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50 लाख खर्च, शोपीस बनी प्रयोगशाला
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ज्ञानपुर। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जिले में खुले राजकीय हाईस्कूल में प्रयोगशाला पर करीब 50 लाख खर्च हो गए, लेकिन शिक्षक न होने से सब कुछ शोपीस बन कर रह गया है। दो-तीन वर्ष से रखे उपकरण धीरे- धीरे निष्प्रयोज्य होने की कगार पर पहुंच गए हैं। ऐसे में बाल वैज्ञानिकों की फौज तैयार करने का सरकारी सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है।
छात्र-छात्राओं को हाईस्कूल में पढ़ने के लिए दिक्कत न हो, इसके लिए एक दशक पूर्व सरकार ने जिले के 33 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को उच्चीकृत कर राजकीय हाईस्कूल का दर्जा दे दिया। स्कूलों के भवन, लैब समेत अन्य व्यवस्था में सुधार के लिए एक-एक विद्यालय पर 57 -57 लाख खर्च हुए। इसमें डेढ़-डेढ़ लाख केवल विज्ञान की प्रयोगशाला पर खर्च किया गया। धीरे-धीरे प्रयोगशाला में उपकरण तो आ गए, लेकिन दशक भर बाद विज्ञान शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी। जिससे प्रयोगशालाओं में रखे सभी उपकरण शोपीस बन कर रह गए हैं। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 33 राजकीय हाईस्कूल और तीन राजकीय इंटर कॉलेज जिले में संचालित हैं। वीएनजीआईसी, जीआईसी जगन्नाथपुर, महराजगंज को छोड़ दिया जाए तो 33 राजकीय हाईस्कूल में स्थिति सबसे खराब है। दो से तीन राजकीय स्कूलों को छोड़ दें तो अन्य में छात्र-छात्राओं की संख्या भी नाममात्र की रह गई है। इसमें राजकीय हाईस्कूल लालानगर, सदौपुर, लालीपुर आदि शामिल हैं, जहां छात्र संख्या 20 से 50 तक सीमित हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक अशोक कुमार चौरसिया ने कहा कि शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए कई बार शासन को पत्र लिखा गया है। शिक्षकों का चयन शासन स्तर से ही होगा। कुछ राजकीय कॉलेजों में तीन से चार साल के अंदर 15 से 20 शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए लेकिन नए शिक्षक नहीं आए।
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छात्र-छात्राओं को हाईस्कूल में पढ़ने के लिए दिक्कत न हो, इसके लिए एक दशक पूर्व सरकार ने जिले के 33 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को उच्चीकृत कर राजकीय हाईस्कूल का दर्जा दे दिया। स्कूलों के भवन, लैब समेत अन्य व्यवस्था में सुधार के लिए एक-एक विद्यालय पर 57 -57 लाख खर्च हुए। इसमें डेढ़-डेढ़ लाख केवल विज्ञान की प्रयोगशाला पर खर्च किया गया। धीरे-धीरे प्रयोगशाला में उपकरण तो आ गए, लेकिन दशक भर बाद विज्ञान शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी। जिससे प्रयोगशालाओं में रखे सभी उपकरण शोपीस बन कर रह गए हैं। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 33 राजकीय हाईस्कूल और तीन राजकीय इंटर कॉलेज जिले में संचालित हैं। वीएनजीआईसी, जीआईसी जगन्नाथपुर, महराजगंज को छोड़ दिया जाए तो 33 राजकीय हाईस्कूल में स्थिति सबसे खराब है। दो से तीन राजकीय स्कूलों को छोड़ दें तो अन्य में छात्र-छात्राओं की संख्या भी नाममात्र की रह गई है। इसमें राजकीय हाईस्कूल लालानगर, सदौपुर, लालीपुर आदि शामिल हैं, जहां छात्र संख्या 20 से 50 तक सीमित हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक अशोक कुमार चौरसिया ने कहा कि शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए कई बार शासन को पत्र लिखा गया है। शिक्षकों का चयन शासन स्तर से ही होगा। कुछ राजकीय कॉलेजों में तीन से चार साल के अंदर 15 से 20 शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए लेकिन नए शिक्षक नहीं आए।
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