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पीएम आवास के 200 अपात्रों की रिकवरी लटकी

Wed, 27 Mar 2019 01:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 27 Mar 2019 01:15 AM IST
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पीएम आवास के 200 अपात्रों की रिकवरी लटकी

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ज्ञानपुर। गरीबों को आशियाना उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना भी धांधली की भेंट चढ़ गई। वित्तीय वर्ष 2016-17, 2017-18 और 2018-19 में करीब 415 अपात्र लाभार्थियों ने करीब चार करोड़ से अधिक रुपये गड़प कर लिया। जांच में मामला सामने आया तो वसूली की कवायद शुरू हुई, लेकिन एक साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी 200 से अधिक अपात्रों से रिकवरी नहीं हो सकी। हालांकि प्रशासन का दावा है कि रिकवरी की जा रही है।

बताते चलें कि सरकार की ओर से गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 में पांच हजार 981 और 2017-18 में चार हजार 560 और 2018-19 में करीब चार हजार आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया। तीन वित्तीय वर्ष में 9350 आवास बने, लेकिन कई अब भी पूर्ण नहीं हो सके। गांवों से मिल रही शिकायत के बाद जांच कराई गई तो जिले के सभी ब्लॉकों में 415 अपात्र मिले। शुरुआती दौर में प्रधानों, सचिवों और विभागीय आला अधिकारियों के तालमेल से गाइडलाइन को ताक पर रखकर अपात्रों को आवास आवंटित कर दिया गया। प्रधानमंत्री आवास को अपात्रों को आवंटित करने की आए दिन मिल रही शिकायत को तत्कालीन जिलाधिकारी विशाख जी ने गंभीरता से लिया था। आवासों के सत्यापन में पाया गया कि जिले में 415 अपात्रों को आवास आवंटित कर दिया गया था। सभी को पहले और दूसरे किश्त के रूप में एक लाख 10 हजार जारी भी हो चुका। अकेले विकास खंड डीघ में 130 अपात्र मिले थे। शुरुआत में सख्ती दिखाई गई और तीन सेक्रेटरी को निलंबित भी किया गया। प्रशासन का दावा है कि 200 से अधिक अपात्रों ने सरकारी पैसा वापस कर दिया। हालांकि अब भी 215 के करीब अपात्रों ने पैसा नहीं जमा किया। सूत्रों की मानें तो शुरुआती दौर में नोटिस तो दी गई थी लेकिन बाद में अधिकारियों की कृपा से इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। धीरे-धीरे एक साल से अधिक का समय बीत गया, लेकिन अपात्रों से सरकारी धन की वसूली नहीं हो सकी। परियोजना निदेशक मनोज कुमार ने कहा कि रिकवरी की प्रक्रिया चल रही है। बीडीओ को निर्देशित किया गया है कि जो पैसा न जमा करें उन पर एफआईआर दर्ज की जाए।
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