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ढाई दशक में महज तीन फीसदी जागरूक हुए

Tue, 28 Feb 2017 12:03 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती Updated Tue, 28 Feb 2017 12:03 AM IST
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three and a half decades just 3 per cent conscious
कप्तानगंज विधान सभा क्षेत्र मे सूना पड़ा नकटीदेई का मतदान केंद्र।
जिस वोट की ताकत से सरकारें बनती हैं और देश का भविष्य तय होता है उसके प्रति जनता कितनी जागरूक है। यह सोमवार को मतदान के बाद एक बार फिर सामने आ गया। विधान सभा चुनाव के पिछले ढाई दशक के सफर में इस बार महज तीन प्रतिशत ही मतदान का इजाफा हुआ। वर्ष 1996 में जिले में जहां 56 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकारी का प्रयोग किया था वहीं इस बार निर्वाचन आयोग से लगायत पूरे तंत्र के मत प्रतिशत बढ़ाने की कवायद के बावजूद तीन फीसदी ज्यादा करीब 59 फीसदी लोग बूथों पर पहुंचे। 
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मतदान के प्रति लोगों की रूचि जगाने के लिए पिछले एक साल से हर स्तर पर प्रयास हुआ। मतदाता जागरूकता रैली से लेकर अधिकारियों ने कॉलेजों में अभियान तक चलाए। डीएम, एसपी और सीडीओ सहित अन्य अफसर सड़क पर निकले। युवा मतदाता को रिझाने के लिए उनके बीच डिबेट तक कराए गए।  पिछले पांच विधानसभाओं के वोट प्रतिशत को देखे तो खुद ब खुद सच्चाई सामने आ जाएगी। 
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वर्ष 1996 के चुनाव में 56.39 फीसदी पोलिंग हुआ। पांच साल बाद जब वर्ष 2002 में चुनाव हुआ तो वोट प्रतिशत बढ़कर 56.93 हो गया यानि 0.54 फीसदी वोट बढ़ा। वर्ष 2007 के चुनाव में यह प्रतिशत बढ़कर 57.91 हो गया, यानि 0.98 फीसदी वोट ही बढ़ सका। वर्ष 2012 के चुनाव में कुल 58.15 वोट पड़े, इस तरह मात्र 0.24 फीसदी वोट बढ़ा।  2017 के चुनाव में लगभग 58.75 पोलिंग हुई, यानि इस बार वोट बढ़ने का प्रतिशत 0.60 फीसदी रहा। ऐसे में कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग के निर्देश पर शासन- प्रशासन की तमाम कवायद नाकाफी साबित हुई। 
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