{"_id":"59612ebf4f1c1b98148b458f","slug":"81499541183-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शुल्क प्रतिपूर्ति और क्षतिपूर्ति देने का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शुल्क प्रतिपूर्ति और क्षतिपूर्ति देने का आदेश
Updated Sun, 09 Jul 2017 12:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्ञानपुर। जिले के उपभोक्ता फोरम अदालत ने समाज कल्याण अधिकारी, केशव प्रसाद राल्ही औराई के प्राचार्य और डीआईओएस को बीएड छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति, क्षतिपूर्ति देने का आदेश पारित किया है।
महराजगंज के भावापुर गांव निवासी गणेश चौबे, वेदमनपुर के विवेक दुबे और गंगापुर तलिया की गुड़िया मिश्र ने न्यायालय जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया था। उसमें बताया कि वे केशव प्रसाद राल्ही महाविद्यालय औराई में बीएड छात्र थे। अन्य छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति खाते में भेज दी गई। लेकिन, उनके खाते में निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी नहीं भेजी गई। प्रकरण गंभीरता से लेकर उपभोक्ता फोरम अदालत ने मामले की सुनवाई शुरू की। फोरम के अध्यक्ष जर्नादन सिंह, सदस्या अनीता ने आदेश पारित किया कि तीनों छात्रों को 48050 रुपये की दर से अलग-अलग शुल्क प्रतिपूर्ति मिले। प्रत्येक को शारीरिक, आर्थिक और मानसिक क्षति तौर पर पांच-पांच हजार रुपये, एक-एक हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में दिया जाए। यह भी कहा कि उक्त धनराशि पर नौ प्रति शत साधारण वार्षिक ब्याज के साथ अदायगी की जाए।
विज्ञापन
महराजगंज के भावापुर गांव निवासी गणेश चौबे, वेदमनपुर के विवेक दुबे और गंगापुर तलिया की गुड़िया मिश्र ने न्यायालय जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया था। उसमें बताया कि वे केशव प्रसाद राल्ही महाविद्यालय औराई में बीएड छात्र थे। अन्य छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति खाते में भेज दी गई। लेकिन, उनके खाते में निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी नहीं भेजी गई। प्रकरण गंभीरता से लेकर उपभोक्ता फोरम अदालत ने मामले की सुनवाई शुरू की। फोरम के अध्यक्ष जर्नादन सिंह, सदस्या अनीता ने आदेश पारित किया कि तीनों छात्रों को 48050 रुपये की दर से अलग-अलग शुल्क प्रतिपूर्ति मिले। प्रत्येक को शारीरिक, आर्थिक और मानसिक क्षति तौर पर पांच-पांच हजार रुपये, एक-एक हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में दिया जाए। यह भी कहा कि उक्त धनराशि पर नौ प्रति शत साधारण वार्षिक ब्याज के साथ अदायगी की जाए।
विज्ञापन