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चुनाव समय से न कराने पर एकमा सदस्यों में असंतोष

Fri, 29 Jan 2016 02:12 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, भदोही
ब्यूरो/ अमर उजाला, भदोही Updated Fri, 29 Jan 2016 02:12 AM IST
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At the time the only member not to discontent
कहा कि सीईपीसी के चुनाव नियमों के तहत और समयबद्ध तरीके से होने चाहिए।
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सीईपीसी के प्रशासनिक समिति में चेयरमैन और दो उपाध्यक्ष मिलाकर कुल 16 सदस्य हैं। नियम यह है कि हर वर्ष एक तिहाई सदस्यों की सेवा समाप्त (रिटायर) होगी और चुनाव कराकर उनके स्थान भरे जाएंगे।

 बृहस्पतिवार को बैठक में एकमा सदस्यों ने कहा कि सेवा समाप्ति मनमाना हो गया है। सेवानिवृत्ति की तारीख अपने हिसाब से तय की जा रही है, जो ठीक नहीं है।
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एकमा के पूर्व मानद सचिव अरशद वजीरी ने सवाल किया कि इसकी तिथि निर्धारित होनी चाहिए ताकि दूसरों को भी अवसर मिले। अन्य सदस्यों ने भी इस पर सहमति जताई।

 सभी ने एक स्वर में कहा कि यह सब बंद होना चाहिए। उन्होंने बताया कि परिषद के चुनाव में मतों की खरीद फरोख्त रोकने के लिए एक खास कदम यह उठाया गया है।
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बताया कि अब चुनाव की अधिसूचना जारी होने की तिथि तक जो वैध मतदाता होंगे, केवल उन्हेें ही मताधिकार मिलेगा। प्रशासनिक समिति के सदस्य पद का चुनाव केवल वही लड़ सकता है, जो गत तीन वर्षों के किसी एक वर्ष में कम से कम 25 लाख का कालीन निर्यात किया होगा।

 इसके अलावा परिषद ने सदस्यता शुल्क में भी भारी फेरबदल करते हुए कम से कम दस हजार और अधिकतम 10 हजार का स्लैब बना दिया।

 बैठक में एकमाध्यक्ष विनय कपूर, पूर्व सीईपीसी अध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह, एसएस तिवारी, तनवीर हुसैन, पीयूष बरनवाल, रवि पाटोदिया, नसरुल्लाह अंसारी, उमेश गुप्ता मुन्ना, वासिफ अंसारी, अब्दुल हादी, ओएन मिश्र बच्चा, एसी बरनवाल, अनिल सिंह, हाजी शौकत अली, हाजी सईद अंसारी, अश्फाक अंसारी, वीके सिन्हा, राजाराम गुप्ता, पीसी जायसवाल, आलोक बरनवाल, हाजी अब्दुल सत्तार आदि ने विचार व्यक्त किए।


इनसेट
प्रथम उपाध्यक्ष ही होगा अब चेयरमैन  
भदोही। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) और एकमा की संयुक्त बैठक में परिषद के अधिशासी निदेशक शिवकुमार गुप्ता ने लोगों को सरकार द्वारा की जा रही एक और पहल से अवगत कराते हुए बताया कि आगे से चेयरमैन पद पर चुनाव नहीं होगा। जो प्रथम उपाध्यक्ष चुना जाएगा, दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर वह सीधे अध्यक्ष पद पर आसीन हो जाएगा। इस मसले पर काफी देर तक विचार विमर्श के बाद लोग सहमत हो गए।


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