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भगवान भी भक्ति के आधीन होते हैं
Updated Sun, 02 Dec 2018 12:28 AM IST
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सुरियावां। सत्संग मंडल सुरियावां की ओर से शनिवार को रामलीला मैदान में नौ दिवसीय श्रीराम कथा का शुभारंभ किया गया। कथा वाचक जगतगुरु रामभद्राचार्य की शिष्या काशी मानस कोकिला सुप्रिया पाठक ने श्रीराम के आदर्श के बारे में बताया। कथा के पहले दिन सुप्रिया पाठक ने राघव सरकार की महत्ता और अंजनी पुत्र बजरंग बली की विशिष्टता का संक्षेप में वर्णन किया। कहा की सत्संग मानव जीवन का सर्वोत्तम सद्मार्ग है। भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने से ही मानव का कल्याण संभव है। सच्चे मन से जो भी उनका सुमिरन करता है, वह हर संकट से मुक्त हो जाता है। जिस भाव से भक्ति की जाती है, भगवान उसी आधार पर उसे फल प्रदान करते हैं। इस दौरान जब कथा वाचक पाठक जी ने आज मंगलवार है महाप्रभु का वार है, भक्त के वश में है भगवान जैसे भजन सुनाया तो भक्त भाव विभोर हो गए। इस मौके पर डॉ. अजय पांडेय, घनश्याम दास, जटाशंकर मौर्य, प्रेमविहारी उपाध्याय, आशाराम यादव, कमला प्रसाद पांडेय, राम गरीब गुप्ता, छेदीलाल गुप्ता, राधेश्याम, अवधेश कुमार, शिव भूषण दुबे, विजयशंकर राय, एके सिंह, राजेंद्र प्रसाद, रामेश्वर आदि रहे।
सीतामढ़ी। महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली सीतामढ़ी में वाल्मीकि समाज ने शनिवार को स्वामी परमहंस जी महराज का स्वागत किया। भगवान श्री राम के मंदिर निर्माण में परमहंस जी महराज का साथ देने का निर्णय लिया। समाज के लोगों ने कहा कि यदि छह दिसंबर तक केंद्र और प्रदेश की सरकारें श्री राम मंदिर निर्माण के लिए कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है तो परमहंस जी महराज के आत्मदाह के पश्चात सरकार दलित विरोधी घोषित हो जाएगी। महराज ने कहा कि राष्ट्र में भगवान श्री राम के आदर्शों के स्थापना की जरूरत है। हमें बाबर के चरित्र की तिनके मात्र की जरूरत नहीं है। देश और प्रदेश के मुखियाओं पर बरसते हुए कहा कि श्री राम के नाम पर ही आज भाजपा का परचम पूरे देश में लहरा रहा है, लेकिन सरकार के लोग कुर्सी पर बैठते ही अहंकार के मद में चूर हो गए हैं। उन्हें अपना वादा भी याद नहीं रहा। इसलिए संत समाज सरकार को जगाने का प्रयास कर रहा है। कहा कि बाबर आतंकवादी था, बर्बर शब्द से बाबर बना है। उसके नाम पर भारत मे कोई भी मस्जिद या मकबरा नहीं रहेगा। स्वामी जी रविवार को सीता समाहित स्थल पर दर्शन पूजन के बाद वहां की मिट्टी लेकर अयोध्या रवाना होंगे। इस मौके पर पं हरिप्रसाद मिश्रा, पप्पू सिंह, स्वामी शांतानंद, राजधर मिश्रा, सरकार शुक्ला संग वाल्मीकि समाज के गामा, अशोक, बांके बिहारी, बनारसी, लालचंद, सुनील, ऋषभ, शिवबाबू आदि रहे।
ज्ञानपुर। गोसाईं बाजार स्थित चौरा माता मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को नटवर नागर श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। माखन चोरी, पुतना वध, गोवर्धन पर्वत को उठाना आदि प्रसंगों का मार्मिक प्रवचन सुनकर श्रोता निहाल हो गए।
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मथुरा वृंदावन से आए कथावाचक पं. मुरारी शरण बृजवासी ने भगवत भक्ति का मर्म समझाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने नर लीला के रूप में एक महान आदर्श स्थापित किया। बाल्यकाल के दौरान शरारतें और युवावस्था के बाद संजीदगी से भरा उनका व्यक्तित्व समाज के लिए बड़ी सीख है। पृथ्वी पर सबसे बड़े योगी श्रीकृष्ण ने अपनी हर लीला में जनमानस के लिए संदेश दिया है। पूतना राक्षसी बालक श्रीकृष्ण को अपना जहरीला दूध पिलाकर मारना चाहती थी, लेकिन प्रभु ने उसे ही सुरलोक पहुंचा दिया। भगवान ने भक्त और देवताओं का घमंड भी तोड़ा। अपनी पूजा न होने से नाराज इंद्रदेव ने कई दिनों तक जब लगातार बारिश की तो उनके अहंकार को तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को एक अंगुली पर उठा लिया और पूरी जनता उसके नीचे सुरक्षित हो गई। कथा सुनने के लिए पंडाल में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इस मौके पर बाबा तेज प्रताप दास समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
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सीतामढ़ी। महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली सीतामढ़ी में वाल्मीकि समाज ने शनिवार को स्वामी परमहंस जी महराज का स्वागत किया। भगवान श्री राम के मंदिर निर्माण में परमहंस जी महराज का साथ देने का निर्णय लिया। समाज के लोगों ने कहा कि यदि छह दिसंबर तक केंद्र और प्रदेश की सरकारें श्री राम मंदिर निर्माण के लिए कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है तो परमहंस जी महराज के आत्मदाह के पश्चात सरकार दलित विरोधी घोषित हो जाएगी। महराज ने कहा कि राष्ट्र में भगवान श्री राम के आदर्शों के स्थापना की जरूरत है। हमें बाबर के चरित्र की तिनके मात्र की जरूरत नहीं है। देश और प्रदेश के मुखियाओं पर बरसते हुए कहा कि श्री राम के नाम पर ही आज भाजपा का परचम पूरे देश में लहरा रहा है, लेकिन सरकार के लोग कुर्सी पर बैठते ही अहंकार के मद में चूर हो गए हैं। उन्हें अपना वादा भी याद नहीं रहा। इसलिए संत समाज सरकार को जगाने का प्रयास कर रहा है। कहा कि बाबर आतंकवादी था, बर्बर शब्द से बाबर बना है। उसके नाम पर भारत मे कोई भी मस्जिद या मकबरा नहीं रहेगा। स्वामी जी रविवार को सीता समाहित स्थल पर दर्शन पूजन के बाद वहां की मिट्टी लेकर अयोध्या रवाना होंगे। इस मौके पर पं हरिप्रसाद मिश्रा, पप्पू सिंह, स्वामी शांतानंद, राजधर मिश्रा, सरकार शुक्ला संग वाल्मीकि समाज के गामा, अशोक, बांके बिहारी, बनारसी, लालचंद, सुनील, ऋषभ, शिवबाबू आदि रहे।
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ज्ञानपुर। गोसाईं बाजार स्थित चौरा माता मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को नटवर नागर श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। माखन चोरी, पुतना वध, गोवर्धन पर्वत को उठाना आदि प्रसंगों का मार्मिक प्रवचन सुनकर श्रोता निहाल हो गए।
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मथुरा वृंदावन से आए कथावाचक पं. मुरारी शरण बृजवासी ने भगवत भक्ति का मर्म समझाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने नर लीला के रूप में एक महान आदर्श स्थापित किया। बाल्यकाल के दौरान शरारतें और युवावस्था के बाद संजीदगी से भरा उनका व्यक्तित्व समाज के लिए बड़ी सीख है। पृथ्वी पर सबसे बड़े योगी श्रीकृष्ण ने अपनी हर लीला में जनमानस के लिए संदेश दिया है। पूतना राक्षसी बालक श्रीकृष्ण को अपना जहरीला दूध पिलाकर मारना चाहती थी, लेकिन प्रभु ने उसे ही सुरलोक पहुंचा दिया। भगवान ने भक्त और देवताओं का घमंड भी तोड़ा। अपनी पूजा न होने से नाराज इंद्रदेव ने कई दिनों तक जब लगातार बारिश की तो उनके अहंकार को तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को एक अंगुली पर उठा लिया और पूरी जनता उसके नीचे सुरक्षित हो गई। कथा सुनने के लिए पंडाल में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इस मौके पर बाबा तेज प्रताप दास समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।