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सेंट थामस स्कूल का पट्टा आवंटन निरस्त
Updated Fri, 03 Nov 2017 12:06 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
एडीएम न्यायिक बच्चीलाल की कोर्ट ने करीब ढाई दशक पूर्व सेंट थॉमस स्कूल चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम आवंटित 15 बिस्वा पट्टा आवंटन को निरस्त कर दिया। साथ ही जमीन को परती में दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट के निर्णय से स्कूल प्रबंधन में खलबली मच गई है।
वर्ष 1988 में ज्ञानपुर के वेदपुर गांव में तत्कालीन राजस्व अधिकारियों, ग्राम प्रधान की मिलीभगत से ग्राम समाज की जमीन आराजी 299 के 15 बिस्वा रकबे को सेंट थॉमस स्कूल चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर पट्टा आवंटित किया गया था। उस दौरान संबंधित संस्था की ओर से कहा गया था कि ट्रस्ट गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने के लिए स्कूल खोलेगा। ग्राम प्रधान राम शिरोमणि यादव ने 2001 में जिलाधिकारी कार्यालय में प्रार्थना पत्र देकर उक्त पट्टा आवंटन को अवैध बताते हुए निरस्त करने की मांग की। उसके बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों ने जांच की तो पट्टा अवैध पाया गया। विपक्ष प्रकरण को कमिश्नरी और फिर हाईकोर्ट ले गया लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने एडीएम कोर्ट को प्रकरण का फैसला करने के लिए कहा। एडीएम न्यायिक बच्ची लाल ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने और पत्रावली देखने के बाद स्कूल को किया गया पट्टा आवंटन निरस्त कर दिया।
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एडीएम न्यायिक बच्चीलाल की कोर्ट ने करीब ढाई दशक पूर्व सेंट थॉमस स्कूल चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम आवंटित 15 बिस्वा पट्टा आवंटन को निरस्त कर दिया। साथ ही जमीन को परती में दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट के निर्णय से स्कूल प्रबंधन में खलबली मच गई है।
वर्ष 1988 में ज्ञानपुर के वेदपुर गांव में तत्कालीन राजस्व अधिकारियों, ग्राम प्रधान की मिलीभगत से ग्राम समाज की जमीन आराजी 299 के 15 बिस्वा रकबे को सेंट थॉमस स्कूल चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर पट्टा आवंटित किया गया था। उस दौरान संबंधित संस्था की ओर से कहा गया था कि ट्रस्ट गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने के लिए स्कूल खोलेगा। ग्राम प्रधान राम शिरोमणि यादव ने 2001 में जिलाधिकारी कार्यालय में प्रार्थना पत्र देकर उक्त पट्टा आवंटन को अवैध बताते हुए निरस्त करने की मांग की। उसके बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों ने जांच की तो पट्टा अवैध पाया गया। विपक्ष प्रकरण को कमिश्नरी और फिर हाईकोर्ट ले गया लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने एडीएम कोर्ट को प्रकरण का फैसला करने के लिए कहा। एडीएम न्यायिक बच्ची लाल ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने और पत्रावली देखने के बाद स्कूल को किया गया पट्टा आवंटन निरस्त कर दिया।
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