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मौसम: जलते तवे पर पानी की बूंद साबित हुई फुहारें
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बस्ती। मानसून की बेइमानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। घने बादल घिरने के बावजूद बारिश न होने का सिलसिला लगातार चल रहा है। बुधवार को दोपहर बाद 10-मिनट के लिए हल्की फुहारें पड़ीं, लेकिन वे जलते तवे पर पानी की बूंद साबित हुईं। यह बूंदाबांदी राहत देने के बजाय उमस बढ़ाकर गईं।
मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि अगले 72 घंटे के बीच हल्की बारिश हो सकती है। मगर यह हवा की चाल पर निर्भर करेगा।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डाॅक्टर अमरनाथ मिश्र के अनुसार पश्चिमी यूपी में मानसून फिर से सक्रिय हो चुका है। मगर पूर्वी यूपी खासकर बस्ती मंडल में फिलहाल बारिश के आसार कम हैं। इसके पीछे वजह है कि बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर आ रही हवाओं का पश्चिमी विक्षोभ से तालमेल नहीं हो पा रहा है। यानी मानसून कमजोर पड़ने की वजह से बारिश का सिस्टम नहीं बन पा रहा है।
बुधवार को अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहा। बूंदाबांदी के कारण वातावरण में 75 फीसदी आर्द्रता बनी रही। हालांकि मंगलवार को तापमान बुधवार की तुलना में एक डिग्री सेलिसियस कम रहा। मानसून के इस रुख से जहां एक ओर मौसम विज्ञानी हैरान हैं वहीं किसानों में भारी निराशा है।
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2021 की जुलाई के शुरुआती चार दिनों में 50 मिलीलीटर से अधिक बारिश हो गई थी, जिसके कारण खेत-तालाब लबालब भर गए थे। इससे धान की रोपाई में काफी सुविधा हुई थी। तापमान भी 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास आ चुका था। मगर इस बार जुलाई में अभी सिर्फ 34 मिलीमीटर बारिश ही हुई।
भूअर के किसान राम जनम का कहना है कि धान की रोपाई किए 20 दिन से अधिक समय हो गया है। मगर पौधे अभी ठीक से हरे नहीं हो पाए हैं। सुबह खेत में पानी भरो ताे रात तक गायब हो जाता है। रौतापार के किसान कपिलदेव शुक्ला कहते हैं कि बारिश न होने से खेत में काफी खर निकल रहे हैं, जिसके कारण फसल दब जा रही है। बारिश होने से जब पानी रहता है तो खर-पतवार कम निकलते हैं।
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मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि अगले 72 घंटे के बीच हल्की बारिश हो सकती है। मगर यह हवा की चाल पर निर्भर करेगा।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डाॅक्टर अमरनाथ मिश्र के अनुसार पश्चिमी यूपी में मानसून फिर से सक्रिय हो चुका है। मगर पूर्वी यूपी खासकर बस्ती मंडल में फिलहाल बारिश के आसार कम हैं। इसके पीछे वजह है कि बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर आ रही हवाओं का पश्चिमी विक्षोभ से तालमेल नहीं हो पा रहा है। यानी मानसून कमजोर पड़ने की वजह से बारिश का सिस्टम नहीं बन पा रहा है।
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बुधवार को अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहा। बूंदाबांदी के कारण वातावरण में 75 फीसदी आर्द्रता बनी रही। हालांकि मंगलवार को तापमान बुधवार की तुलना में एक डिग्री सेलिसियस कम रहा। मानसून के इस रुख से जहां एक ओर मौसम विज्ञानी हैरान हैं वहीं किसानों में भारी निराशा है।
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2021 की जुलाई के शुरुआती चार दिनों में 50 मिलीलीटर से अधिक बारिश हो गई थी, जिसके कारण खेत-तालाब लबालब भर गए थे। इससे धान की रोपाई में काफी सुविधा हुई थी। तापमान भी 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास आ चुका था। मगर इस बार जुलाई में अभी सिर्फ 34 मिलीमीटर बारिश ही हुई।
भूअर के किसान राम जनम का कहना है कि धान की रोपाई किए 20 दिन से अधिक समय हो गया है। मगर पौधे अभी ठीक से हरे नहीं हो पाए हैं। सुबह खेत में पानी भरो ताे रात तक गायब हो जाता है। रौतापार के किसान कपिलदेव शुक्ला कहते हैं कि बारिश न होने से खेत में काफी खर निकल रहे हैं, जिसके कारण फसल दब जा रही है। बारिश होने से जब पानी रहता है तो खर-पतवार कम निकलते हैं।