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मॉब लिंचिंग से पार पाने में पुलिस की मदद करेंगे डिजिटल वालंटियर

Wed, 28 Aug 2019 11:33 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 28 Aug 2019 11:33 PM IST
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volunteers will help overcome mob lynching.
मॉब लिंचिंग से पार पाने में मदद करेंगे डिजिटल वालंटियर
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बस्ती। कभी चोटी कटवा तो कभी मुंह नोचवा और अब बच्चा चोर की अफवाह ने शहर से लेकर गांवों तक लोगों की नींद उड़ा रखी है। भीड़ के हत्थे चढ़कर जान गंवाने की घटनाएं रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने कमर कस लिया है।
अफवाह के चलते मॉब लिंचिंग की घटनाओं को देखते हुए 2017-18 में डिजिटल वालंटियर का गठन किया गया था। एसपी पंकज कुमार का कहना है कि ये डिजिटल वालंटियर ही अफवाह रोकने में तुरुप का इक्का साबित होंगे। गांव-गांव तक उनकी पहुंच है। भड़काने की कोशिश करने वालों पर रासुका के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। डिजिटल वालंटियर की सक्रियता जांचने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें हर थाने के सदस्यों को कॉल कर फीडबैक लिया जा रहा है।
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अफवाह में कट गई थी दर्जन भर चोटी
- अगस्त 2017 में चोटी कटवा की अफवाह ने पुलिस प्रशासन को खूब छकाया था। हर्रैया, परशुरामपुर व छावनी थाने में एक ही रात में चार घटनाएं सामने आईं थीं। पहली घटना में हर्रैया थाना क्षेत्र के भिरवा गांव के ज्ञानदास की पोती की चोटी कट गई। दूसरी में छावनी के सांड़पुर की दो चचेरी बहनों की चोटी कट गई। रुधौली थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर, सोनहा के कोल्हुई, सुगिया गांव, नगर थाना क्षेत्र के बहादुरपुर में चोटी कटने से तमाम तरह की अफवाह फैल गई थीं।
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बनाए गए 36 सौ डिजिटल वालंटियर
- 16 थानों में डिजिटल वालंटियर वाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं। हर थाने में 225 सदस्यों वाले ग्रुप का एडमिन संबंधित थाने के प्रभारी हैं। कुछ थानों के ग्रुप के एडमिन सीओ और कुछ के उपनिरीक्षक भी बनाए गए हैं। डिजिटल वालंटियर वाट्सएप ग्रुप से थाना क्षेत्र के शिक्षक, प्रधानाचार्य, सेवानिवृत्त सैनिक, पुलिस पेंशनर, पत्रकार, सामाजिक संगठन के लोग, पूर्व व वर्तमान सभासद, प्रधान, बीडीसी, छात्रनेता, आशाकर्मी, ग्राम सचिव, एएनएम, कोटेदार, डाक्टर, अधिवक्ता, व्यापार मंडल के पदाधिकारी, मौलवी और पुजारी जोड़े गए हैं।

क्या है मॉब लिंचिंग
- भीड़ यानी लोगों का समूह जो अफवाह पर किसी को पीट-पीटकर जान ले लेती है। उसे मॉब लिंचिंग नाम दिया गया है। लिंचिंग यानी भीड़ के हाथों हत्या। जो सबसे ज्यादा व्हाट्सएप पर फैली अफवाह के कारण होती है। अब तक की तहकीकात में पाया गया कि अगर ये झूठी खबरें सोशल मीडिया पर पोस्ट ही नहीं होंगी तो इससे मॉब लिंचिंग की घटनाओं में कमी आएगी।
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