{"_id":"5d02982cbdec226d915d0530","slug":"15604511061235-bhadohi-news24","type":"story","status":"publish","title_hn":"खामियों से फंसी है 35 हजार किसानों की सम्मान निधि - प्लानिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खामियों से फंसी है 35 हजार किसानों की सम्मान निधि - प्लानिंग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्ञानपुर। तहसील के राजस्व कर्मियों की लापरवाही का खामियाजा प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना के लिए आवेदन करने वाले किसानों को भुगतनी पड़ रही है। करीब चार से पांच महीने बाद भी उनके खाते में दो-दो हजार की किस्त नहीं पहुंची। जिससे चुनाव बाद कृषि भवन घरांव दफ्तर में किसानों की चहलकदमी बढ़ गई है।
जिले में 70 से 80 हजार हेक्टेयर भूमि पर रबी और खरीफ सीजन में खेती की जाती है। लघु एवं मध्यम वर्ग के एक लाख 90 हजार के करीब किसान पंजीकृत है। केंद्रीय बजट में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को तीन किस्तों में छह हजार वार्षिक देने की व्यवस्था की गई। योजना के प्रथम चरण में एक लाख 35 हजार किसानों की फीडिंग कराई थी। हर हाल में प्रथम किस्त हासिल कर लेने की कोशिश में लगे लोगों को राजस्व कर्मियों की मनमानी से जूझना पड़ा। जो लाभार्थी सुविधा शुल्क दिया उनके आवेदन फीड करा दिया गया , जबकि जो ऐसा नहीं किए उनके आवेदन में कोई न कोई खामी कर दी। करीब एक लाख के करीब किसानों को योजना का लाभ दिया गया। उनके खाते में दो-दो किस्त के रूप में चार-चार हजार रुपये पहुंच गई लेकिन 35 हजार किसानों का खाता सूना ही रह गया। आवेदन भरने में खाता संख्या, नाम समेत अन्य गलती से खाते में पैसा नहीं पहुंच सका। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता खत्म होने के बाद कृषि विभाग की ओर से ऐसे आवेदनों की खामियां सुधारने की कवायद शुरू हो गई। उप निदेशक अरविंद सिंह ने कहा कि जून में सभी ऐसे आवेदनों को दुरुस्त कर लिया जाएगा। जिससे जुलाई के पहले पखवारे में शेष किसानों के खाते में पैसा पहुंच जाए।
विज्ञापन
जिले में 70 से 80 हजार हेक्टेयर भूमि पर रबी और खरीफ सीजन में खेती की जाती है। लघु एवं मध्यम वर्ग के एक लाख 90 हजार के करीब किसान पंजीकृत है। केंद्रीय बजट में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को तीन किस्तों में छह हजार वार्षिक देने की व्यवस्था की गई। योजना के प्रथम चरण में एक लाख 35 हजार किसानों की फीडिंग कराई थी। हर हाल में प्रथम किस्त हासिल कर लेने की कोशिश में लगे लोगों को राजस्व कर्मियों की मनमानी से जूझना पड़ा। जो लाभार्थी सुविधा शुल्क दिया उनके आवेदन फीड करा दिया गया , जबकि जो ऐसा नहीं किए उनके आवेदन में कोई न कोई खामी कर दी। करीब एक लाख के करीब किसानों को योजना का लाभ दिया गया। उनके खाते में दो-दो किस्त के रूप में चार-चार हजार रुपये पहुंच गई लेकिन 35 हजार किसानों का खाता सूना ही रह गया। आवेदन भरने में खाता संख्या, नाम समेत अन्य गलती से खाते में पैसा नहीं पहुंच सका। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता खत्म होने के बाद कृषि विभाग की ओर से ऐसे आवेदनों की खामियां सुधारने की कवायद शुरू हो गई। उप निदेशक अरविंद सिंह ने कहा कि जून में सभी ऐसे आवेदनों को दुरुस्त कर लिया जाएगा। जिससे जुलाई के पहले पखवारे में शेष किसानों के खाते में पैसा पहुंच जाए।
विज्ञापन