आयोजन होते हैं। कई बार तो महिलाएं एक पक्ष से दूसरे पक्ष पर चप्पल, जूता तक फेंकती हैं।
दशकों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इस साल भोरी-महजूदा गांव का ऐतिहासिक कजरी मेला रविवार को होगा। इसको लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है। शुक्रवार को पाली चौकी प्रभारी महेंद्र कुमार ने मेला स्थल का जायजा लिया। बताया कि मेले में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस व पीएसी के जवान तैनात होंगे। गांव के बुजुर्ग लोग बताते हैं कि कजरी का यह मेला तेरहवीं सदी से होता चला आ रहा है। यह मेला कई इतिहास को समेटे हुआ है। मेले की परंपरा रही है कि मेले में महिलाएं कजरी गाती है। झगड़ा करती हैं, क्योंकि यह परंपरा है। ऐतिहासिक कजरी मेले को देखने के लिए पूर्वांचल के कई जिले से भारी संख्या लोग आते हैं। कजरी का लुफ्त उठाते हैं। कोरोना की वजह से पिछले दो वर्षों से मेले का आयोजन नहीं किया जा रहा था। इस साल मेले के आयोजन को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह है। कजरी के मेले में लंबी कूद प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। महजूदा के ग्राम प्रधान राजमणि पांडेय व भोरी के ग्राम प्रधान विमिलेश चंद्र यादव ने बताया कि लंबी कूद प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा।
क्या है परंपरा
गांव के बुजुर्ग लोग बताते हैं कि काफी पहले की बात है कि एक नाई अपने ससुराल आया था। गांव की लड़कियों ने उसे कजरी गाने के लिए दबाव बनाया। वह गाने से मना किया तो उसे गुदगुदाने लगीं। इतना गुदगुदाईं कि उसके प्राण निकल गए। तभी से प्रायश्चित करने के लिए यहां यह परंपरा निभाई जाती है। इसमें गांव की सभी महिलाएं शामिल होती हैं।
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दशकों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इस साल भोरी-महजूदा गांव का ऐतिहासिक कजरी मेला रविवार को होगा। इसको लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है। शुक्रवार को पाली चौकी प्रभारी महेंद्र कुमार ने मेला स्थल का जायजा लिया। बताया कि मेले में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस व पीएसी के जवान तैनात होंगे। गांव के बुजुर्ग लोग बताते हैं कि कजरी का यह मेला तेरहवीं सदी से होता चला आ रहा है। यह मेला कई इतिहास को समेटे हुआ है। मेले की परंपरा रही है कि मेले में महिलाएं कजरी गाती है। झगड़ा करती हैं, क्योंकि यह परंपरा है। ऐतिहासिक कजरी मेले को देखने के लिए पूर्वांचल के कई जिले से भारी संख्या लोग आते हैं। कजरी का लुफ्त उठाते हैं। कोरोना की वजह से पिछले दो वर्षों से मेले का आयोजन नहीं किया जा रहा था। इस साल मेले के आयोजन को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह है। कजरी के मेले में लंबी कूद प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। महजूदा के ग्राम प्रधान राजमणि पांडेय व भोरी के ग्राम प्रधान विमिलेश चंद्र यादव ने बताया कि लंबी कूद प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा।
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क्या है परंपरा
गांव के बुजुर्ग लोग बताते हैं कि काफी पहले की बात है कि एक नाई अपने ससुराल आया था। गांव की लड़कियों ने उसे कजरी गाने के लिए दबाव बनाया। वह गाने से मना किया तो उसे गुदगुदाने लगीं। इतना गुदगुदाईं कि उसके प्राण निकल गए। तभी से प्रायश्चित करने के लिए यहां यह परंपरा निभाई जाती है। इसमें गांव की सभी महिलाएं शामिल होती हैं।
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