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परगासपुर के प्रधान का अधिकार सीज, सेक्रेटरी निलंबित
Updated Fri, 29 Dec 2017 01:01 AM IST
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ज्ञानपुर। भदोही विकास खंड के परगासपुर गांव के विकास कार्यों में एक लाख 35 हजार गबन के मामले में डीएम विशाख जी ने ग्राम प्रधान का प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार सीज कर ग्राम पंचायत अधिकारी को निलंबित किया। गांव के विकास कार्यों में बाधा न हो, इसके लिए एक सप्ताह में तीन सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया। तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक के खिलाफ बर्खास्तगी की तैयारी की जा रही है।
परगासपुर गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद तिवारी समेत अन्य ग्रामीणों ने जनता दर्शन में प्रार्थना पत्र देकर गांव के विकास कार्यों में धांधली का आरोप लगाया था। डीएम ने जांच के लिए उपायुक्त श्रम और अधिशासी अभियंता नहर को नामित किया। जांच अफसरों ने 22 जुलाई 2017 को आख्या सौंपी। जांच आख्या के आधार पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने ग्राम प्रधान जोंगेंद्र और ग्राम पंचायत अधिकारी सभाजीत को कारण बताओ नोटिस भेजकर जवाब मांगा। 30 अगस्त को प्रधान और सेक्रेटरी ने अपना जवाब सौंपा। 30 सितंबर को डीएम के निर्देश पर गठित परीक्षण कमेटी में शामिल परियोजना प्रबंधक भूमि सुधार और अधिशासी अभियंता नलकूप ने फोटोग्राफ समेत स्पष्टीकरण आख्या का अवलोकन किया। इसमें धईकार बस्ती से हरिजन बस्ती तक मिट्टी के कार्य समेत अन्य बिंदुओं की पड़ताल की गई। सत्यापन में प्रधान और सेक्रेटरी का स्पष्टीकरण सही नहीं मिला। दोनों पर एक लाख 35 हजार का गबन सही पाया गया, जो कार्रवाई के लिए पर्याप्त दिखा। परीक्षण कमेटी के अधिकारियों के रिपोर्ट पर जिलाधिकारी विशाख जी ने ग्राम प्रधान के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार को सीज करते हुए ग्राम पंचायत अधिकारी को निलंबित किया। उन्होंने गांव के रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक की संविदा समाप्त करने की संस्तुति भी की। दोनों की संविदा समाप्त करने की कवायद चल रही है। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल त्रिपाठी ने कहा कि जनहित के कार्यों में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गबन में जिन लोगों का नाम सामने आ रहा है, सभी पर कार्रवाई होगी।
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परगासपुर गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद तिवारी समेत अन्य ग्रामीणों ने जनता दर्शन में प्रार्थना पत्र देकर गांव के विकास कार्यों में धांधली का आरोप लगाया था। डीएम ने जांच के लिए उपायुक्त श्रम और अधिशासी अभियंता नहर को नामित किया। जांच अफसरों ने 22 जुलाई 2017 को आख्या सौंपी। जांच आख्या के आधार पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने ग्राम प्रधान जोंगेंद्र और ग्राम पंचायत अधिकारी सभाजीत को कारण बताओ नोटिस भेजकर जवाब मांगा। 30 अगस्त को प्रधान और सेक्रेटरी ने अपना जवाब सौंपा। 30 सितंबर को डीएम के निर्देश पर गठित परीक्षण कमेटी में शामिल परियोजना प्रबंधक भूमि सुधार और अधिशासी अभियंता नलकूप ने फोटोग्राफ समेत स्पष्टीकरण आख्या का अवलोकन किया। इसमें धईकार बस्ती से हरिजन बस्ती तक मिट्टी के कार्य समेत अन्य बिंदुओं की पड़ताल की गई। सत्यापन में प्रधान और सेक्रेटरी का स्पष्टीकरण सही नहीं मिला। दोनों पर एक लाख 35 हजार का गबन सही पाया गया, जो कार्रवाई के लिए पर्याप्त दिखा। परीक्षण कमेटी के अधिकारियों के रिपोर्ट पर जिलाधिकारी विशाख जी ने ग्राम प्रधान के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार को सीज करते हुए ग्राम पंचायत अधिकारी को निलंबित किया। उन्होंने गांव के रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक की संविदा समाप्त करने की संस्तुति भी की। दोनों की संविदा समाप्त करने की कवायद चल रही है। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल त्रिपाठी ने कहा कि जनहित के कार्यों में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गबन में जिन लोगों का नाम सामने आ रहा है, सभी पर कार्रवाई होगी।
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