{"_id":"5ba5407d867a557f373dbc8e","slug":"101537556605-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"औराई में मुहर्रम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
औराई में मुहर्रम
Updated Sat, 22 Sep 2018 12:38 AM IST
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या हुसैन की गूंजीं सदाएं, करबला में ठंडा हुए ताजिए
ज्ञानपुर। या अली, या हुसैन की गूंजती सदाएं और अकीदतमंदों का रेला। सड़कों पर मातमी नारों के बीच जंगी जौहर का जोशीला प्रदर्शन। शुक्रवार को मुहर्रम की 10वीं तारीख को जिले भर में निकले ताजिया जुलूसों में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सैकड़ों ताजिए करबला में ठंडा किए गए। इस दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की सतर्क निगहबानी रही।
ज्ञानपुर नगर में पुरानी बाजार और बालीपुर अखाड़े की ओर से ताजिया जुलूस निकालकर नगर भ्रमण करते हुए करबला तक पहुंचाया गया। भुड़की से निकले ताजिया को भी देर शाम वहां ठंडा किया गया। इस दौरान या अली, या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। उत्साही युवक रास्ते भर जंगी जौहर दिखाते चल रहे थे।
गोपीगंज: नगर और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर लगभग चार दर्जन ताजिए निकाले गए। शहीदाने कर्बला की याद में इमाम चौक पर रखे गए ताजिए के साथ पहला जुलूस चुड़िहारी मोहाल से अखाड़ा शेख सलामत अली खां की ओर से निकाला गया। जुलूस में अमानाबाद और जगन्नाथपुर के अखाड़े के साथ या अली या हुसैन की सदाएं बुलंद करते हुए युवक फन-ए-सिपहगिरी का प्रदर्शन करते हुए राजमार्ग बड़ा चौराहा गए। चौराहे पर सोनिया तालाब नई बस्ती का जुलूस शामिल होने के बाद परंपरागत रास्ते से होता हुआ कर्बला पहुंचा, जहां एहतराम के साथ ताजियों को ठंडा किया गया। इस मौके पर गुलाम मुस्तफा अंसारी, हाजी मुमताज बल्ला, एनुलहक, अकरम देहाती, मोहम्मद हनीफ,माबूद खां, हाजी मोहसिन खान समशुल हक, चुन्नू अली आदि शामिल रहे।
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दूसरा जुलूस सराय स्थित पश्चिम मोहाल अखाड़ा धूम खां की ओर से निकाला गया। जुलूस पश्चिम मोहाल से निकल कर अंजही मोहाल पहुंचा, जहां भगवतपुर का जुलूस इमाम चौक पर रखे गए ताजिए के साथ शामिल हुआ। छोटी चौमुहानी पर डेरवा और कौलापुर के अखाड़े शामिल हुए। सदर मोहाल होते हुए जुलूस जीटी रोड पहुंचा, जहां से वापस पुन: पश्चिम मोहाल होते हुए कर्बला चला गया। इसमें भी दो दर्जन से अधिक ताजिया शामिल रहे। जुलूस में समूह बनाकर युवक ढोल-ताशे बजा रहे थे तो वहीं लोग नौहा पढ़ते चल रहे थे। जगह-जगह लाठी, बाना, बनेठी, तलवार आदि के साथ फन ए सिपहगिरी का प्रदर्शन भी हो रहा था। जुलूस में अखाड़ेदार मोहम्मद हनीफ, माबूद खां, फारुकी, पप्पू, पिंटू राइन, झब्बू हाशमी,टीपू राइन, मोबिन फारुकी, मुमताज, नियाज, अख्तर, वसीम आदि रहे।
ऊंज: बनकट खास बिछियां में कर्बला पर चार ताजिए शांतिपूर्ण ढंग से हिंदू-मुस्लिम भाइयों ने मिलकर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए दफ़न किए। यह जानकारी देते हुए ताजिया कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद हनीफ प्रधान ने बताया कि पिछले 15 दिनों से कठिन परिश्रम के बाद गांव वालों ने मिलकर ताजिया बनाया, जिसमें हिंदू भाइयों ने भी पैसे से लेकर श्रम का योगदान किया। पंचायती ताजिया दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा। जो लगभग 50 हजार की लागत से 20 कारीगरों ने मिलकर 15 दिन में बनाया था, जिसकी ऊंचाई लगभग 27 फीट रही।
जंगीगंज: मुहर्रम पर जीटी रोड सरायजगदीश के प्रांगण में चेहरा पूर्व, नई सराय जगदीश, महुआरी कला, नमक पूरा कानून गोयन, कुलमनपुर के ताजिए अखाड़ों ने अपने खेलकूद का प्रदर्शन करते हुए दफन किए गए। दो दर्जन ताजिया में लियाकत अली चढ़ाई बिन की नंबर एक और वजीर उस्ताद चेरापुर की ताजिया द्वितीय एवं मुनव्वर अली का ताजिया तीसरे स्थान पर रहा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
सुरियावां: नगर में लागीबाजार मस्जिद कर्बला पर कूंनीपुर, भटेवरा, नेहरू नगर, लागी बाजार के ताजिए ले जाए गए। कर्बला बावन बीघा तालाब के पूर्वी भीटे पर गहरपुर, तुलापुर बहादुरान, फातकगली, भीमसेनपुर, नेतानागर की ताजिया ठंडा की गईं। अखाड़ेदारों ने लकड़ी का आयोजन किया। इसके अलावा मतेथू कर्बला पर भी ताजिया पहुंचाया गया। कुंनीपुर, गांधी नगर सुरियावां वार्ड संख्या 13 में ताजिया का जुलूस निकाला गया, जो कि मलेशिया के मजार का डिजाइन बनाया गया था। सुरियावां नगर की जामा मस्जिद के पास मेले में आए हुए लोगों को लोगों को बिस्कुट और शरबत बांटा गया, जिसका नेतृत्व अतहर अली ने किया। सुरियावां लागी बाजार मस्जिद पर पुरानी बाजार से दो ताजिया, सुंदर नगर से दो और भटेवरा से एक ताजिया लाई गई। इसके बाद कर्बला ले जाकर ठंडा किया गया। नगर के बावन बीघा तालाब के कर्बला पर फाटक गली, तुलापुर, गहरपुर, भीमसेनपुर के ताजिए पहुंचाए गए।
मोढ़: भिखारी रामपुर में लकड़ी का आयोजन किया गया। सिंहपुर में सनाथपुर, मनीगंज, सिंहपुर के ताजिए आए, जबकि चकचंदा और कस्तूरीपुर के ताजिया को देवदासपुर के दुलही के तारा में दफनाया गया। भिखारीरामपुर का ताजिया उसी गांव में दफन किया गया। विष्णूपुर बहरैची, कोछिया, रबनपुर, पुरानी मोढ़, डुढ़वा, नईबस्ती, लालीपुर आदि गांवों में ताजिया जुलूस निकाले गए।
चौरी: ग्रामीण अंचलों में भी देर शाम ताजिए को कर्बला में ठंडा कर दिया गया। इलाके के रोटहा, मोमिनपुर, मानिकपुर, वेदमनपुर के दर्जन भर ताजिए रोटहा के कर्बला में ठंडा किए गए। चौरी, दानूपट्टी, निदूर पट्टी के तीन ताजिये नईबस्ती में ठंडा किए गए। जद्दूपुर, मनापुर के ताजिये रघूपुर में बरदहा के लक्षापुर, ममहर, दलालुर, गोहिलांव के ताजिये अर्जुनपुर में ठंडा किए गए। इसके अलावा बरवा, डोमनपुर, पल्हैया, निदूर आदि स्थानों पर भी ताजिए ठंडा किए गए। ताजिया संग चल रहे जुलुस में युवाओं ने अपने कला कौशल का खूब प्रदर्शन किया। जगह-जगह लाठी, बल्लम, तलवार से एक से बढ़कर एक हैरत अंगेज करतब पेश करते रहे।
घोसिया: नगर क्षेत्र में करीब 42 ताजिया बनाए गए। सभी ताजिया अपने अपने चौक से उठकर चमनगंज तकिया पर लाए गए और वहां बैठाया गया। करीब दो घंटे तक अखाड़ा खेला गया। लाठी डंडे, तलवार, बल्लम, गड़ासे घुमाए गए। 5.20 बजे अखाड़ा संपन्न कर ताजिया उठाया गया। ताजिया में बाजार से सराफा मंडी जामा मस्जिद से होता हुआ ईदगाह कर्बला तक पंहुचा। ताजिया का फातिया पढ़कर सुपुर्दे खाक की रस्म पूरी की गई। इसी प्रकार माधोसिंह बाजार, पियरोपुर, कुरौना, उगापुर, कठारी बाजार, महराजगंज आदि स्थानों पर मुहर्रम के जुलूस निकले।
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ज्ञानपुर। या अली, या हुसैन की गूंजती सदाएं और अकीदतमंदों का रेला। सड़कों पर मातमी नारों के बीच जंगी जौहर का जोशीला प्रदर्शन। शुक्रवार को मुहर्रम की 10वीं तारीख को जिले भर में निकले ताजिया जुलूसों में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सैकड़ों ताजिए करबला में ठंडा किए गए। इस दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की सतर्क निगहबानी रही।
ज्ञानपुर नगर में पुरानी बाजार और बालीपुर अखाड़े की ओर से ताजिया जुलूस निकालकर नगर भ्रमण करते हुए करबला तक पहुंचाया गया। भुड़की से निकले ताजिया को भी देर शाम वहां ठंडा किया गया। इस दौरान या अली, या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। उत्साही युवक रास्ते भर जंगी जौहर दिखाते चल रहे थे।
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गोपीगंज: नगर और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर लगभग चार दर्जन ताजिए निकाले गए। शहीदाने कर्बला की याद में इमाम चौक पर रखे गए ताजिए के साथ पहला जुलूस चुड़िहारी मोहाल से अखाड़ा शेख सलामत अली खां की ओर से निकाला गया। जुलूस में अमानाबाद और जगन्नाथपुर के अखाड़े के साथ या अली या हुसैन की सदाएं बुलंद करते हुए युवक फन-ए-सिपहगिरी का प्रदर्शन करते हुए राजमार्ग बड़ा चौराहा गए। चौराहे पर सोनिया तालाब नई बस्ती का जुलूस शामिल होने के बाद परंपरागत रास्ते से होता हुआ कर्बला पहुंचा, जहां एहतराम के साथ ताजियों को ठंडा किया गया। इस मौके पर गुलाम मुस्तफा अंसारी, हाजी मुमताज बल्ला, एनुलहक, अकरम देहाती, मोहम्मद हनीफ,माबूद खां, हाजी मोहसिन खान समशुल हक, चुन्नू अली आदि शामिल रहे।
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दूसरा जुलूस सराय स्थित पश्चिम मोहाल अखाड़ा धूम खां की ओर से निकाला गया। जुलूस पश्चिम मोहाल से निकल कर अंजही मोहाल पहुंचा, जहां भगवतपुर का जुलूस इमाम चौक पर रखे गए ताजिए के साथ शामिल हुआ। छोटी चौमुहानी पर डेरवा और कौलापुर के अखाड़े शामिल हुए। सदर मोहाल होते हुए जुलूस जीटी रोड पहुंचा, जहां से वापस पुन: पश्चिम मोहाल होते हुए कर्बला चला गया। इसमें भी दो दर्जन से अधिक ताजिया शामिल रहे। जुलूस में समूह बनाकर युवक ढोल-ताशे बजा रहे थे तो वहीं लोग नौहा पढ़ते चल रहे थे। जगह-जगह लाठी, बाना, बनेठी, तलवार आदि के साथ फन ए सिपहगिरी का प्रदर्शन भी हो रहा था। जुलूस में अखाड़ेदार मोहम्मद हनीफ, माबूद खां, फारुकी, पप्पू, पिंटू राइन, झब्बू हाशमी,टीपू राइन, मोबिन फारुकी, मुमताज, नियाज, अख्तर, वसीम आदि रहे।
ऊंज: बनकट खास बिछियां में कर्बला पर चार ताजिए शांतिपूर्ण ढंग से हिंदू-मुस्लिम भाइयों ने मिलकर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए दफ़न किए। यह जानकारी देते हुए ताजिया कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद हनीफ प्रधान ने बताया कि पिछले 15 दिनों से कठिन परिश्रम के बाद गांव वालों ने मिलकर ताजिया बनाया, जिसमें हिंदू भाइयों ने भी पैसे से लेकर श्रम का योगदान किया। पंचायती ताजिया दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा। जो लगभग 50 हजार की लागत से 20 कारीगरों ने मिलकर 15 दिन में बनाया था, जिसकी ऊंचाई लगभग 27 फीट रही।
जंगीगंज: मुहर्रम पर जीटी रोड सरायजगदीश के प्रांगण में चेहरा पूर्व, नई सराय जगदीश, महुआरी कला, नमक पूरा कानून गोयन, कुलमनपुर के ताजिए अखाड़ों ने अपने खेलकूद का प्रदर्शन करते हुए दफन किए गए। दो दर्जन ताजिया में लियाकत अली चढ़ाई बिन की नंबर एक और वजीर उस्ताद चेरापुर की ताजिया द्वितीय एवं मुनव्वर अली का ताजिया तीसरे स्थान पर रहा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
सुरियावां: नगर में लागीबाजार मस्जिद कर्बला पर कूंनीपुर, भटेवरा, नेहरू नगर, लागी बाजार के ताजिए ले जाए गए। कर्बला बावन बीघा तालाब के पूर्वी भीटे पर गहरपुर, तुलापुर बहादुरान, फातकगली, भीमसेनपुर, नेतानागर की ताजिया ठंडा की गईं। अखाड़ेदारों ने लकड़ी का आयोजन किया। इसके अलावा मतेथू कर्बला पर भी ताजिया पहुंचाया गया। कुंनीपुर, गांधी नगर सुरियावां वार्ड संख्या 13 में ताजिया का जुलूस निकाला गया, जो कि मलेशिया के मजार का डिजाइन बनाया गया था। सुरियावां नगर की जामा मस्जिद के पास मेले में आए हुए लोगों को लोगों को बिस्कुट और शरबत बांटा गया, जिसका नेतृत्व अतहर अली ने किया। सुरियावां लागी बाजार मस्जिद पर पुरानी बाजार से दो ताजिया, सुंदर नगर से दो और भटेवरा से एक ताजिया लाई गई। इसके बाद कर्बला ले जाकर ठंडा किया गया। नगर के बावन बीघा तालाब के कर्बला पर फाटक गली, तुलापुर, गहरपुर, भीमसेनपुर के ताजिए पहुंचाए गए।
मोढ़: भिखारी रामपुर में लकड़ी का आयोजन किया गया। सिंहपुर में सनाथपुर, मनीगंज, सिंहपुर के ताजिए आए, जबकि चकचंदा और कस्तूरीपुर के ताजिया को देवदासपुर के दुलही के तारा में दफनाया गया। भिखारीरामपुर का ताजिया उसी गांव में दफन किया गया। विष्णूपुर बहरैची, कोछिया, रबनपुर, पुरानी मोढ़, डुढ़वा, नईबस्ती, लालीपुर आदि गांवों में ताजिया जुलूस निकाले गए।
चौरी: ग्रामीण अंचलों में भी देर शाम ताजिए को कर्बला में ठंडा कर दिया गया। इलाके के रोटहा, मोमिनपुर, मानिकपुर, वेदमनपुर के दर्जन भर ताजिए रोटहा के कर्बला में ठंडा किए गए। चौरी, दानूपट्टी, निदूर पट्टी के तीन ताजिये नईबस्ती में ठंडा किए गए। जद्दूपुर, मनापुर के ताजिये रघूपुर में बरदहा के लक्षापुर, ममहर, दलालुर, गोहिलांव के ताजिये अर्जुनपुर में ठंडा किए गए। इसके अलावा बरवा, डोमनपुर, पल्हैया, निदूर आदि स्थानों पर भी ताजिए ठंडा किए गए। ताजिया संग चल रहे जुलुस में युवाओं ने अपने कला कौशल का खूब प्रदर्शन किया। जगह-जगह लाठी, बल्लम, तलवार से एक से बढ़कर एक हैरत अंगेज करतब पेश करते रहे।
घोसिया: नगर क्षेत्र में करीब 42 ताजिया बनाए गए। सभी ताजिया अपने अपने चौक से उठकर चमनगंज तकिया पर लाए गए और वहां बैठाया गया। करीब दो घंटे तक अखाड़ा खेला गया। लाठी डंडे, तलवार, बल्लम, गड़ासे घुमाए गए। 5.20 बजे अखाड़ा संपन्न कर ताजिया उठाया गया। ताजिया में बाजार से सराफा मंडी जामा मस्जिद से होता हुआ ईदगाह कर्बला तक पंहुचा। ताजिया का फातिया पढ़कर सुपुर्दे खाक की रस्म पूरी की गई। इसी प्रकार माधोसिंह बाजार, पियरोपुर, कुरौना, उगापुर, कठारी बाजार, महराजगंज आदि स्थानों पर मुहर्रम के जुलूस निकले।