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अवैध ढंग से चल रहे ईंट भट्ठे,प्रशासन मौन
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ज्ञानपुर। शासन-प्रशासन की सख्ती के बाद भी जनपद में मानक पर खरा नहीं उतरने वाले दर्जनों ईंट भट्ठों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। निगरानी समिति ने मॉनीटरिंग से हाथ खींच लिया है। वहीं बिना रॉयल्टी, पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संस्तुति ही संचालक मालामाल होकर सरकार के खाते में पहुंचने वाले राजस्व में सेंधमारी करने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
ईंट उद्योग को चलाने के लिए शासन स्तर से फरमान जारी कर प्रयुक्त होने वाली मिट्टी आदि तय रायल्टी जमा कराने, पर्यावरण व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लागू शर्तों को पूरा करने वाले संचालकों को प्रमाणपत्र जारी होने और जिला पंचायत के अधीन रेवेन्यू इंस्पेक्टर की संस्तुति मिलने पर ही संचालन की व्यवस्था है। उधर नियम और शर्तों को ताक पर रख दर्जनों की संख्या में ईंट भट्ठों ें का संचालन होना बोर्ड तथा समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते जा रहे हैं। जबकि मई 2018 में मानक के विपरित चलने वाले कुल 16 भट्ठों के खिलाफ कदम उठाते हुए प्रशासन ने कार्रवाई की थी जिसमें डीघ ब्लाक के दो संचालकों ने कार्रवाई के भय से रायल्टी जमा करते हुए प्रमाणपत्र लेकर संचालन शुरू करा तो दिया, लेकिन विभागीय मिलीभगत से अन्य संचालकों को भी संजीवनी बूटी दे दी गई। जबकि ईंट निर्माता संघ के जिलाध्यक्ष मिठाई लाल की प्रशासनिक अधिकारियों के साथ होने वाली बैठकों में संचालकों को सभी मानकों को पूरा करके ही भट्ठों का संचालन कराने पर जोर दिया गया, लेकिन वह भी बेअसर ही साबित हुआ।
पक्की चिमनी, धुआं कच्चा
ज्ञानपुर। फरमान के बाद ईंट भट्टा संचालकों ने फंडा बदल तो दि या गया लेकिन पक्की चिमनी से निकलने वाला कच्चा धुआं वातावरण को प्रदूषित करने का ही काम करता आ रहा है। इससे न केवल आम जनमानस, पेड़-पौधे, मजदूरों के स्वास्थ्य को बिगाड़ने में महती भूमिका भी निभा रहे हैं। इसी समस्या को संज्ञान में लेते हुए ऊंची पक्की चिमनी का निर्माण कराकर प्रदूषण और पर्यावरण बोर्ड से प्रमाणपत्र लेकर चलाने का दंभ भरा गया था लेकिन सबकुछ विपरित ही देखने को मिल रहा है।
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क्या कहते हैं रेवेन्यू इंस्पेक्टर
ज्ञानपुर। जिला पंचायत के अधीन रेवेन्यू इंस्पेक्टर रमेश कुमार यादव का कहना रहा कि प्रदूषण नि यंत्रण बोर्ड से सभी कोरम पूरा होने के बाद बर्निंग का लाइसेंस जिला पंचायत की ओर से जारी किया जाता है। बताया कि मामला संज्ञान में है यदि नि यंत्रण बोर्ड ठोस कदम उठाये तो कार्रवाई संभव है।
ईंट उद्योग को चलाने के लिए शासन स्तर से फरमान जारी कर प्रयुक्त होने वाली मिट्टी आदि तय रायल्टी जमा कराने, पर्यावरण व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लागू शर्तों को पूरा करने वाले संचालकों को प्रमाणपत्र जारी होने और जिला पंचायत के अधीन रेवेन्यू इंस्पेक्टर की संस्तुति मिलने पर ही संचालन की व्यवस्था है। उधर नियम और शर्तों को ताक पर रख दर्जनों की संख्या में ईंट भट्ठों ें का संचालन होना बोर्ड तथा समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते जा रहे हैं। जबकि मई 2018 में मानक के विपरित चलने वाले कुल 16 भट्ठों के खिलाफ कदम उठाते हुए प्रशासन ने कार्रवाई की थी जिसमें डीघ ब्लाक के दो संचालकों ने कार्रवाई के भय से रायल्टी जमा करते हुए प्रमाणपत्र लेकर संचालन शुरू करा तो दिया, लेकिन विभागीय मिलीभगत से अन्य संचालकों को भी संजीवनी बूटी दे दी गई। जबकि ईंट निर्माता संघ के जिलाध्यक्ष मिठाई लाल की प्रशासनिक अधिकारियों के साथ होने वाली बैठकों में संचालकों को सभी मानकों को पूरा करके ही भट्ठों का संचालन कराने पर जोर दिया गया, लेकिन वह भी बेअसर ही साबित हुआ।
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पक्की चिमनी, धुआं कच्चा
ज्ञानपुर। फरमान के बाद ईंट भट्टा संचालकों ने फंडा बदल तो दि या गया लेकिन पक्की चिमनी से निकलने वाला कच्चा धुआं वातावरण को प्रदूषित करने का ही काम करता आ रहा है। इससे न केवल आम जनमानस, पेड़-पौधे, मजदूरों के स्वास्थ्य को बिगाड़ने में महती भूमिका भी निभा रहे हैं। इसी समस्या को संज्ञान में लेते हुए ऊंची पक्की चिमनी का निर्माण कराकर प्रदूषण और पर्यावरण बोर्ड से प्रमाणपत्र लेकर चलाने का दंभ भरा गया था लेकिन सबकुछ विपरित ही देखने को मिल रहा है।
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क्या कहते हैं रेवेन्यू इंस्पेक्टर
ज्ञानपुर। जिला पंचायत के अधीन रेवेन्यू इंस्पेक्टर रमेश कुमार यादव का कहना रहा कि प्रदूषण नि यंत्रण बोर्ड से सभी कोरम पूरा होने के बाद बर्निंग का लाइसेंस जिला पंचायत की ओर से जारी किया जाता है। बताया कि मामला संज्ञान में है यदि नि यंत्रण बोर्ड ठोस कदम उठाये तो कार्रवाई संभव है।