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विधायक विजय मिश्र के मुकदमों की विवेचना भदोही से बाहर स्थानांतरित करने पर रोक
Sat, 07 Nov 2020 07:00 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 07 Nov 2020 07:00 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश मानवाधिकार आयोग द्वारा बाहुबली विधायक विजय मिश्र के खिलाफ भदोही में दर्ज मुकदमे की विवेचना वाराणसी परिक्षेत्र के किसी अन्य जिले में स्थानांतरित करने पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने आयोग में इस मामले में चल रही सुनवाई पर भी अगले आदेश तक के लिए रोक लगाते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है।
मानवाधिकार आयोग के आदेश को प्रदेश सरकार ने याचिका में चुनौती दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने सुनवाई की। प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल का कहना था कि आयोग ने 11 अगस्त, 17 सितंबर और 25 सितंबर 2020 के आदेशों से भदोही में दर्ज प्राथमिकी केस क्राइम नंबर 237/2020 की सुनवाई भदोही के अलावा वाराणसी परिक्षेत्र के किसी अन्य जिले में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।
गोयल का कहना था कि ऐसा करते समय आयोग ने प्रक्रिया का ध्यान नहीं दिया। महज यह कहते हुए कि दर्ज मुकदमा सिविल प्रकृति का है और इसे दर्ज करने के पीछे पुलिस अधिकारियों का पूर्वाग्रह दिखाई देता है। मुकदमे की विवेचना स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया। जबकि आयोग को ऐसा आदेश देने का क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है।
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कोर्ट ने मुद्दे को विचारणीय मानते हुए आयोग के आदेशों और उसके समक्ष चल रही प्रक्रिया पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है। आयोग से इस मामले में चार सप्ताह में जवाब मांगा है। राज्य सरकार को उसके दो सप्ताह के बाद प्रतिउत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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मानवाधिकार आयोग के आदेश को प्रदेश सरकार ने याचिका में चुनौती दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने सुनवाई की। प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल का कहना था कि आयोग ने 11 अगस्त, 17 सितंबर और 25 सितंबर 2020 के आदेशों से भदोही में दर्ज प्राथमिकी केस क्राइम नंबर 237/2020 की सुनवाई भदोही के अलावा वाराणसी परिक्षेत्र के किसी अन्य जिले में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।
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गोयल का कहना था कि ऐसा करते समय आयोग ने प्रक्रिया का ध्यान नहीं दिया। महज यह कहते हुए कि दर्ज मुकदमा सिविल प्रकृति का है और इसे दर्ज करने के पीछे पुलिस अधिकारियों का पूर्वाग्रह दिखाई देता है। मुकदमे की विवेचना स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया। जबकि आयोग को ऐसा आदेश देने का क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है।
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कोर्ट ने मुद्दे को विचारणीय मानते हुए आयोग के आदेशों और उसके समक्ष चल रही प्रक्रिया पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है। आयोग से इस मामले में चार सप्ताह में जवाब मांगा है। राज्य सरकार को उसके दो सप्ताह के बाद प्रतिउत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है।