{"_id":"5a26ead74f1c1bce408bb3f4","slug":"61512499927-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिट्टी की सेहत के लिए रासायनिक उर्वरक का कम प्रयोग करें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिट्टी की सेहत के लिए रासायनिक उर्वरक का कम प्रयोग करें
Updated Wed, 06 Dec 2017 12:22 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्ञानपुर (भदोही)।
कृषि विज्ञान केद्र बेजवां में मंगलवार को विश्व मृदा दिवस पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें रासायनिक उर्वरकों का कम प्रयोग कर जैविक खेती पर जोर दिया गया। मिट्टी की ताकत बढ़ाने के लिए देशी खाद के अधिकाधिक प्रयोग करने के लिए कहा गया।
मुख्य अतिथि उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि पैदावार बढ़ाने के लिए किसान रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं। शुरुआती दिनों में इसका फायदा तो किसान को मिल जाता है, लेकिन भविष्य में मिट्टी का जीवाश्म खत्म होने से वह ऊसर में बदल जाती है। फसल सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. राकेश पांडेय ने मृदा का स्वास्थ्य बेहतर रखने के लिए संतुलित उर्वरकों, खरपतवारनाशी एवं कीटनाशी का प्रयोग करने के लिए किसानों से आग्रह किया। कृषि प्रसाद विशेषज्ञ डॉ. आरपी चौधरी ने कहा कि समय-समय पर मृदा के स्वास्थ्य का परीक्षण किया जाना चाहिए। इससे उसमें पोषक तत्वों की कमी का पता लगाया जा सकता है। पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. गोविंद चौधरी ने कहा कि मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए पशुपालन करने की जरूरत है। पशुओं के खाद से मिट्टी की उर्वरा शक्ति में इजाफा होता है। इस मौके पर एके चतुर्वेदी, राजेंद्र प्रसाद समेत अन्य विशेषज्ञों ने भी अपनी राय रखी।
विज्ञापन
कृषि विज्ञान केद्र बेजवां में मंगलवार को विश्व मृदा दिवस पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें रासायनिक उर्वरकों का कम प्रयोग कर जैविक खेती पर जोर दिया गया। मिट्टी की ताकत बढ़ाने के लिए देशी खाद के अधिकाधिक प्रयोग करने के लिए कहा गया।
मुख्य अतिथि उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि पैदावार बढ़ाने के लिए किसान रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं। शुरुआती दिनों में इसका फायदा तो किसान को मिल जाता है, लेकिन भविष्य में मिट्टी का जीवाश्म खत्म होने से वह ऊसर में बदल जाती है। फसल सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. राकेश पांडेय ने मृदा का स्वास्थ्य बेहतर रखने के लिए संतुलित उर्वरकों, खरपतवारनाशी एवं कीटनाशी का प्रयोग करने के लिए किसानों से आग्रह किया। कृषि प्रसाद विशेषज्ञ डॉ. आरपी चौधरी ने कहा कि समय-समय पर मृदा के स्वास्थ्य का परीक्षण किया जाना चाहिए। इससे उसमें पोषक तत्वों की कमी का पता लगाया जा सकता है। पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. गोविंद चौधरी ने कहा कि मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए पशुपालन करने की जरूरत है। पशुओं के खाद से मिट्टी की उर्वरा शक्ति में इजाफा होता है। इस मौके पर एके चतुर्वेदी, राजेंद्र प्रसाद समेत अन्य विशेषज्ञों ने भी अपनी राय रखी।
विज्ञापन