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12 हजार भूमिहीन उठा रहे सम्मान निधि का लाभ
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ज्ञानपुर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में फर्जीवाड़ा सामने आया है। शासन के निर्देश पर कराए जा रहे भूलेख सत्यापन में अब तक करीब 12 हजार अपात्र मिल चुके हैं। इनके पास एक धूर भी जमीन नहीं है, इसके बाद भी सम्मान निधि ले रहे थे। 11 किस्तों में सरकार को करीब 26 करोड़ का चूना लगाया है। विभाग की ओर से जल्द ही इनसे रिकवरी की जाएगी।
दिसंबर 2018 से सम्मान निधि योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने की है। इसमें एक साल में किसानों को दो-दो हजार की तीन किस्त दी जाती है।
जांच में ढाई हजार से अधिक आयकर दाता लाभ लेते पाए गए। इनकी किस्त रोक दी गई। जून 2022 में सरकार ने लाभार्थियों के भूलेख का सत्यापन करने का निर्देश दिया। इसमें खतौनी सहित अन्य जमीनों के अभिलेख की जांच की गई। जुलाई से शुरू सत्यापन अब अंतिम दौर में पहुंच गया है।
पंजीकृत दो लाख 26 हजार किसानों में करीब एक लाख 95 हजार का सत्यापन हो चुका है। इसमें 12 हजार 526 ऐसे लाभार्थी मिले, जिनके पास एक धूर भी जमीन नहीं है। जो भूमिहीन या अपात्र मिले हैं, उनका नाम योजना की सूची से बाहर किया जा रहा है। उप कृषि निदेशक डॉ. अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर भूलेख का सत्यापन कृषि विभाग के अलावा तहसील और ब्लॉक स्तर पर हो रहा है। अब तक के सत्यापन में 12 हजार से अधिक भूमिहीन पाए गए हैं। करीब 85 फीसदी सत्यापन हो चुका है। शत-प्रतिशत सत्यापन होने पर अभी और अपात्र मिलने की आशंका है। बताया कि करीब 26 करोड़ रुपये भूमिहीनों ने ले लिया है। उनसे सरकारी धन की वसूली की जाएगी।
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अपात्रों के खाते में आने वाले सम्मान निधि की वसूली की जाएगी। 12 हजार 226 भूमिहीनों के खाते में सम्मान निधि की राशि आ रही है। इसका खुलासा सत्यापन में हुआ है। अभी सत्यापन कार्य चल रहा है। - डॉ. अश्वनी कुमार सिंह, उप निदेशक कृषि
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दिसंबर 2018 से सम्मान निधि योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने की है। इसमें एक साल में किसानों को दो-दो हजार की तीन किस्त दी जाती है।
जांच में ढाई हजार से अधिक आयकर दाता लाभ लेते पाए गए। इनकी किस्त रोक दी गई। जून 2022 में सरकार ने लाभार्थियों के भूलेख का सत्यापन करने का निर्देश दिया। इसमें खतौनी सहित अन्य जमीनों के अभिलेख की जांच की गई। जुलाई से शुरू सत्यापन अब अंतिम दौर में पहुंच गया है।
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पंजीकृत दो लाख 26 हजार किसानों में करीब एक लाख 95 हजार का सत्यापन हो चुका है। इसमें 12 हजार 526 ऐसे लाभार्थी मिले, जिनके पास एक धूर भी जमीन नहीं है। जो भूमिहीन या अपात्र मिले हैं, उनका नाम योजना की सूची से बाहर किया जा रहा है। उप कृषि निदेशक डॉ. अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर भूलेख का सत्यापन कृषि विभाग के अलावा तहसील और ब्लॉक स्तर पर हो रहा है। अब तक के सत्यापन में 12 हजार से अधिक भूमिहीन पाए गए हैं। करीब 85 फीसदी सत्यापन हो चुका है। शत-प्रतिशत सत्यापन होने पर अभी और अपात्र मिलने की आशंका है। बताया कि करीब 26 करोड़ रुपये भूमिहीनों ने ले लिया है। उनसे सरकारी धन की वसूली की जाएगी।
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अपात्रों के खाते में आने वाले सम्मान निधि की वसूली की जाएगी। 12 हजार 226 भूमिहीनों के खाते में सम्मान निधि की राशि आ रही है। इसका खुलासा सत्यापन में हुआ है। अभी सत्यापन कार्य चल रहा है। - डॉ. अश्वनी कुमार सिंह, उप निदेशक कृषि