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अफसरों की कृपा से चल रहे अमान्य स्कूल
Updated Tue, 15 Aug 2017 12:43 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
शिक्षा की बेहतरी को लेकर भले ही तमाम दावे प्रशासन से लेकर शिक्षा विभाग की ओर से किए जाते हैं, लेकिन हकीकत इससे इतर है। परिषदीय स्कूलों के लिए नासूर बन चुके अमान्य विद्यालय जिले में विभागीय कृपा से संचालित हो रहे हैं। शासन की ओर से कार्रवाई का आदेश आने के बाद संचालकाें को नोटिस थमाकर ही इतिश्री कर ली जाती है।
जिले में 1115 प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के अलावा करीब पांच सौ मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं। इनमें नौनिहाल शिक्षा ग्रहण करते हैं। करीब डेढ़ हजार से अधिक विद्यालय संचालित होने के बाद भी जिले में करीब 200 बिना मान्यता के विद्यालय संचालित हैं। सुविधाएं न होने के बाद भी विद्यालय धड़ल्ले से चल रहे हैं। इन स्कूलों के रहने से परिषदीय स्कूलों में तमाम कवायद के बाद भी छात्र संख्या कम ही रह जाती है। शासन की ओर से हर साल जुलाई में ऐसे विद्यालयों को बंद करने के लिए आदेश निर्गत किया जाता है। विभागीय स्तर से कुछेक स्कूलों को नोटिस जारी कर मामला शांत हो जाता है। एक दो नहीं बल्कि गत चार से पांच साल से जिले में यही प्रथा चल रही है। बिना मान्यता के चलने वाले स्कूलों को बंद कराने के बजाए खानापूर्ति की जाती है। जिले के डीघ, अभोली, सुरियावां, भदोही, चौरी, औराई, महराजगंज समेत अन्य इलाकों में बिना मान्यता के विद्यालय संचालित हैं। इन स्कूलों में बच्चों को मूलभूत सुविधाएं भी मयस्सर नहीं है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारियों को ऐसे स्कूल बंद करने का निर्देश दिया गया है। नोटिस जारी किया गया है। स्कूल न बंद करने पर उन पर कार्रवाई की जाएगी।
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शिक्षा की बेहतरी को लेकर भले ही तमाम दावे प्रशासन से लेकर शिक्षा विभाग की ओर से किए जाते हैं, लेकिन हकीकत इससे इतर है। परिषदीय स्कूलों के लिए नासूर बन चुके अमान्य विद्यालय जिले में विभागीय कृपा से संचालित हो रहे हैं। शासन की ओर से कार्रवाई का आदेश आने के बाद संचालकाें को नोटिस थमाकर ही इतिश्री कर ली जाती है।
जिले में 1115 प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के अलावा करीब पांच सौ मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं। इनमें नौनिहाल शिक्षा ग्रहण करते हैं। करीब डेढ़ हजार से अधिक विद्यालय संचालित होने के बाद भी जिले में करीब 200 बिना मान्यता के विद्यालय संचालित हैं। सुविधाएं न होने के बाद भी विद्यालय धड़ल्ले से चल रहे हैं। इन स्कूलों के रहने से परिषदीय स्कूलों में तमाम कवायद के बाद भी छात्र संख्या कम ही रह जाती है। शासन की ओर से हर साल जुलाई में ऐसे विद्यालयों को बंद करने के लिए आदेश निर्गत किया जाता है। विभागीय स्तर से कुछेक स्कूलों को नोटिस जारी कर मामला शांत हो जाता है। एक दो नहीं बल्कि गत चार से पांच साल से जिले में यही प्रथा चल रही है। बिना मान्यता के चलने वाले स्कूलों को बंद कराने के बजाए खानापूर्ति की जाती है। जिले के डीघ, अभोली, सुरियावां, भदोही, चौरी, औराई, महराजगंज समेत अन्य इलाकों में बिना मान्यता के विद्यालय संचालित हैं। इन स्कूलों में बच्चों को मूलभूत सुविधाएं भी मयस्सर नहीं है।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारियों को ऐसे स्कूल बंद करने का निर्देश दिया गया है। नोटिस जारी किया गया है। स्कूल न बंद करने पर उन पर कार्रवाई की जाएगी।
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