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आंदोलन से बेपटरी हुई व्यवस्था, 261 केंद्र चल रहे बंद- प्लानिंग की
Updated Sun, 10 Dec 2017 11:57 PM IST
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ज्ञानपुर। कुपोषण खत्म करने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से चलाई जा रही योजनाएं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आंदोलन से बेपटरी हो चुकी है। जिले के छह ब्लॉकों के करीब 1400 आंगनबाड़ी केंद्रों में 261 बंद होने से उनसे जुड़े धात्रियों और बच्चों को पोषाहार नहीं मिल पा रहा है। केंद्र बंद होने से भले ही 375 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं पर कार्रवाई हो चुकी है लेकिन स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा है।
ग्रामीण एवं नगरीय इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की धात्रियों और बच्चों को पोषणयुक्त भोजन न मिलने से वह कुपोषण का शिकार हो जाती हैं। इसे जड़ से खत्म करने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में करीब 1400 आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं। जिनके माध्यम से पोषाहार समेत अन्य पोषक तत्व धात्रियों और पांच साल से कम उम्र के बच्चों को मुहैया कराया जाता है। गत दो माह से विभिन्न मांगो को लेकर प्रदेश भर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका आंदोलन कर रही हैं। जिसके चलते कई केंद्रों की व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले के 261 केंद्र आंदोलन से बंद चल रहे हैं। इन केंद्रों के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं का मानदेय भी रोका जा चुका है लेकिन व्यवस्था में अब तक सुधार नहीं हो सका है। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी अमृता सिंह ने कहा कि आंदोलन में शामिल कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं पर कार्रवाई की जा चुकी है। परियोजना अधिकारियों के माध्यम से केंद्रों पर पोषाहार भेजने की व्यवस्था की गई है। निदेशालय को पत्र भेजकर इससे अवगत कराया गया है।
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ग्रामीण एवं नगरीय इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की धात्रियों और बच्चों को पोषणयुक्त भोजन न मिलने से वह कुपोषण का शिकार हो जाती हैं। इसे जड़ से खत्म करने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में करीब 1400 आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं। जिनके माध्यम से पोषाहार समेत अन्य पोषक तत्व धात्रियों और पांच साल से कम उम्र के बच्चों को मुहैया कराया जाता है। गत दो माह से विभिन्न मांगो को लेकर प्रदेश भर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका आंदोलन कर रही हैं। जिसके चलते कई केंद्रों की व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले के 261 केंद्र आंदोलन से बंद चल रहे हैं। इन केंद्रों के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं का मानदेय भी रोका जा चुका है लेकिन व्यवस्था में अब तक सुधार नहीं हो सका है। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी अमृता सिंह ने कहा कि आंदोलन में शामिल कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं पर कार्रवाई की जा चुकी है। परियोजना अधिकारियों के माध्यम से केंद्रों पर पोषाहार भेजने की व्यवस्था की गई है। निदेशालय को पत्र भेजकर इससे अवगत कराया गया है।
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