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अखिलेश सरकार की समस्या बन रहे लालबत्ती वाले

Fri, 18 Jan 2013 11:26 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Fri, 18 Jan 2013 11:26 AM IST
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behaviour of sp leaders prime concern for akhilesh yadav

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पार्टी के लोगों को आए दिन मर्यादा का पाठ पढ़ा रहे हैं पर, इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा। कुछ मंत्रियों की अलग चाल-ढाल और तौर-तरीका तो सरकार को जब-तब परेशानी में डाल ही रहा है तो लालबत्ती और मंत्री पद का दर्जा पाने वाले विभिन्न बोर्डों व निगमों के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष भी सरकार के लिए मुसीबत खड़ी करने में पीछे नहीं है। इस फेहरिस्त में ताजा नाम बीज प्रमाणीकरण निगम के अध्यक्ष, कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाने वाले साहब सिंह सैनी का जुड़ गया है।

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साहब सिंह सैनी
सरकार ने 4 जनवरी को साहब सिंह सैनी को बीज प्रमाणीकरण निगम का अध्यक्ष नियुक्त किया था। सैनी ने 14 जनवरी को बैठक बुलाई थी। सैनी ने यह बैठक अधिकारियों से परिचय प्राप्त करने के लिए बुलाई थी। पर, बाद में उन्होंने समीक्षा शुरू कर दी। इस पर कुछ अधिकारियों ने आपत्ति की। विवाद मीडिया में पहुंचा तो उसने स्थानीय प्रशासन ने प्रोटोकाल की फाइल देखी।
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जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सैनी को विभाग की समीक्षा करने का अधिकार नहीं है। हालांकि सैनी का तर्क है कि उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है और वह बैठक बुला सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वह जल्द ही इस सिलसिले में मुख्यमंत्री से भी बात करेंगे।
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नटवर गोयल
सपा के सत्ता में आने के बाद इस तरह के विवाद की शुरुआत व्यापारी नेता और खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष राज्यमंत्री पद का दर्जा पाने वाले नटवर गोयल के साथ शुरू हुई थी। गोयल को लालबत्ती मिली तो उन्होंने इसका इस्तेमाल अधिकारियों पर रोब गांठने और अपना रियल एस्टेट का कारोबार बढ़ाने के लिए शुरू कर दिया।

सबसे पहले उनके अपार्टमेंट में बिजली चोरी का विवाद खड़ा हुआ। यह विवाद शांत नहीं हुआ था कि एक स्कूल की जमीन पर कब्जा करके उस पर अपार्टमेंट खड़ा करने के विवाद से उनका नाम जुड़ गया। इसी विवाद में एक दिन एक प्रेस फोटोग्राफर पर भी उन्होंने रोब गालिब करने की कोशिश की और मारपीट की। गोयल पर मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस उन्हें थाने ले गई। पर, सत्ता का रोब कदम-कदम पर दिखाई दिया।

थोड़ी देर पहले मारपीट में शामिल गोयल कुछ ही घंटों में दिल के रोगी हो गए। पुलिस उनका इलाज कराने के लिए अस्पतालों के चक्कर काटती रही। जब कोई उपाय नहीं चला तो उन्हें जेल भेजने की तैयारी हुई। पुलिस उन्हें जेल के दरवाजे तक ही लेकर पहुंची थी कि रिहाई आदेश भी जेल पहुंच गया। हालांकि सपा ने गोयल को पार्टी से बर्खास्त कर और सरकार ने उनकी लालबत्ती छीनकर विवादों से पीछा छुड़ाया।

रामलाल अकेला
रायबरेली के बछरावां से सपा के विधायक रामलाल अकेला भी लालबत्ती और मंत्री पद को लेकर विवाद में आए। अकेला को विधानसभा की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समिति का सभापति बनाया गया। पद मिलते ही अकेला के क्षेत्र में उनके समर्थकों ने उन्हें मंत्री बना डाला। होर्डिंग लगा दी गई।


अकेला के समर्थकों ने अधिकारियों पर रोब गालिब करना शुरू कर दिया। विवाद खड़ा हुआ तो बात साफ हुई कि अकेला को मंत्री पद का दर्जा नहीं दिया गया है। ऊपर से फटकार पड़ी तो अकेला ने भी सफाई दी कि उनके कुछ समर्थकों ने इस तरह की होर्डिंग लगा दी थी।

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