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Basti News: नहीं काम आ रही चेतावनी.... जल रही पराली
Fri, 08 Nov 2024 12:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 08 Nov 2024 12:57 AM IST
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हर्रैया क्षेत्र में धान की पराली जलाकर किया गया साफ
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दीपावली पर फोड़े गए पटाखों के धुआं का असर अभी पूरी तरह से खत्म भी नहीं हो पाया है। ऐसे में छठ पर्व की गहमागहमी में फोड़े जा रहे पटाखों ने समस्या फिर बढ़ा दी है। ऊपर से खेतों में जलाई जा रही पराली से प्रदूषण हानिकारक स्तर पर पहुंच गया है।
बृहस्पतिवार को एक्यूआई 128 पर दर्ज किया गया, जो सामान्य से 28 प्वाइंट अधिक है। जानकारों का कहना है कि पराली जलाने के मामले रोके नहीं गए तो हवा की गुणवत्ता बदतर होती जाएगी।
पर्यावरण के जानकार बताते हैं कि जब तक एक्यूआई 100 के आसपास नहीं पहुंचता, तब तक चैन की सांस लेने की स्थिति नहीं बन पाएगी।
सामान्य लोग खुले में रहने के दौरान घुटन महसूस कर रहे हैं। दमा रोगियों को सर्वाधिक दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
पर्यावरण प्रेमी अरविंद सिंह ने बताया कि हवा में प्रदूषण कम तभी होगा जब लोग सचेत होंगे। हमें यह भी ध्यान देना होगा कि इस बीच हम प्लॉस्टिक एवं टायर आदि न जलाएं।
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आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अयोध्या के मौसम वैज्ञानिक डाॅ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि वातावरण में नमी के कारण एयर पाल्यूटेंट बड़े आकार के हो जा रहे हैं। इससे वायुमंडल में एक परत बन जा रही है। इसका घनत्व बढ़ने से अदृश्यता की स्थिति पैदा हो रही है।
प्रगतिशील किसान इंद्रजीत सिंह बताते हैं कि कटाई के समय पुआल खेत में छोड़ दें तो अगली फसल की तैयारी में जुताई नहीं हो पाती है। जिन किसानों के खेत में नमी ज्यादा है, उन्हें मिट्टी सुखाने के लिए जुताई करना मजबूरी हो जाती है।ा
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बस्ती। दीपावली पर फोड़े गए पटाखों के धुआं का असर अभी पूरी तरह से खत्म भी नहीं हो पाया है। ऐसे में छठ पर्व की गहमागहमी में फोड़े जा रहे पटाखों ने समस्या फिर बढ़ा दी है। ऊपर से खेतों में जलाई जा रही पराली से प्रदूषण हानिकारक स्तर पर पहुंच गया है।
बृहस्पतिवार को एक्यूआई 128 पर दर्ज किया गया, जो सामान्य से 28 प्वाइंट अधिक है। जानकारों का कहना है कि पराली जलाने के मामले रोके नहीं गए तो हवा की गुणवत्ता बदतर होती जाएगी।
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पर्यावरण के जानकार बताते हैं कि जब तक एक्यूआई 100 के आसपास नहीं पहुंचता, तब तक चैन की सांस लेने की स्थिति नहीं बन पाएगी।
सामान्य लोग खुले में रहने के दौरान घुटन महसूस कर रहे हैं। दमा रोगियों को सर्वाधिक दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
पर्यावरण प्रेमी अरविंद सिंह ने बताया कि हवा में प्रदूषण कम तभी होगा जब लोग सचेत होंगे। हमें यह भी ध्यान देना होगा कि इस बीच हम प्लॉस्टिक एवं टायर आदि न जलाएं।
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आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अयोध्या के मौसम वैज्ञानिक डाॅ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि वातावरण में नमी के कारण एयर पाल्यूटेंट बड़े आकार के हो जा रहे हैं। इससे वायुमंडल में एक परत बन जा रही है। इसका घनत्व बढ़ने से अदृश्यता की स्थिति पैदा हो रही है।
प्रगतिशील किसान इंद्रजीत सिंह बताते हैं कि कटाई के समय पुआल खेत में छोड़ दें तो अगली फसल की तैयारी में जुताई नहीं हो पाती है। जिन किसानों के खेत में नमी ज्यादा है, उन्हें मिट्टी सुखाने के लिए जुताई करना मजबूरी हो जाती है।ा