{"_id":"8e7827906b933a2ab08c6f7c3d3fb206","slug":"tuesday-morning-coevered-in-fog-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोहरे की चादर में लिपटी रही मंगलवार की सुबह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोहरे की चादर में लिपटी रही मंगलवार की सुबह
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Dec 2015 12:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्ती। जाड़े की पहली कड़ाके की ठंड मंगलवार को पड़ी। सोमवार की शाम से ही
विज्ञापन
सर्द हवाओं ने ठंड का एहसास कराना शुरू कर दिया था। मंगलवार की सुबह कोहरे
की चादर में नजर आया। सड़कों पर कुहरे के चलते कुछ नजर ही नहीं आ रहा था।
11 बजे के बाद सूर्य के दर्शन हए और लोगों को ठंड से कुछ राहत मिली।
वैसे तो दिसंबर में कड़ाके की ठंड शुरू हो जाती है, मगर इस बार 14 दिसंबर तक ठंडक का वह स्वरूप नजर नहीं आ रहा था। लोग कयास लगा रहे थे कि इस बार कड़ाके की ठंडक जनवरी में पड़ेगी, मगर शाम होते होते मौसम का रुख बदला। सर्द हवाएं चलनी शुरू हो गईं।
रात होते-होते कड़ाके की ठंड पड़ने लगी। रात में कड़ाके की ठंड और कोहरे ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया। रात दस बजे के बाद से घना कुहरा पड़ने लगा। कुहरे के चलते वाहन चालकों को भी काफी मुश्किलें उठानी पड़ी।
नेशनल हाइवे पर घने कुहरे के कारण वाहन रेंगते हुए चल रहे थे। सुबह के समय भी कुहरे की चादर बनी रही। लोग वाहनों की हेड लाइटें जलाकर जैसे-तैसे चल रहे थे। सबसे अधिक दिक्कत स्कूली बच्चों को हो रही थी जिन्हें सुबह स्कूल जाना था। ठंड के कारण परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या काफी रही।
पारे में गिरावट के कारण बढ़ी ठंडक का असर आम जनजीवन पर पड़ा। लोग देर से उठे और ऑफिस भी देर से पहुंचे। सरकारी कार्यालयों में भी आम दिनों की अपेक्षा देर से कर्मचारी पहुंचे। जो लोग अब तक स्वेटर से काम चला रहे थे, अचानक ठंडक बढ़ने से उन्होंने जैकेट, टोपी और ग्लब्स भी निकाल लिए।
वैसे तो दिसंबर में कड़ाके की ठंड शुरू हो जाती है, मगर इस बार 14 दिसंबर तक ठंडक का वह स्वरूप नजर नहीं आ रहा था। लोग कयास लगा रहे थे कि इस बार कड़ाके की ठंडक जनवरी में पड़ेगी, मगर शाम होते होते मौसम का रुख बदला। सर्द हवाएं चलनी शुरू हो गईं।
रात होते-होते कड़ाके की ठंड पड़ने लगी। रात में कड़ाके की ठंड और कोहरे ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया। रात दस बजे के बाद से घना कुहरा पड़ने लगा। कुहरे के चलते वाहन चालकों को भी काफी मुश्किलें उठानी पड़ी।
नेशनल हाइवे पर घने कुहरे के कारण वाहन रेंगते हुए चल रहे थे। सुबह के समय भी कुहरे की चादर बनी रही। लोग वाहनों की हेड लाइटें जलाकर जैसे-तैसे चल रहे थे। सबसे अधिक दिक्कत स्कूली बच्चों को हो रही थी जिन्हें सुबह स्कूल जाना था। ठंड के कारण परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या काफी रही।
पारे में गिरावट के कारण बढ़ी ठंडक का असर आम जनजीवन पर पड़ा। लोग देर से उठे और ऑफिस भी देर से पहुंचे। सरकारी कार्यालयों में भी आम दिनों की अपेक्षा देर से कर्मचारी पहुंचे। जो लोग अब तक स्वेटर से काम चला रहे थे, अचानक ठंडक बढ़ने से उन्होंने जैकेट, टोपी और ग्लब्स भी निकाल लिए।