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लोकार्पण के तीन माह बाद भी पशु पाली क्लीनिक अधूरा
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ज्ञानपुर। विभागीय अधिकारियों की निगरानी में सुस्ती कहें या फिर कार्यदायी संस्था द्वारा कराए जा नहे काम में लापरवाही। 6.49 करोड़ रुपये की लागत से ज्ञानपुर में बन रहे मंडल के इकलौते पशु पाली क्लीनिक का काम सवा तीन साल बाद भी अधूरा है। खास बात तो यह कि इसका लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन माह पहले ही कर दिया था।
मंडल के तीनों जिलों मिर्जापुर, सोनभद्र और भदोही के पशुपालकों को राहत देने, पशुओं के बेहतर इलाज के लिए शासन ने वर्ष 2018 में पशु पाली क्लीनिक बनाने की स्वीकृति दी थी। नवंबर 2018 में काम भी शुरू हो गया। छह करोड़ 49 लाख रुपये की लागत से काम शुरू कराया गया। अक्तूबर 2021 में जिले के दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया तो पशु पाली क्लीनिक का भी लोकार्पण कर दिया। अक्तूबर के बाद तीन माह का समय बीत गया, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हुआ। यहां काम कराने वालों की मानें तो अभी 10 फीसदी काम बाकी है। जिस गति से हो रहा है उस हिसाब से तो अभी और समय लगेगा।
ये काम हैं बाकी
पशु पाली क्लीनिक का भवन तो बनकर तैयार है, लेकिन फिनिशिंग बाकी है। चिकित्सकीय टीम के रहने के लिए बन रहा आवास भी अधूरा है। मुख्य भवन में भी छोटे-मोटे कई काम बाकी हैं।
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क्या-क्या मिलनी है सुविधा
तीन जिलों के पशु पालकों को राहत देने के लिए यहां सभी तरह की व्यवस्थाएं होनी हैं। यहां आधुनिक तरीके से पशुओं का इलाज होगा, फैक्चर आदि के कार्य भी कराए जाएंगे। इसके साथ ही पशुओं में होने वाली किसी भी तरह की बीमारी को ठीक किया जाएगा।
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मंडल के तीनों जिलों मिर्जापुर, सोनभद्र और भदोही के पशुपालकों को राहत देने, पशुओं के बेहतर इलाज के लिए शासन ने वर्ष 2018 में पशु पाली क्लीनिक बनाने की स्वीकृति दी थी। नवंबर 2018 में काम भी शुरू हो गया। छह करोड़ 49 लाख रुपये की लागत से काम शुरू कराया गया। अक्तूबर 2021 में जिले के दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया तो पशु पाली क्लीनिक का भी लोकार्पण कर दिया। अक्तूबर के बाद तीन माह का समय बीत गया, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हुआ। यहां काम कराने वालों की मानें तो अभी 10 फीसदी काम बाकी है। जिस गति से हो रहा है उस हिसाब से तो अभी और समय लगेगा।
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ये काम हैं बाकी
पशु पाली क्लीनिक का भवन तो बनकर तैयार है, लेकिन फिनिशिंग बाकी है। चिकित्सकीय टीम के रहने के लिए बन रहा आवास भी अधूरा है। मुख्य भवन में भी छोटे-मोटे कई काम बाकी हैं।
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क्या-क्या मिलनी है सुविधा
तीन जिलों के पशु पालकों को राहत देने के लिए यहां सभी तरह की व्यवस्थाएं होनी हैं। यहां आधुनिक तरीके से पशुओं का इलाज होगा, फैक्चर आदि के कार्य भी कराए जाएंगे। इसके साथ ही पशुओं में होने वाली किसी भी तरह की बीमारी को ठीक किया जाएगा।
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