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Bhadohi News: आत्मदाह के हथकंडे से बात मनवाने का प्रयास, कोई सही तो कोई गलत
Thu, 21 Dec 2023 12:27 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भदोही
संवाद न्यूज एजेंसी, भदोही
Updated Thu, 21 Dec 2023 12:27 AM IST
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ज्ञानपुर। अब इसे सरकारी महकमे की लापरवाही से उपजा असंतोष कहिए या फिर अपनी बात मनवाने का नया हथकंडा। जिले में आत्मदाह के हथकंडे से तमाम फरियादी अपनी बात मनवाने का प्रयास कर रहे हैं। इस साल के आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो लगभग आधा दर्जन ऐसे मामले सामने आए हैं। जिसमें कोई फरियादी पानी की टंकी पर चढ़कर तो कोई खुद पर पेट्रोल डालकर अपनी बात मनवाना चाहता है। गौर करने वाली बात है कि इसमें कुछ शिकायतें सही होती हैं तो कुछ गलत।
जिले में हर शनिवार को आयोजित होने वाले समाधान और सम्पूर्ण समाधान दिवस में लगभग 100 से अधिक शिकायतें होती हैं। जिसमें सम्पूर्ण समाधान में शिकायतों का निस्तारण 15 से 20 फीसदी का है तो समाधान दिवसों में यह आंकड़ा केवल 10 फीसदी तक ही सीमित है। यहां यह बात भी गौर करने वाली होती है कि समाधान दिवस हो या फिर सम्पूर्ण समाधान दिवस। दोनों में 80 से 85 फीसदी तक शिकायतें राजस्व से जुड़ी होती हैं। अधिकारियों के अनुसार राजस्व से जुडे मामलों का तत्काल निस्तारण व अन्य शिकायतों की अपेक्षा थोड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि राजस्व की प्रक्रिया थोड़ी जटिल होती है। शिकायतों का निस्तारण न होने से कई फरियादियों को समाधान दिवस से लेकर अफसरों के कार्यालयों तक चार से पांच बार दौड़ लगानी पड़ती है। फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिलता है तो आत्मदाह का हथकंडा अपनाते हैं। जिले में बीते छह महीने के आंकड़ों पर गौर करेंगे तो भदोही दो, औराई में एक, दुर्गागंज में एक, गोपीगंज में एक सहित कुछ आधा दर्जन आत्मदाह के प्रयास के मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि इनमें तमाम फरियादियों की शिकायतें गलत मिली। इसके बाद भी प्रशासन उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत रहा।
क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
जिला चिकित्सालय में तैनात अशोक पराशर ने बताया कि आत्महत्या एक बहुत बड़ा कदम होता है। अगर कोई व्यक्ति को कहीं से मदद मिलती नहीं दिखती तो वे लोग इस तरह का कदम उठाने को मजबूर होते हैं। लगभग 96 फीसदी लोग तनाव में आकर इस तरह का कदम उठाते हैं। वहीं चार फीसदी लोग व्यक्तित्व विकृति और बार्डर लाइन डिसऑर्डर की श्रेणी में आते हैं। जिनकी यह मनोवृत्ति होती है कि वे अगर ऐसा करेंगे तो उनकी बात को सुना जाएगा। इस तरह के लोग कई बार जाने-अनजाने में हादसे का शिकार हो जाते हैं।
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शिकायतें और निस्तारण
समाधान दिवस - 544 में 62
सम्पूर्ण समाधान दिवस - 1036 में 161
(आंकड़े बीते तीन महीनों के हैं)
केस एक- तीन जुलाई, 2023 को औराई तहसील के पास सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान खमरिया के भजईपुर निवासी झिंगुरी बनवासी ने जमीन पर कब्जे का आरोप लगाकर अपने ऊपर पेट्रोल डाला था। पुलिस उसे पकड़कर कोतवाली ले गई। उसके शिकायत की जांच हुई तो शिकायत गलत मिली। जिस जमीन को वह अपना बता रहा था। असल में वह जमीन किसी दूसरे की भूमिधरी थी।
केस दो- 29 जनवरी, 2023 गोपीगंज क्षेत्र के कसिदहां गांव निवासी लवकुश मौर्य अपने घर आने-जाने के लिए रास्ते की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गया। नायाब तहसीलदार के समझाने पर वह उतरा। बाद में अधिकारियों ने उसकी समस्या का समाधान कराया।
-अपनी बात मनवाने के लिए आत्मदाह जैसे हथकंडे अपनाने वाले लोगों के साथ पहली दफा मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाता है। अगर उनकी शिकायत सही होती है तो न सिर्फ उसका निस्तारण होता है, बल्कि उनको अन्य मदद भी मुहैया कराई जाती है। वहीं अगर शिकायत गलत है तो उसे समझाया जाता है। अगर वह फिर भी नहीं मानता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है, क्योंकि इस तरह का कदम कहीं से भी उचित नहीं है। - गौरांग राठी, जिलाधिकारी।
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जिले में हर शनिवार को आयोजित होने वाले समाधान और सम्पूर्ण समाधान दिवस में लगभग 100 से अधिक शिकायतें होती हैं। जिसमें सम्पूर्ण समाधान में शिकायतों का निस्तारण 15 से 20 फीसदी का है तो समाधान दिवसों में यह आंकड़ा केवल 10 फीसदी तक ही सीमित है। यहां यह बात भी गौर करने वाली होती है कि समाधान दिवस हो या फिर सम्पूर्ण समाधान दिवस। दोनों में 80 से 85 फीसदी तक शिकायतें राजस्व से जुड़ी होती हैं। अधिकारियों के अनुसार राजस्व से जुडे मामलों का तत्काल निस्तारण व अन्य शिकायतों की अपेक्षा थोड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि राजस्व की प्रक्रिया थोड़ी जटिल होती है। शिकायतों का निस्तारण न होने से कई फरियादियों को समाधान दिवस से लेकर अफसरों के कार्यालयों तक चार से पांच बार दौड़ लगानी पड़ती है। फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिलता है तो आत्मदाह का हथकंडा अपनाते हैं। जिले में बीते छह महीने के आंकड़ों पर गौर करेंगे तो भदोही दो, औराई में एक, दुर्गागंज में एक, गोपीगंज में एक सहित कुछ आधा दर्जन आत्मदाह के प्रयास के मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि इनमें तमाम फरियादियों की शिकायतें गलत मिली। इसके बाद भी प्रशासन उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत रहा।
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क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
जिला चिकित्सालय में तैनात अशोक पराशर ने बताया कि आत्महत्या एक बहुत बड़ा कदम होता है। अगर कोई व्यक्ति को कहीं से मदद मिलती नहीं दिखती तो वे लोग इस तरह का कदम उठाने को मजबूर होते हैं। लगभग 96 फीसदी लोग तनाव में आकर इस तरह का कदम उठाते हैं। वहीं चार फीसदी लोग व्यक्तित्व विकृति और बार्डर लाइन डिसऑर्डर की श्रेणी में आते हैं। जिनकी यह मनोवृत्ति होती है कि वे अगर ऐसा करेंगे तो उनकी बात को सुना जाएगा। इस तरह के लोग कई बार जाने-अनजाने में हादसे का शिकार हो जाते हैं।
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शिकायतें और निस्तारण
समाधान दिवस - 544 में 62
सम्पूर्ण समाधान दिवस - 1036 में 161
(आंकड़े बीते तीन महीनों के हैं)
केस एक- तीन जुलाई, 2023 को औराई तहसील के पास सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान खमरिया के भजईपुर निवासी झिंगुरी बनवासी ने जमीन पर कब्जे का आरोप लगाकर अपने ऊपर पेट्रोल डाला था। पुलिस उसे पकड़कर कोतवाली ले गई। उसके शिकायत की जांच हुई तो शिकायत गलत मिली। जिस जमीन को वह अपना बता रहा था। असल में वह जमीन किसी दूसरे की भूमिधरी थी।
केस दो- 29 जनवरी, 2023 गोपीगंज क्षेत्र के कसिदहां गांव निवासी लवकुश मौर्य अपने घर आने-जाने के लिए रास्ते की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गया। नायाब तहसीलदार के समझाने पर वह उतरा। बाद में अधिकारियों ने उसकी समस्या का समाधान कराया।
-अपनी बात मनवाने के लिए आत्मदाह जैसे हथकंडे अपनाने वाले लोगों के साथ पहली दफा मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाता है। अगर उनकी शिकायत सही होती है तो न सिर्फ उसका निस्तारण होता है, बल्कि उनको अन्य मदद भी मुहैया कराई जाती है। वहीं अगर शिकायत गलत है तो उसे समझाया जाता है। अगर वह फिर भी नहीं मानता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है, क्योंकि इस तरह का कदम कहीं से भी उचित नहीं है। - गौरांग राठी, जिलाधिकारी।