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दूसरे दिन भी नहीं मिली राहत,तहसीलों में रही गहमागहमी
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ज्ञानपुर। मंगलवार को दूसरे दिन भी तीनों तहसीलों पर खसरा-खतौनी के लिए गहमागहमी बनी रही। वहीं सत्यापन कार्य में लगाए गए राजस्वकर्मी लोकवाणी और सहज जनसेवा केंद्रों से आहरित होने वाली खतौनियों को अमान्य घोषित करने में लगे हैं। उधर किसानों को राहत देने की बजाए कृषि विभाग शांत बैठा है। जबकि तहसील प्रशासन जनसेवा और लोकवाणी केंद्रों से प्राप्त होने वाली खतौनी को सत्यापन कार्य में मान्य होने का दावा कर रहा है।
गत दिनों केंद्र सरकार की ओर पेश बजट में किसान सम्मान योजना की घोषणा कर कृषकों को पहली किस्त मार्च के अंत तक खातों में भेजने की तैयारी कर ली गई है। सर्वप्रथम कृषि विभाग के पोर्टल पर पहले से पंजीकृत किसानों को लाभान्वित कराने के लिए ग्रामवार सत्यापन कार्य ने जोर पकड़ लिया है। पंजीकृत के साथ छूटे हुए किसानों को भी अवसर देने के लिए खतौनी, आधार और बैंक खाते की मांग की जा रही है। लाभ पाने के लिए औराई, भदोही और ज्ञानपुर तहसील के सैकड़ों गांवों से पहुंचने वाले किसान खतौनी हासिल करने के लिए सुबह से शाम तक समय जाया कर रहे हैं।
एक साथ तहसील खिड़कियों पर उमड़ रही भीड़ को देख कर्मचारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। फिर भी खतौनी मिल पाना किसानों के लिए महंगा साबित हो रहा है। किसान उमेश सिंह, रमेश बिंद, कादिर, फरहान अली ने बताया कि दो दिन से खतौनी के लिए चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कर्मचारी कल आना, देर रात को मिलेगा, सर्वर फेल है, एक ही खिड़की है आदि का बहाना बनाकर परेशान कर रहे हैं। तो वहीं एक रुपये की पर्ची को स्टांप वेंडर पांच रुपये में बेचकर मालामाल हो रहे हैं। यही स्थिति भदोही और औराई तहसील क्षेत्र के गांवों से जुड़े किसानों की रही। तहसीलदार सुनील कुमार ने बताया कि किसानों को राहत देने के लिए पर्याप्त मात्रा में कर्मचारियों को लगाया गया है। तहसील की अपेक्षा लोकवाणी और सहज जनसेवा केंद्रों से निकलने वाले खसरा-खतौनी को भी मान्य कर दिया गया है। जहां पहुंच कर किसान भीड़ से राहत पा सकते हैं, इसके लिए कृषि विभाग को भी निर्देशित करा दिया गया है।
गत दिनों केंद्र सरकार की ओर पेश बजट में किसान सम्मान योजना की घोषणा कर कृषकों को पहली किस्त मार्च के अंत तक खातों में भेजने की तैयारी कर ली गई है। सर्वप्रथम कृषि विभाग के पोर्टल पर पहले से पंजीकृत किसानों को लाभान्वित कराने के लिए ग्रामवार सत्यापन कार्य ने जोर पकड़ लिया है। पंजीकृत के साथ छूटे हुए किसानों को भी अवसर देने के लिए खतौनी, आधार और बैंक खाते की मांग की जा रही है। लाभ पाने के लिए औराई, भदोही और ज्ञानपुर तहसील के सैकड़ों गांवों से पहुंचने वाले किसान खतौनी हासिल करने के लिए सुबह से शाम तक समय जाया कर रहे हैं।
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एक साथ तहसील खिड़कियों पर उमड़ रही भीड़ को देख कर्मचारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। फिर भी खतौनी मिल पाना किसानों के लिए महंगा साबित हो रहा है। किसान उमेश सिंह, रमेश बिंद, कादिर, फरहान अली ने बताया कि दो दिन से खतौनी के लिए चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कर्मचारी कल आना, देर रात को मिलेगा, सर्वर फेल है, एक ही खिड़की है आदि का बहाना बनाकर परेशान कर रहे हैं। तो वहीं एक रुपये की पर्ची को स्टांप वेंडर पांच रुपये में बेचकर मालामाल हो रहे हैं। यही स्थिति भदोही और औराई तहसील क्षेत्र के गांवों से जुड़े किसानों की रही। तहसीलदार सुनील कुमार ने बताया कि किसानों को राहत देने के लिए पर्याप्त मात्रा में कर्मचारियों को लगाया गया है। तहसील की अपेक्षा लोकवाणी और सहज जनसेवा केंद्रों से निकलने वाले खसरा-खतौनी को भी मान्य कर दिया गया है। जहां पहुंच कर किसान भीड़ से राहत पा सकते हैं, इसके लिए कृषि विभाग को भी निर्देशित करा दिया गया है।
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