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Bhadohi News: बारिश में संभलकर चलें, खुले ट्रांसफार्मर ले सकते हैं जान
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जीटी रोड घोसिया में पीपल के पास खुला ट्रांसफार्मर। संवाद
ज्ञानपुर। बारिश के दौरान यदि आप ट्रांसफाॅर्मर के किनारे से गुजर रहे हैं तो सतर्क रहें। हल्की सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है। मानसून से पहले विद्युत निगम के सुरक्षा इंतजाम कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। बुधवार को संवाद हमारी टीम ने नईबाजार, गोपीगंज, जंगीगंज, ज्ञानपुर, बाबूसराय आदि क्षेत्रों में पड़ताल की। इसमें प्रमुख स्थानों पर खुले में रखे ट्रांसफाॅर्मर मिले। जिले में दो डिवीजन के माध्यम से 546 गांवों और सात नगर निकायों में बिजली की आपूर्ति की जाती है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कई संवेदनशील स्थानों पर ट्रांसफाॅर्मर बिना बैरिकेडिंग (सुरक्षा घेरे) के खुले में रखे हैं। बारिश शुरू होने के साथ इनके आसपास जलभराव और करंट से हादसों की आशंका बढ़ गई है।
ये ट्रांसफाॅर्मर सड़क किनारे और घनी आबादी के बीच स्थित हैं, जहां बच्चों, राहगीरों और बेजुबान पशुओं की चौबीसों घंटे आवाजाही रहती है। औराई के गिर्दबड़गांव स्थित पीएचसी रोड तथा नईबाजार के पटेल नगर में ट्रांसफाॅर्मरों से निकले जर्जर मिले। जलभराव होने की स्थिति में करंट फैलने की आशंका है। कई स्थानों पर ट्रांसफाॅर्मरों के आसपास झाड़ियां भी उगीं हैं। गिर्दबड़गांव के पीएचसी मार्ग पर प्रतिदिन काफी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार भी आते-जाते हैं।
औराई के गिर्दबड़गांव में पीएचसी मार्ग के किनारे ट्रांसफाॅर्मर खुले में रखा गया है। इस मार्ग पर दिनभर लोगों का आवागमन रहता है। बारिश के दौरान यहां खतरा बढ़ जाता है। नईबाजार के पटेल नगर में ट्रांसफाॅर्मर खुले में रखा गया है। यहां से निकली केबल जमीन के ऊपर होकर इधर-उधर गई हैं। जलभराव की स्थिति में खतरा बढ़ सकता है। गोपीगंज के बड़े शिव मंदिर के पीछे बिना जाली के ट्रांसफाॅर्मर लगा है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। बारिश के दौरान समस्या बढ़ सकती है। घोसियां में भी कई स्थानों पर ट्रांसफाॅर्मर जमीन पर रखे गए हैं।
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तीन साल में करीब 150 करोड़ खर्च
जिले में विद्युत निगम की ओर से बीते तीन वर्षों में वी-रैंप और आरडीडीएस योजना के तहत करीब 150 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें जर्जर बिजली के पोल, जर्जर तार और ट्रांसफाॅर्मरों की सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल रहे। हालांकि, धरातल पर जगह-जगह जर्जर और लटकते तारों के साथ खुले में रखे ट्रांसफाॅर्मर निगम की व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
बचाव के लिए जरूरी टिप्स
बारिश में खंभों और ट्रांसफाॅर्मरों से दूर रहें।
सीलन वाली जगहों पर नंगे पैर न चलें।
बिजली के तार या उपकरण को हाथ न लगाएं।
कहीं करंट का खतरा दिखे तो तुरंत 1912 पर सूचना दें।
जिले में कुल 24 हजार ट्रांसफाॅर्मर
विद्युत निगम के ज्ञानपुर और भदोही डिवीजन में 29 उपकेंद्र हैं, जिनसे जुड़े फीडरों की संख्या 90 से अधिक है। वर्तमान में जिले में कुल 24 हजार 336 ट्रांसफाॅर्मर लगे हैं। इनमें 100 केवीए से कम क्षमता वाले ट्रांसफाॅर्मरों की संख्या 18 से 20 हजार के करीब है, जबकि 250 केवीए या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रांसफाॅर्मरों की संख्या चार हजार है।
विनोद विश्वकर्मा, बड़े शिव
बारिश में ट्रांसफाॅर्मरों के आसपास पानी जमा होने पर करंट फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में विद्युत निगम को खुले में रखे ट्रांसफाॅर्मरों की बैरिकेडिंग, अर्थिंग की जांच और जर्जर विद्युत लाइनों की मरम्मत सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
मकोई गौतम, घोसियां
जिन स्थानों पर ट्रांसफाॅर्मर खुले में हैं या उनके आसपास जलभराव होता है, वहां चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा घेरा लगाया जाना चाहिए। साथ ही बिजली के ढीले तारों और झुके हुए पोलों को तत्काल दुरुस्त कराया जाए, ताकि आम लोगों, खासकर बच्चों और पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
वर्जन
एसके सिंह, एक्सईएन भदोही
250 केवीए के ट्रांसफाॅर्मर ही नीचे रखे जाते हैं। इन्हें रखने से पहले चबूतरा बनाया जाता है। कुछ स्थानों पर विवाद के कारण चबूतरा नहीं बन सका है। उसे बनवाने का प्रयास किया जा रहा है। जर्जर तारों को बदलने और अर्थिंग की जांच का कार्य भी किया जा रहा है।
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ये ट्रांसफाॅर्मर सड़क किनारे और घनी आबादी के बीच स्थित हैं, जहां बच्चों, राहगीरों और बेजुबान पशुओं की चौबीसों घंटे आवाजाही रहती है। औराई के गिर्दबड़गांव स्थित पीएचसी रोड तथा नईबाजार के पटेल नगर में ट्रांसफाॅर्मरों से निकले जर्जर मिले। जलभराव होने की स्थिति में करंट फैलने की आशंका है। कई स्थानों पर ट्रांसफाॅर्मरों के आसपास झाड़ियां भी उगीं हैं। गिर्दबड़गांव के पीएचसी मार्ग पर प्रतिदिन काफी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार भी आते-जाते हैं।
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औराई के गिर्दबड़गांव में पीएचसी मार्ग के किनारे ट्रांसफाॅर्मर खुले में रखा गया है। इस मार्ग पर दिनभर लोगों का आवागमन रहता है। बारिश के दौरान यहां खतरा बढ़ जाता है। नईबाजार के पटेल नगर में ट्रांसफाॅर्मर खुले में रखा गया है। यहां से निकली केबल जमीन के ऊपर होकर इधर-उधर गई हैं। जलभराव की स्थिति में खतरा बढ़ सकता है। गोपीगंज के बड़े शिव मंदिर के पीछे बिना जाली के ट्रांसफाॅर्मर लगा है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। बारिश के दौरान समस्या बढ़ सकती है। घोसियां में भी कई स्थानों पर ट्रांसफाॅर्मर जमीन पर रखे गए हैं।
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तीन साल में करीब 150 करोड़ खर्च
जिले में विद्युत निगम की ओर से बीते तीन वर्षों में वी-रैंप और आरडीडीएस योजना के तहत करीब 150 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें जर्जर बिजली के पोल, जर्जर तार और ट्रांसफाॅर्मरों की सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल रहे। हालांकि, धरातल पर जगह-जगह जर्जर और लटकते तारों के साथ खुले में रखे ट्रांसफाॅर्मर निगम की व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
बचाव के लिए जरूरी टिप्स
बारिश में खंभों और ट्रांसफाॅर्मरों से दूर रहें।
सीलन वाली जगहों पर नंगे पैर न चलें।
बिजली के तार या उपकरण को हाथ न लगाएं।
कहीं करंट का खतरा दिखे तो तुरंत 1912 पर सूचना दें।
जिले में कुल 24 हजार ट्रांसफाॅर्मर
विद्युत निगम के ज्ञानपुर और भदोही डिवीजन में 29 उपकेंद्र हैं, जिनसे जुड़े फीडरों की संख्या 90 से अधिक है। वर्तमान में जिले में कुल 24 हजार 336 ट्रांसफाॅर्मर लगे हैं। इनमें 100 केवीए से कम क्षमता वाले ट्रांसफाॅर्मरों की संख्या 18 से 20 हजार के करीब है, जबकि 250 केवीए या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रांसफाॅर्मरों की संख्या चार हजार है।
विनोद विश्वकर्मा, बड़े शिव
बारिश में ट्रांसफाॅर्मरों के आसपास पानी जमा होने पर करंट फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में विद्युत निगम को खुले में रखे ट्रांसफाॅर्मरों की बैरिकेडिंग, अर्थिंग की जांच और जर्जर विद्युत लाइनों की मरम्मत सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
मकोई गौतम, घोसियां
जिन स्थानों पर ट्रांसफाॅर्मर खुले में हैं या उनके आसपास जलभराव होता है, वहां चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा घेरा लगाया जाना चाहिए। साथ ही बिजली के ढीले तारों और झुके हुए पोलों को तत्काल दुरुस्त कराया जाए, ताकि आम लोगों, खासकर बच्चों और पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
वर्जन
एसके सिंह, एक्सईएन भदोही
250 केवीए के ट्रांसफाॅर्मर ही नीचे रखे जाते हैं। इन्हें रखने से पहले चबूतरा बनाया जाता है। कुछ स्थानों पर विवाद के कारण चबूतरा नहीं बन सका है। उसे बनवाने का प्रयास किया जा रहा है। जर्जर तारों को बदलने और अर्थिंग की जांच का कार्य भी किया जा रहा है।