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Basti News: 330 रुपये बोरी बिक रही यूरिया....अधिकारी बेफिक्र
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बस्ती/बनकटी। उर्वरक की किल्लत समाप्त नहीं हो रहा है। समितियों पर यूरिया की आपूर्ति सामान्य नहीं हो पाई है। किसानों का कहना है कि इसका फायदा उठाते हुए निजी दुकान संचालक 269 रुपये में बिकने वाली यूरिया 330 रुपये तक बेच रहे हैं। इस पर जिला कृषि अधिकारी व सहकारिता अफसर मौन हैं।
जनपद में पहले किसानों ने डीएपी की किल्लत झेली इसके बाद अब वह यूरिया की किल्लत झेल रहे हैं। समितियों पर समय से उर्वरक नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। किसानों को सरसों, आलू, चना, मटर की फसल में यूरिया डालना है। ऐसे में वह निजी दुकानों से मुंहमांगे दाम में यूरिया खरीदने को मजबूर हैं। उर्वरक के दाम नियंत्रण को लेकर कार्रवाई करने वाले जिला कृषि अधिकारी भी मौन हैं।
क्षेत्र में महथा सजहरा, देवमी चिंताखोर, सोभनपार बोकनार, खोरिया बसौढ़ी, बाघापार चेनुआ, मुंडेरवा, पकड़ी चंदा, सजनाखोर सहित 12 सहकारी समितियां हैं। ज्यादातर पर मंगलवार को यूरिया नहीं मिल रही थी। समितियों के सचिवों ने बताया कि 12 दिसंबर को ही यूरिया के लिए टोकन कट चुका है। मगर अब तक यूरिया नहीं आई है।
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गंगौरी के किसान सुरेंद्र यादव ने बताया कि निजी दुकान संचालक मनमाने दाम पर उर्वरक बेच रहे हैं। 300 रुपये में दो बोरी यूरिया खरीदा हूं। रौतापार के किसान रामकेश चौधरी ने बताया कि कभी ब्लैक में डीएपी खरीदनी पड़ रही है तो कभी यूरिया। किसानों की दशा पर कोई रहम नहीं खा रहा है। क्षेत्र भर में 330 रुपये में यूरिया बेची जा रही है।
...
कोट
समितियों पर यूरिया लगातार भेजी जा रही है। फसलों में पहली बार यूरिया डालने का समय होने के कारण खाद पहुंचते ही खत्म हो जा रही है। ओवर टिंग की शिकायत किसानों ने नहीं की है।
-आशीष श्रीवास्तव, एआर सहकारिता
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जनपद में पहले किसानों ने डीएपी की किल्लत झेली इसके बाद अब वह यूरिया की किल्लत झेल रहे हैं। समितियों पर समय से उर्वरक नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। किसानों को सरसों, आलू, चना, मटर की फसल में यूरिया डालना है। ऐसे में वह निजी दुकानों से मुंहमांगे दाम में यूरिया खरीदने को मजबूर हैं। उर्वरक के दाम नियंत्रण को लेकर कार्रवाई करने वाले जिला कृषि अधिकारी भी मौन हैं।
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क्षेत्र में महथा सजहरा, देवमी चिंताखोर, सोभनपार बोकनार, खोरिया बसौढ़ी, बाघापार चेनुआ, मुंडेरवा, पकड़ी चंदा, सजनाखोर सहित 12 सहकारी समितियां हैं। ज्यादातर पर मंगलवार को यूरिया नहीं मिल रही थी। समितियों के सचिवों ने बताया कि 12 दिसंबर को ही यूरिया के लिए टोकन कट चुका है। मगर अब तक यूरिया नहीं आई है।
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गंगौरी के किसान सुरेंद्र यादव ने बताया कि निजी दुकान संचालक मनमाने दाम पर उर्वरक बेच रहे हैं। 300 रुपये में दो बोरी यूरिया खरीदा हूं। रौतापार के किसान रामकेश चौधरी ने बताया कि कभी ब्लैक में डीएपी खरीदनी पड़ रही है तो कभी यूरिया। किसानों की दशा पर कोई रहम नहीं खा रहा है। क्षेत्र भर में 330 रुपये में यूरिया बेची जा रही है।
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कोट
समितियों पर यूरिया लगातार भेजी जा रही है। फसलों में पहली बार यूरिया डालने का समय होने के कारण खाद पहुंचते ही खत्म हो जा रही है। ओवर टिंग की शिकायत किसानों ने नहीं की है।
-आशीष श्रीवास्तव, एआर सहकारिता