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आज मनाया जाएगा शबेवरात,तैयारियां पूरी
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ज्ञानपुर। इबादत और गुनाहों से तौबा करने वाला त्योहार शबेवरात 20 अप्रैल शनिवार को अकीदत के साथ पूरे जनपद में मनाया जाएगा। इसकी पूर्व संध्या तक मस्जिदों और कब्रिस्तानों की साफ-सफाई का दौर चलता रहा। साथ ही पूर्वजों के नाम चढ़ाए जाने वाले तबर्रुख को बनाने के लिए खरीदारी भी मुस्लिम समाज के लोग देर रात तक करते देखे गए।
माना जाता है कि शब-ए-बारात की रात को मस्जिदों में अल्लाह तआला की इबादत करने से दुनियावी तालिम को बढ़ावा और जीवन भर सुख-शांति, गुनाहों से मुक्ति मिलती है। वहीं कब्रिस्तानों में पहुंच कर पूर्वजों की कब्र पर फातिहा पढ़ी जाती है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक यह रात साल एक बार शबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है। मुसलमानों के लिए यह रात बेद फजीलत की रात भी मानी जाती है। इस दिन सभी मुसलमान अल्लाह की इबादत कर दुआएं मांगते हैं और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। शब-ए-बारात दो शब्दों शब और बारात से मिलकर बना है। जहां शब का अर्थ रात होता है तो वहीं बारात का मतलब बरी होना है। मुस्लिम परिवारों में तरह-तरह के पकवानों को तैयार कर पूर्वजों के नाम फातिहा दी जाती है। शिरनी-तबर्रख के रूप में बने पकवानों को वितरित किया जाता है। नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से रात तक मस्जिदों एवं कब्रिस्तानों पर लोगों के पहुंचने क्रम चलता रहता है।
माना जाता है कि शब-ए-बारात की रात को मस्जिदों में अल्लाह तआला की इबादत करने से दुनियावी तालिम को बढ़ावा और जीवन भर सुख-शांति, गुनाहों से मुक्ति मिलती है। वहीं कब्रिस्तानों में पहुंच कर पूर्वजों की कब्र पर फातिहा पढ़ी जाती है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक यह रात साल एक बार शबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है। मुसलमानों के लिए यह रात बेद फजीलत की रात भी मानी जाती है। इस दिन सभी मुसलमान अल्लाह की इबादत कर दुआएं मांगते हैं और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। शब-ए-बारात दो शब्दों शब और बारात से मिलकर बना है। जहां शब का अर्थ रात होता है तो वहीं बारात का मतलब बरी होना है। मुस्लिम परिवारों में तरह-तरह के पकवानों को तैयार कर पूर्वजों के नाम फातिहा दी जाती है। शिरनी-तबर्रख के रूप में बने पकवानों को वितरित किया जाता है। नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से रात तक मस्जिदों एवं कब्रिस्तानों पर लोगों के पहुंचने क्रम चलता रहता है।
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