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अयोध्या में मंथरा की कूटनीति, राम को वनवास
Updated Mon, 29 Oct 2018 12:13 AM IST
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सरियावां। अयोध्या में युवराज राम के राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही थी, लेकिन मंथरा की चाल से अचानक भाग्य ने ऐसा पासा पलटा की उन्हें 14 वर्षों के लिए वन जाना पड़ा। इसकी वजह से अयोध्या में खलबली मच गई, चारों ओर सियापा छा गया। अभिया में आदर्श रामलीला समिति की तरफ से आयोजित रामलीला के तीसरे दिन राम वनगमन और केवट संवाद का मंचन किया गया। इस दौरान काफी संख्या में दर्शक मौजूद थे। महाराज दशरथ चैथापन आने की वजह से गुरु बशिष्ठ और मंत्री परिषद की सलाह के बाद जब राम को युवराज पद देने का फैसला किया तो अयोध्या में खुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन मंथरा की कुटिल चाल से यह खुशियों का माहौल अचानक बदल गया। कूबरी की बातों में आकर महारानी कैकेई अपने बेटे भरत को राजगद्दी और श्रीराम को 14 वर्षों का वनवास मांग लिया। जिसकी वजह से राम को वनवास हुआ। लेकिन महारानी कैकेई के इस आघात को महाराश दशरथ बर्दास्त नहीं कर पाए। वन गमन के दौरान भगवान श्रीराम को केवट ने गंगा पार उतारा। जहां मां सीता ने उन्हें अंगूठी दिया, लेकिन केवट ने नहीं लिया। वहीं, चौरी इलाके के लठिया में चल रही रामलीला में शनिवार को कुंभकरण और मेघनाथ वध का मंचन दिखाया गया। लक्ष्मण की मूर्छा समाप्त होने पर लंकापति रावण अपने बलशाली भाई कुंभकरण को नीद से जगाता है। कुंभकरण कहता है कि आपने राम से दुश्मनी लेकर ठीक नही किया। इस युद्ध मे लंका में कुछ नही बचेगा, फिर भी मैं युद्ध के लिए जा रहा हूं। युद्ध मे कुंभकरण मारा जाता है । उसके बाद मेघनाद जाता है उसे लक्ष्मण ने मार दिया। इसके बाद रावण विचलित हो जाता है।मौके पर प्रदीप चौबे, सभाशंकर तिवारी, कृष्कांत त्रिपाठी, मोनू तिवारी, दयाशंकर यादव, अरविंद तिवारी, सूरज चौबे आदि रहे।
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