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डेढ़ घंटे तक नहीं उठ सका बूम,आवागमन रहा बाधित
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जंगीगंज। पूर्वोत्तर रेलवे के मंडुआडीह-इलाहाबाद सिटी रेल खंड स्थित जंगीगंज स्टेशन के पश्चिमी छोर पर बृहस्पतिवार को आवागमन करने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जब ट्रैक पैकिंग के नाम पर इंजीनियरिंग विभाग ने दर्जन भर से अधिक गांवों को जोड़ने वाले गेट संख्या 45-सी की सड़क को उखड़वा कर बिना सुरक्षा के ही मरम्मत शुरू करा दी। लगभग दो घंटे तक गेट का बूम न उठने और धूप-गर्मी से दोनों ओर वाहनों का जमावड़ा हो जाने से लोगों को हलाकान होना पड़ा।
रेल खंड पर ट्रेनों की रफ्तार किसी हालत में कम न होने के साथ ही संचालन के समय जगह-जगह लगने वाले झटके को दूर करने के लिए इंजीनियरिंग विभाग ट्रैक की मशीनयुक्त पैकिंग कार्य तीन दिन से करवा रहा है। पश्चिमी छोर स्थित ब्लॉक सेक्शन जैसे ही मशीन गेट की ओर बढ़ा, वैसे ही बृहस्पतिवार को दो घंटे का ब्लॉक लेकर कार्य को पूर्ण करने का प्रयास शुरू कर दिया गया। पैकिंग के तहत गेट पर लगे पत्थर चौकों को उखाड़ देने से आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया, जो दो घंटे का ब्लाक खत्म होने पर ही सुगम हो पाया। इस अंतराल में पैदल, साइकिल, बाइक यहां तक कि बड़े बंद वाहनों और ईंट-मिट्टी ढुलाई में लगे ट्रैक्टरों की लंबी कतार दोनों ओर लग गई। प्रचंड धूप और गर्मी के बीच गेट के खुलने की बात पर मौके पर तैनात अधिकारी का दुर्व्यवहार रह-रह कर लोगों की मुश्किलें और बढ़ाता रहा। गेट पर लगे कर्मचारी लोगों को दूसरे मार्ग से यात्रा करने की सलाह देकर अपना पिंड छुड़ाते रहे। ऐसी स्थिति में मौके पर रेलवे पुलिस की तैनाती भी न होना हैरत करने वाली लग रही थी।
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रेल खंड पर ट्रेनों की रफ्तार किसी हालत में कम न होने के साथ ही संचालन के समय जगह-जगह लगने वाले झटके को दूर करने के लिए इंजीनियरिंग विभाग ट्रैक की मशीनयुक्त पैकिंग कार्य तीन दिन से करवा रहा है। पश्चिमी छोर स्थित ब्लॉक सेक्शन जैसे ही मशीन गेट की ओर बढ़ा, वैसे ही बृहस्पतिवार को दो घंटे का ब्लॉक लेकर कार्य को पूर्ण करने का प्रयास शुरू कर दिया गया। पैकिंग के तहत गेट पर लगे पत्थर चौकों को उखाड़ देने से आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया, जो दो घंटे का ब्लाक खत्म होने पर ही सुगम हो पाया। इस अंतराल में पैदल, साइकिल, बाइक यहां तक कि बड़े बंद वाहनों और ईंट-मिट्टी ढुलाई में लगे ट्रैक्टरों की लंबी कतार दोनों ओर लग गई। प्रचंड धूप और गर्मी के बीच गेट के खुलने की बात पर मौके पर तैनात अधिकारी का दुर्व्यवहार रह-रह कर लोगों की मुश्किलें और बढ़ाता रहा। गेट पर लगे कर्मचारी लोगों को दूसरे मार्ग से यात्रा करने की सलाह देकर अपना पिंड छुड़ाते रहे। ऐसी स्थिति में मौके पर रेलवे पुलिस की तैनाती भी न होना हैरत करने वाली लग रही थी।
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