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फोटो खींची तो लावारिस हुआ सवा क्विंटल खोया

Tue, 22 Oct 2019 11:21 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 22 Oct 2019 11:21 PM IST
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When the photo was taken, it was abandoned
बस्ती के रोडवेज पर लावरिस खोवा पकड़ा गया। - फोटो : BASTI
फोटो खींची तो लावारिस हुआ सवा क्विंटल खोया
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बस्ती। छोटे से मुनाफे के लिए मिलावटखोर लोगों की सेहत दांव पर लगा रहे हैं। इसमें कुछ छोटे रोडवेज कर्मियों की बड़ी भूमिका है, जो कोरियर का काम कर रहे हैं। अभिहित अधिकारी कहते हैं कि यह माल रोडवेज बसों से कानपुर, नवाबगंज और जरवल से आता है।
ऐसी हरकत सोमवार रात हुई। करीब ढाई बजे एक रोडवेज बस से मिलावटी खोया रोडवेज के निकट उतार दिया गया। भोर चार बजे पहुंची ‘अमर उजाला’ टीम ने संदेह जताया तो आसपास वालों ने पुष्टि कर दी। फोटो खींचते समय तमाम चेहरे पहचानने की कोशिश करने लगे। अखबार कर्मी होने की जानकारी के बाद बोरियों में बंद मिलावटी खोया सड़क किनारे सुबह साढ़े सात बजे तक पड़ा रहा। उधर से गुजर रहे अभिहित अधिकारी अपूर्व श्रीवास्तव की भी नजर पड़ी तो कब्जे में ले लिया। इसके बाद कार्यालय ले गए। वजन में एक क्विंटल 25 किलो निकला। बस स्टेशन के आसपास चाय-पान की दुकान करने वालों का कहना था कि अक्सर ‘माल’ उतरता रहता है। चार-पांच लोग आसपास रहते हैं जो तत्काल उठा लेते हैं। आज फोटो खींचने से बोरियों के नजदीक कोई नहीं आया जिससे सुबह तक लावारिस पड़ा रहा।
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असली और नकली की पहचान
खोया (मावा) में थोड़ी सी चीनी डालकर गर्म करें, यदि पानी छोड़ने लगे तो मिलावटी है। हाथ पर रगड़ें, असली होने पर देसी घी की तरफ खुशबू आएगी। नकली में अजीब दुर्गन्ध होगी। असली खोया मुंह में चिपकता नहीं है, जबकि नकली चिपकता है। पानी में डालने पर टूटकर अलग हो जाएगा। खोया अगर दानेदार लगे तो ये मिलावट होने के संकेत हैं।
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ऐसे बनता है नकली मावा
नकली खोया बनाने में स्टार्च, आयोडीन, सिंघाड़े का आटा और आलू मिलाया जाता है, ताकि उसका वजन बढ़ सके। असली खोया की तरह दिखे। इसके लिए इसमें कुछ केमिकल भी मिलाया जाता है। कुछ दुकानदार मिल्क पाउडर में वनस्पति घी मिलाकर खोया को तैयार करते हैं।
खराब हो सकती है लीवर-किडनी: डॉ. सोनी
जिला अस्पताल में फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी कहते हैं कि खोया में मिलावट कितना है, उस अनुरूप सेहत पर असर डालता है। पहली बात तो उल्टी-दस्त होगी। मात्रा ज्यादा होने पर डायरिया का रूप ले लेगी। लीवर और किडनी भी प्रभावित होती है। स्किन से जुड़ी बीमारी हो सकती है। अधिक मात्रा में नकली खोया से बनी मिठाई खाने से लीवर को नुकसान पहुंच सकता है। कैंसर तक हो सकता है।
सचेत किया है, अब कार्रवाई: एआरएम
रोडेवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आरपी सिंह भी मानते हैं कि कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं, लेकिन बस्ती में तमाम डिपो की बसें आतीं और गोरखपुर, सिद्धार्थनगर को जाती हैं। बस्ती डिपो के कर्मियों को हिदायत दी है कि इस तरह के आइटम बगैर बुक किए लाए गए तो कड़ी कार्रवाई करेंगे। संविदाकर्मी हैं तो बर्खास्त, स्थायी हैं तो निलंबन की कार्रवाई निश्चित है। कानपुर से गोरखपुर तक स्क्वॉड लगाए गए हैं, लेकिन कहीं न कहीं खेल है।

संसाधनों से मात खा रही टीम: अभिहित अधिकारी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के अभिहित अधिकारी अपूर्व श्रीवास्तव कहते हैं कि कानपुर, नवाबगंज और जरवल से यहां खेप पहुंचती है। जानकारी होने पर 17 अक्तूबर को पानी टंकी कटरा और टोल प्लाजा से दो लोगों को पकड़ा गया। इनके खोये का नमूना लेकर जांच को भेजा गया है। हमारी सबसे बड़ी कमजोरी टीम न होना है। पांच फूड इंस्पेक्टर की जगह महज दो हैं। संभव नहीं है कि रोडवेज पर रातभर निगरानी कराई जा सके।
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