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बिना रिकार्ड जिला अस्पताल में काम करने वाले 45 को हटाया

Wed, 10 Aug 2022 11:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 10 Aug 2022 11:18 PM IST
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45 removed from work in district hospital without record
ज्ञानपुर। न तो कहीं से अप्वाइंट में हुआ और न ही अस्पताल में मरीजों को देखने लायक डिग्री थी। बावजूद इसके कुछ डॉक्टरों से मिलीभगत कर नियमित अस्पताल आने लगे और डॉक्टरों, फार्मासिस्टों की तरह कपड़ा पहनकर काम करने लगे। इसकी जानकारी जब मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को हुई तो उन्होने पूछताछ की। फिर क्या इनकी पोल खुलते ही सीएमएस ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। जिला चिकित्सालय ज्ञानपुर से 45 ऐसे लोगों को बाहर किया गया है। सीएमएस ने अस्पताल के डॉक्टरों को भी नसीहत दिया है कि वे अब किसी भी बाहरी को अपने आस-पास चिकित्सकीय कार्य के लिए न लगाएं।
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करीब पांच लाख की आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने वाले महाराजा चेत सिंह जिला चिकित्सालय में करीब छह माह में 45 ऐसे लोग आए जो अपने परिचित डॉक्टरों, फार्मासिस्टों के माध्यम से अस्पताल में काम करने लगे। कोई डॉक्टरों का सहयोगी बनकर तो कोई फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय बनकर काम करने लगा। इनपर अक्सर आरोप भी लगे। अक्सर सुविधा शुल्क लेकर बाहर की दवा लिखवाने, मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में भेजने में इनका नाम आता था। इसे गंभीरता से लेते हुए सीएमएस ने इसकी जांच की। पता चला कि इनके पास किसी तरह का कोई प्रमाणपत्र नहीं है। जिनके पास प्रमाणपत्र है तो अस्पताल में प्रैक्टिस करने की कोई स्वीकृति नहीं है। ऐसे में इन सभी को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सीएमएस डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि अस्पताल की छवि अच्छी हो, मरीजों को बेहतर इलाज मिले इसके लिए पारदर्शीपूर्ण काम किया जा रहा है। 45 लोगों को बाहर किया गया है।
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एंटी रैबीज इंजेक्शन के नाम पर लेते थे दस रुपये
कुत्ता काटने की स्थिति में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाया जाता है। अस्पताल में यह नि:शुल्क लगाने का नियम है, लेकिन यहां बाहर से रखे गए लोग दस रुपये ले लेते थे। सीएमएस ने बताया कि ऐसे लोगों का किसी तरह का चिकित्सालय में कोई रिकार्ड नहीं है। न ही विभाग की ओर से इन्हे वेतन दिया जाता था। चिकित्सालय में इधर उधर करके ही इनकी कमाई होती थी। ऐसे लोगों को जिला चिकित्सालय से निकाल दिया गया।
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