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पेयजल संबंधी कार्य के लिए संतकबीरनगर में गुहार लगाएंगे जिले के ग्रामीण
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पेयजल संबंधी कार्य के लिए संतकबीरनगर में गुहार लगाएंगे जिले के ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। उत्तर प्रदेश जल निगम के नगरीय व ग्रामीण खंडों में बंट जाने से बस्ती जिले के ग्रामीणों को पेयजल संबंधी कार्यों के लिए अपनी फरियाद लेकर संतकबीरनगर के एक्सईएन दफ्तर जाना पड़ेगा। वहीं, सिद्धार्थनगर के नगरीय क्षेत्र के लोगों को बस्ती पहुंच कर गुहार लगानी पड़ेगी।
शासन के इस फैसले से जहां निगम के छोटे-बड़े सभी इंजीनियर हैरान हैं। वहीं, नागरिकों व ग्रामीणों को अब हमेशा के लिए गैर जनपदों में जाकर अपनी समस्याएं सुनानी पड़ेगी। शासन के निर्देश पर जल निगम नगरीय व ग्रामीण खंड में बंट चुका है। साथ ही निदेशालय स्तर से ताबड़तोड़ खंडों की जिम्मेदारियां बांटी जा रहीं हैं। इससे निगम के पहले से प्रस्तावित कार्य जहां पूरी तरह से बाधित होने की संभावना बलवती होने लगी है।
इस तरह से किया गया है खंडों का वितरण
बस्ती में सिर्फ जल निगम का अधीक्षण अभियंता व अधिशासी अभियंता कार्यालय संचालित है। यहां के अधीक्षण अभियंता कार्यालय से मंडल के संतकबीरनगर, बस्ती व सिद्धार्थनगर के नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों का पूरा पर्यवेक्षण होता है। नई व्यवस्था के तहत अधीक्षण अभियंता विश्वेश्वर प्रसाद बस्ती मंडल के तीनों जिलों के साथ ही गोरखपुर मंडल के जिलों (गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर व महराजगंज) के ग्रामीण खंड का कार्यभार संभालेंगे। वहीं, गोरखपुर के अधीक्षण अभियंता बस्ती व गोरखपुर मंडल के जिलों के नगरीय क्षेत्रों की मॉनीटरिंग करेंगे।बस्ती के अधिशाषी अभियंता रेहान फारुकी बस्ती के साथ ही सिद्धार्थनगर के नगरीय क्षेत्रों की जिम्मेदारी देखेंगे। संतकबीरनगर का नगरीय क्षेत्र गोरखपुर का खंड कार्यालय संभालेगा और सिद्धार्थनगर के अधिशासी अभियंता केवल सिद्धार्थनगर के ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी निभाएंगे। दूसरी तरफ संतकबीरनगर के एक्सईएन संतकबीरनगर व बस्ती जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति सुनिश्चित कराएंगे।
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तो बस्ती के 403 गांवों में घर-घर पेयजल पहुंचाने की योजना लटकी
दो साल पहले से प्रस्तावित जिले के 403 गांवों में घर-घर पेयजल पहुंचाने की योजना अब पूरी तरह से लटक गई है। 2019 में जब यह योजना प्रस्तावित की गई, तो तकरीबन दस अरब रुपये का खर्च आंका गया। इसी बीच निदेशालय स्तर से इस पूरी परियोजना को लघु सिंचाई विभाग को स्थानांतरित कर दो निजी कंपनियों को सौंप दिया गया। जब इस निर्णय पर विधानसभा में विपक्षियों ने तरह-तरह के संगीन आरोप लगाने शुरू किए तो मजबूर होकर इसे वापस जल निगम को सौंप दिया गया। इस बीच तकरीबन डेढ साल बीत गए, लेकिन योजना परवान नहीं चढ़ सकी। अब जब जल निगम ने इन प्रस्तावित गांवों का सर्वे कर निर्माण की रूपरेखा तैयार करनी शुरू की, तो पूरे निगम को ही दो खंडों में बांट दिया गया। जब तक सभी खंड सक्रिय होंगे और कुछ कार्य आगे बढ़ाने की सोचेंगे तब तक नई विधानसभा के गठन के लिए आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी।
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निदेशालय स्तर से मिले दिशा-निर्देशों के अनुसार ही खंडों का पर्यवेक्षण किया जाएगा। आगे जैसी गाइडलाइन जारी होगी, उसी के अनुसार जिम्मेदारियां संभाली जाएंगी।- विश्वेश्वर प्रसाद, अधीक्षण अभियंता, जल निगम बस्ती
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। उत्तर प्रदेश जल निगम के नगरीय व ग्रामीण खंडों में बंट जाने से बस्ती जिले के ग्रामीणों को पेयजल संबंधी कार्यों के लिए अपनी फरियाद लेकर संतकबीरनगर के एक्सईएन दफ्तर जाना पड़ेगा। वहीं, सिद्धार्थनगर के नगरीय क्षेत्र के लोगों को बस्ती पहुंच कर गुहार लगानी पड़ेगी।
शासन के इस फैसले से जहां निगम के छोटे-बड़े सभी इंजीनियर हैरान हैं। वहीं, नागरिकों व ग्रामीणों को अब हमेशा के लिए गैर जनपदों में जाकर अपनी समस्याएं सुनानी पड़ेगी। शासन के निर्देश पर जल निगम नगरीय व ग्रामीण खंड में बंट चुका है। साथ ही निदेशालय स्तर से ताबड़तोड़ खंडों की जिम्मेदारियां बांटी जा रहीं हैं। इससे निगम के पहले से प्रस्तावित कार्य जहां पूरी तरह से बाधित होने की संभावना बलवती होने लगी है।
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इस तरह से किया गया है खंडों का वितरण
बस्ती में सिर्फ जल निगम का अधीक्षण अभियंता व अधिशासी अभियंता कार्यालय संचालित है। यहां के अधीक्षण अभियंता कार्यालय से मंडल के संतकबीरनगर, बस्ती व सिद्धार्थनगर के नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों का पूरा पर्यवेक्षण होता है। नई व्यवस्था के तहत अधीक्षण अभियंता विश्वेश्वर प्रसाद बस्ती मंडल के तीनों जिलों के साथ ही गोरखपुर मंडल के जिलों (गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर व महराजगंज) के ग्रामीण खंड का कार्यभार संभालेंगे। वहीं, गोरखपुर के अधीक्षण अभियंता बस्ती व गोरखपुर मंडल के जिलों के नगरीय क्षेत्रों की मॉनीटरिंग करेंगे।बस्ती के अधिशाषी अभियंता रेहान फारुकी बस्ती के साथ ही सिद्धार्थनगर के नगरीय क्षेत्रों की जिम्मेदारी देखेंगे। संतकबीरनगर का नगरीय क्षेत्र गोरखपुर का खंड कार्यालय संभालेगा और सिद्धार्थनगर के अधिशासी अभियंता केवल सिद्धार्थनगर के ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी निभाएंगे। दूसरी तरफ संतकबीरनगर के एक्सईएन संतकबीरनगर व बस्ती जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति सुनिश्चित कराएंगे।
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तो बस्ती के 403 गांवों में घर-घर पेयजल पहुंचाने की योजना लटकी
दो साल पहले से प्रस्तावित जिले के 403 गांवों में घर-घर पेयजल पहुंचाने की योजना अब पूरी तरह से लटक गई है। 2019 में जब यह योजना प्रस्तावित की गई, तो तकरीबन दस अरब रुपये का खर्च आंका गया। इसी बीच निदेशालय स्तर से इस पूरी परियोजना को लघु सिंचाई विभाग को स्थानांतरित कर दो निजी कंपनियों को सौंप दिया गया। जब इस निर्णय पर विधानसभा में विपक्षियों ने तरह-तरह के संगीन आरोप लगाने शुरू किए तो मजबूर होकर इसे वापस जल निगम को सौंप दिया गया। इस बीच तकरीबन डेढ साल बीत गए, लेकिन योजना परवान नहीं चढ़ सकी। अब जब जल निगम ने इन प्रस्तावित गांवों का सर्वे कर निर्माण की रूपरेखा तैयार करनी शुरू की, तो पूरे निगम को ही दो खंडों में बांट दिया गया। जब तक सभी खंड सक्रिय होंगे और कुछ कार्य आगे बढ़ाने की सोचेंगे तब तक नई विधानसभा के गठन के लिए आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी।
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निदेशालय स्तर से मिले दिशा-निर्देशों के अनुसार ही खंडों का पर्यवेक्षण किया जाएगा। आगे जैसी गाइडलाइन जारी होगी, उसी के अनुसार जिम्मेदारियां संभाली जाएंगी।- विश्वेश्वर प्रसाद, अधीक्षण अभियंता, जल निगम बस्ती