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ात स्टेशनों को फाग सिग्नल का इंतजार
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ज्ञानपुर। ठंड और शीतलहर से ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होने लगा है। धुंध से ट्रेनों की लेटलतीफी के साथ चालकों को स्टेशन आदि भी कभी कभार नजर नहीं आता। इससे स्टेशनों पर फॉग सिग्लन के माध्यम से चालकों को संकेत दिया जाता है, लेकिन जिले में दो स्टेशनों को छोड़कर अन्य पर वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे ट्रेनें आगे बढ़ाई जाती हैं।
जिले में वाराणसी-प्रतापगढ़ रेल मार्ग और पूर्वोत्तर रेलवे की दो लाइनें गुजरती हैं। जिन पर मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, जम्मू, राजस्थान समेत अन्य लंबी दूरी की प्रतिदिन 50 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। बारिश और गर्मी के सीजन में सिग्नल को लेकर कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन जाड़े में कुहरे के चलते ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लग जाता है। कोहरे की धुंध से स्टेशन के नजदीक आने के बाद भी ट्रेन के चालकों को स्टेशन नहीं दिखाई पड़ता। जिससे कभी कभार ट्रेनें स्टेशन के आगे जाकर रुकती हैं, इससे कभी कभार दुर्घटना होने की आशंका भी बढ़ जाती है। जिले में ज्ञानपुर रोड, भदोही और माधोसिंह तीन बड़े स्टेशन हैं, जबकि सरायकंसराय, सुरियावां, मोढ़, परसीपुर, जंगीगंज, अहिमनपुर, कटका छोटे स्टेशन भी हैं। भदोही, माधोसिंह और ज्ञानपुर स्टेशन पर फॉग सिग्लन की व्यवस्था तो है लेकिन छोटे स्टेशनों पर इसकी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। इसके अभाव में स्टेशन मास्टर निर्धारित दूरी पर लगाए जाने वाले इन सिग्नलों का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं। वहीं चालकों को कोहरे में सिग्नल दिखाई न देने से नहीं पता चल पा रहा है कि स्टेशन कितनी दूर है और ट्रेन को किस गति से स्टेशन से पास होना है। परसीपुर स्टेशन के अधीक्षक शाहिद इमाम ने बताया कि अब तक फाग सिग्नल नहीं आया है। अभी कोहरे का उतना असर नहीं है। ट्रेनों के परिचालन के लिए पटाखे आदि की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। ट्रेन की सीटी बजने या सिग्नल मिलने पर पटाखा जलाया जाता है। जिससे चालक को स्टेशन होने का अंदेशा हो जाता है।
जिले में वाराणसी-प्रतापगढ़ रेल मार्ग और पूर्वोत्तर रेलवे की दो लाइनें गुजरती हैं। जिन पर मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, जम्मू, राजस्थान समेत अन्य लंबी दूरी की प्रतिदिन 50 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। बारिश और गर्मी के सीजन में सिग्नल को लेकर कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन जाड़े में कुहरे के चलते ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लग जाता है। कोहरे की धुंध से स्टेशन के नजदीक आने के बाद भी ट्रेन के चालकों को स्टेशन नहीं दिखाई पड़ता। जिससे कभी कभार ट्रेनें स्टेशन के आगे जाकर रुकती हैं, इससे कभी कभार दुर्घटना होने की आशंका भी बढ़ जाती है। जिले में ज्ञानपुर रोड, भदोही और माधोसिंह तीन बड़े स्टेशन हैं, जबकि सरायकंसराय, सुरियावां, मोढ़, परसीपुर, जंगीगंज, अहिमनपुर, कटका छोटे स्टेशन भी हैं। भदोही, माधोसिंह और ज्ञानपुर स्टेशन पर फॉग सिग्लन की व्यवस्था तो है लेकिन छोटे स्टेशनों पर इसकी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। इसके अभाव में स्टेशन मास्टर निर्धारित दूरी पर लगाए जाने वाले इन सिग्नलों का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं। वहीं चालकों को कोहरे में सिग्नल दिखाई न देने से नहीं पता चल पा रहा है कि स्टेशन कितनी दूर है और ट्रेन को किस गति से स्टेशन से पास होना है। परसीपुर स्टेशन के अधीक्षक शाहिद इमाम ने बताया कि अब तक फाग सिग्नल नहीं आया है। अभी कोहरे का उतना असर नहीं है। ट्रेनों के परिचालन के लिए पटाखे आदि की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। ट्रेन की सीटी बजने या सिग्नल मिलने पर पटाखा जलाया जाता है। जिससे चालक को स्टेशन होने का अंदेशा हो जाता है।
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