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Basti News: कार्यदायी संस्थाओं को ब्लैक लिस्ट करने की चेतावनी
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बस्ती। जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के 55 भवन अधूरे होने पर डीएम कृत्तिका ज्योत्सना ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। समय से भवन निर्माण पूरा न करने वाली कार्यदायी संस्थाओं को काली सूची में डालने की चेतावनी दी गई है।
अमर उजाला में आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण की सुस्त चाल..पिछले साल के 55 भवन अधूरे खबर को संज्ञान में लेते हुए डीएम ने बृहस्पतिवार को कार्यदायी संस्थाओं को हर हाल में जनवरी माह तक निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि किराये, उधारी और स्कूलों के भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को इससे छुटकारा दिलाने के लिए बीते और चालू वित्तीय साल में जिलेभर में 274 आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जा रहे हैं। तीन विभाग मिलकर यह निर्माण कार्य कर रहे हैं। एक आंगनबाड़ी केंद्र के भवन के निर्माण पर करीब 11.84 लाख रुपये की लागत आ रही है। वर्तमान में कुल 2655 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 1848 किराये, स्कूल और अन्य भवनों में संचालित हो रहे हैं।
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साथ ही, पंचायत भवन या पब्लिक भवनों में आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। विभागीय भवनों की संख्या 807 है। शेष केंद्र पब्लिक भवन, पंचायत और सामुदायिक भवन में संचालित हैं। डीएम ने कार्यदायी संस्थाओं के मुखियाओं को तलब कर कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन के निर्माण में लेट लतीफी कतई नहीं होनी चाहिए। यह शासन की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में शामिल हैं। पिछले वित्तीय वर्ष के 55 भवन अधूरे होने पर कड़ी नाराजगी भी जताई।
डीपीओ राजेश कुमार का कहना है कि आईसीडीएस से दो लाख, पंचायतीराज विभाग से 1.84 लाख और मनरेगा से आठ लाख रुपये आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण पर खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 62 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन का निर्माण पूरा हो चुका है।
इसलिए बन रहे आंगनबाड़ी केंद्र : आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी (झुग्गी-झोपड़ी) क्षेत्रों में 0-6 साल के बच्चों और गर्भवती/स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के लिए एक सुरक्षित, समर्पित और बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान करना है, ताकि कुपोषण, बीमारी को कम किया जा सके। बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
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अमर उजाला में आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण की सुस्त चाल..पिछले साल के 55 भवन अधूरे खबर को संज्ञान में लेते हुए डीएम ने बृहस्पतिवार को कार्यदायी संस्थाओं को हर हाल में जनवरी माह तक निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
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बता दें कि किराये, उधारी और स्कूलों के भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को इससे छुटकारा दिलाने के लिए बीते और चालू वित्तीय साल में जिलेभर में 274 आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जा रहे हैं। तीन विभाग मिलकर यह निर्माण कार्य कर रहे हैं। एक आंगनबाड़ी केंद्र के भवन के निर्माण पर करीब 11.84 लाख रुपये की लागत आ रही है। वर्तमान में कुल 2655 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 1848 किराये, स्कूल और अन्य भवनों में संचालित हो रहे हैं।
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साथ ही, पंचायत भवन या पब्लिक भवनों में आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। विभागीय भवनों की संख्या 807 है। शेष केंद्र पब्लिक भवन, पंचायत और सामुदायिक भवन में संचालित हैं। डीएम ने कार्यदायी संस्थाओं के मुखियाओं को तलब कर कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन के निर्माण में लेट लतीफी कतई नहीं होनी चाहिए। यह शासन की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में शामिल हैं। पिछले वित्तीय वर्ष के 55 भवन अधूरे होने पर कड़ी नाराजगी भी जताई।
डीपीओ राजेश कुमार का कहना है कि आईसीडीएस से दो लाख, पंचायतीराज विभाग से 1.84 लाख और मनरेगा से आठ लाख रुपये आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण पर खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 62 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन का निर्माण पूरा हो चुका है।
इसलिए बन रहे आंगनबाड़ी केंद्र : आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी (झुग्गी-झोपड़ी) क्षेत्रों में 0-6 साल के बच्चों और गर्भवती/स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के लिए एक सुरक्षित, समर्पित और बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान करना है, ताकि कुपोषण, बीमारी को कम किया जा सके। बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।