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खेलकूद के बहाने गुरूजी की जेब पर डाका
Updated Sat, 04 Nov 2017 12:30 AM IST
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ज्ञानपुर। प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की ब्लॉक स्तरीय बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता के बहाने परिषदीय स्कूलों के मास्साब की जेब पर डाका डाला जा रहा है। खेलकूद के लिए शासन से भले ही धन आवंटित हुआ है, लेकिन बंदरबांट के लिए कुछ संगठन अफसरों की कृपा से प्रति स्कूल 200 से लेकर 250 रुपये वसूल रहे हैं। इसको लेकर शिक्षकों में गहरी नाराजगी है। शिक्षकों ने इसको लेकर डीएम से गुहार लगाने की तैयारी की है।
परिषदीय स्कूल के बच्चों को खेलकूद के प्रति बढ़ावा देने के लिए हर साल नवंबर- दिसंबर में सरकारी तौर पर आयोजन किया जाता है।
इसके लिए ब्लॉक स्तरीय खेलकूद के लिए करीब आठ हजार जबकि जिलास्तरीय के लिए 20 हजार से अधिक बजट आवंटित होता है। इस साल होने वाले ब्लॉक स्तरीय खेलकूद के लिए आठ हजार से अधिक धनराशि आयोजन कराने वाले संगठन को दे दी गई। वहीं दूसरी ओर खेलकूद के लिए प्रति स्कूल 200 से 250 रुपये शुल्क लगाया गया है। दबी जुबान शिक्षकों का कहना है कि विभाग के ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की कृपा से संगठन के कुछ पदाधिकारी शिक्षकों पर शुल्क थोप रहे हैं। इसको लेकर विरोध के सुर भी उठने लगे हैं। नाम न छापने की शर्त पर शिक्षकों ने कहा कि यह प्रक्रिया नहीं रुकी तो वह डीएम से शिकायत करेंगे। सबसे खास बात है कि शासन से मिले पैसे से ही कार्यक्रम को संपन्न करा लिया जाता है, जबकि बंदरबाट के लिए यह कुचक्र रचा गया है। उधर शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने ऐसे किसी भी मामले से इंकार किया। कहा कि संगठन को बदनाम करने की साजिश की जा रही है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि कार्यक्रम के लिए शासन से भरपूर बजट मिलता है। मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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परिषदीय स्कूल के बच्चों को खेलकूद के प्रति बढ़ावा देने के लिए हर साल नवंबर- दिसंबर में सरकारी तौर पर आयोजन किया जाता है।
इसके लिए ब्लॉक स्तरीय खेलकूद के लिए करीब आठ हजार जबकि जिलास्तरीय के लिए 20 हजार से अधिक बजट आवंटित होता है। इस साल होने वाले ब्लॉक स्तरीय खेलकूद के लिए आठ हजार से अधिक धनराशि आयोजन कराने वाले संगठन को दे दी गई। वहीं दूसरी ओर खेलकूद के लिए प्रति स्कूल 200 से 250 रुपये शुल्क लगाया गया है। दबी जुबान शिक्षकों का कहना है कि विभाग के ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की कृपा से संगठन के कुछ पदाधिकारी शिक्षकों पर शुल्क थोप रहे हैं। इसको लेकर विरोध के सुर भी उठने लगे हैं। नाम न छापने की शर्त पर शिक्षकों ने कहा कि यह प्रक्रिया नहीं रुकी तो वह डीएम से शिकायत करेंगे। सबसे खास बात है कि शासन से मिले पैसे से ही कार्यक्रम को संपन्न करा लिया जाता है, जबकि बंदरबाट के लिए यह कुचक्र रचा गया है। उधर शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने ऐसे किसी भी मामले से इंकार किया। कहा कि संगठन को बदनाम करने की साजिश की जा रही है।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि कार्यक्रम के लिए शासन से भरपूर बजट मिलता है। मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।