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Bhadohi News: माता-पिता के संबल से कठिन परिस्थितियों से जूझकर निखरी आरती

Tue, 17 Oct 2023 01:05 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 17 Oct 2023 01:05 AM IST
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Aarti flourished after battling difficult circumstances with the support of her parents.
कठिन परिस्थितियां ही प्रतिभा को निखारती हैं और व्यक्ति को प्रेरणा से भर देती है। भदोही ब्लॉक के फत्तूपुर निवासी आशाराम यादव व गायत्री देवी की आठ बेटियों में तीसरे नंबर की बेटी आरती यादव कठिन परिस्थितियों से जूझी और प्रेरणा से भर गई। हॉकी खिलाड़ी के रूप में निखर कर सामने आई। मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्पेशल ब्रांच में तैनात आरती ने सोमवार को अमर उजाला से बताया कि आठ बेटियों को पालना किसी भी मां-बाप के लिए पहाड़ जैसा हो सकता है, लेकिन उनके माता-पिता ने पहाड़ से टकराकर बेटियों का पालन पोषण अच्छे से किया। बताया कि उन्होंने 2008 में हॉकी खेलना शुरू किया। माता-पिता ने भरपूर सहयोग दिया। इसका नतीजा रहा कि उन्होंने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। अभिभावक के संबल से उन्होंने हर परिस्थिति का डटकर सामना किया। साई धार एमपी का ट्रायल दिया और मध्यप्रदेश महिला हॉकी टीम के लिए उनका चयन हो गया। इसके बाद आरती मध्यप्रदेश की ओर से मैच खेली। छह वर्ष में ही वह राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खिलाड़ी के रूप में कीर्ति पाई गई। 2014 मेें खेल कोटे से मध्य प्रदेश पुलिस में भर्ती हुई। वर्तमान में वह जबलपुर में स्पेशल ब्रांच में बतौर कांस्टेबल तैनात हैं। नौकरी के साथ ही आरती परिवार का जिम्मा अपने कंधे पर उठाती हैं।
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फोटो: 03
195 साल पहले कुएं से मिली थी मां की प्रतिमा
भदोही। नगर के कटरा बाजार स्थित प्राचीन मां शीतला माता मंदिर की महिमा निराली है। मंदिर के पुजारी मेवा माली ने बताया कि यह मंदिर 195 साल पुराना है। सेवादार अशोक कुमार माली बताया कि विक्रम संवत 1885 में मंदिर स्थल पर कुआं खोदाई के दौरान माता की छोटी मूर्ति मिली थी। कुआं को लेकर लोगों की विशेष आस्था है। सेवादार महेश माली ने बताया कि मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर 25 साल बाद भव्य स्वरूप दिया गया। यहां नवरात्र में मां के दर्शन पूजन के लिए दूर-दूृर से श्रद्धालु आते हैं।
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इस तरह करें पूजा
ज्ञानपुर के भिदिउरा निवासी आचार्य गणेश महाराज ने बताया कि नवरात्र के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की उपासना की जाती है। मां चंद्रघंटा का रूप बहुत ही सौम्य है। मां को सुगंधप्रिय है। उनका वाहन सिंह है। उनके दस हाथ हैं। हर हाथ में अलग-अलग शस्त्र हैं। वे आसुरी शक्तियों से रक्षा करती हैं। मां चंद्रघंटा की आराधना करने से अहंकार नष्ट होता है और भक्त को सौभाग्य, शांति और वैभव की प्राप्ति होती है। मां को गाय के दूध का भोग लगाया जाता है।
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इन मंत्रों का करें जाप
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।
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या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम
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