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पीएम आवास: उम्मीद को लगे पंख
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पीएम आवास: उम्मीद को लगे पंख
तीन साल में नौ हजार परिवार को नसीब हुई छत
अमर उजाला ब्यूरो
चौरी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिले में तीन सालों में नौ हजार आवास बन गए हालांकि कुछ परिवारों के लिए यह योजना जैसे सपने पूरे करने वाली रही। उन्हें अब छप्पर के नीचे रात नहीं गुजारनी होगी। बारिस की टिप टिप की चिंता भी नहीं होगी। टूटी फूटी झोपड़ी में रहने वालों के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू किया है। 2016 से शुरू हुई योजना में तीन साल के दौरान करीब नौ हजार आवास बन चुके हैं, जबकि दो हजार निर्माणाधीन है। एक लाख 35 हजार से बनने वाले आवास में लाभार्थी को एक कमरे के अलावा किचन भी रहता है। योजना में कुछ लाभार्थी खपरैल के मकान में रहने वाले तो कुछ छप्पर में रहने वाले शामिल हैं। चौरी के चकभुइधर गांव की लाभार्थी सुनीता पत्नी कौलेशर राजभर के लिए यह योजना किसी सपने जैसा है। सुनीता ने बताया कि उसका पूरा परिवार एक छप्पर में रहता था। 2016 में पहले चरण में उसका चयन हुआ। कुछ महीने में पक्का घर बनकर तैयार हो गया। वैदिक रीति रिवाज से गृह प्रवेश कराया। नया घर बनने से परिवार भी खुश है। इसी तरह डोमनपुर गांव के लाभार्थी कुदरत अली और प्रेमा देवी को भी छप्पर से निजात मिली। दोनों लाभार्थियों का मानना है कि पूर्व की आवास योजनाओ को लेकर प्रशासन संजीदा नही रहता था, जिससे समय से आवास नही बन पाते, लेकिन इसमे मॉनिटरिंग होती थी। इससे आवास समय पर बन जाते। कई गांवो में ऐसे लाभार्थी हैं, जिनके सोच और नजरिया को योजना ने बदल दी। सीडीओ हरिशंकर सिंह ने कहा की प्रधानमंत्री आवास योजना ने लाभार्थियों की सोच को बदल दिया है।
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तीन साल में नौ हजार परिवार को नसीब हुई छत
अमर उजाला ब्यूरो
चौरी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिले में तीन सालों में नौ हजार आवास बन गए हालांकि कुछ परिवारों के लिए यह योजना जैसे सपने पूरे करने वाली रही। उन्हें अब छप्पर के नीचे रात नहीं गुजारनी होगी। बारिस की टिप टिप की चिंता भी नहीं होगी। टूटी फूटी झोपड़ी में रहने वालों के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू किया है। 2016 से शुरू हुई योजना में तीन साल के दौरान करीब नौ हजार आवास बन चुके हैं, जबकि दो हजार निर्माणाधीन है। एक लाख 35 हजार से बनने वाले आवास में लाभार्थी को एक कमरे के अलावा किचन भी रहता है। योजना में कुछ लाभार्थी खपरैल के मकान में रहने वाले तो कुछ छप्पर में रहने वाले शामिल हैं। चौरी के चकभुइधर गांव की लाभार्थी सुनीता पत्नी कौलेशर राजभर के लिए यह योजना किसी सपने जैसा है। सुनीता ने बताया कि उसका पूरा परिवार एक छप्पर में रहता था। 2016 में पहले चरण में उसका चयन हुआ। कुछ महीने में पक्का घर बनकर तैयार हो गया। वैदिक रीति रिवाज से गृह प्रवेश कराया। नया घर बनने से परिवार भी खुश है। इसी तरह डोमनपुर गांव के लाभार्थी कुदरत अली और प्रेमा देवी को भी छप्पर से निजात मिली। दोनों लाभार्थियों का मानना है कि पूर्व की आवास योजनाओ को लेकर प्रशासन संजीदा नही रहता था, जिससे समय से आवास नही बन पाते, लेकिन इसमे मॉनिटरिंग होती थी। इससे आवास समय पर बन जाते। कई गांवो में ऐसे लाभार्थी हैं, जिनके सोच और नजरिया को योजना ने बदल दी। सीडीओ हरिशंकर सिंह ने कहा की प्रधानमंत्री आवास योजना ने लाभार्थियों की सोच को बदल दिया है।