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Basti News: दाैलत की बदाैलत गूंज रही शहनाई... आधुनिक रस्मों ने बिगाड़ दिया शादी का बजट
Fri, 14 Feb 2025 12:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 14 Feb 2025 12:28 AM IST
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वैवाहिक कार्यक्रम के लिए सजा परिसर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बिटिया का हाथ पीला करना मध्यम वर्गीय परिवार के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। नए-नए रस्म ने शादियों का खर्च बढ़ा दिया है। नोटों की गड्डियों के बूते ही आजकल शहनाई गूंज रही है। परिणय सूत्र में बंधने के भी अलग-अलग कोर्स हो गए हैं।
इसे पूरा करने में अभिभावक को पसीना छूट जा रहा है। शादी तय होने के बाद कन्या और वर पक्ष के बीच दिखावे के लिए नए-नए रस्म पूरे किए जा रहे हैं। इससे शादी का बजट डेढ़ से दोगुना बढ़ गया है।
भौतिकता की चकाचौंध में शादी-ब्याह का खर्च भी बढ़ गया है। दिखावे की होड़ में हर आयोजन महंगा होता जा रहा है। बैंड बाजे से लेकर कैटर्स, रोड लाइट, गाड़ियों के रेट भी बढ़ गए हैं। ढोल, पगड़ी, रैंप के चलन बढ़ गए हैं। इसके कारण शादियों का बजट डेढ़ गुना बढ़ गया है।
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महंगाई के बोझ तले निम्न एवं मध्यम वर्ग के लिए यह सब व्यवस्थित करने में काफी दिक्कतें आ रही है। शादी तय होने के बाद से ही खर्च का सिलसिला शुरू हो जाता है। पहला आयोजन रिंग सेरेमनी का हो रहा है। इसमें कन्या और वर पक्ष से परिवार और रिश्तेदार मिलाकर लगभग सौ लोगों की पार्टी होती है।
इस दौरान दूल्हे-दुल्हन कोे अंगूठी पहनाई का रस्म पूरा किया जाता है। इस दिन कन्या पक्ष वर पक्ष के लोगों की खातिरदारी करता है तो वर पक्ष के लोग लड़की की गोदभराई में किस्म-किस्म के उपहार आदि में अच्छा खासा बजट खर्च करते हैं।
होटल या मैरिज लॉन में यह आयोजन बजट के अनुसार डेढ़ से पांच लाख तक का खर्च करा रहा है। इसके बाद शादी और विदाई तक दोनों पक्ष पर खर्च का बोझ बढ़ता ही चला जा रहा है। जयपुरवा के राम लखन कहते हैं कि पहले शादी से संबंधित सभी तैयारियां घर में होती है। बाहर पुरुष वर्ग व्यवस्था संभालते रहे और अंदर महिलाएं रस्म पूरी करती रहीं। अब तो घर के अंदर का रस्म मैरिज हॉल और होटल में पहुंच गया है। इसलिए खर्च बढ़ना स्वाभाविक है।
एक सप्ताह पहले से ही शुरू हो रहा पार्लर कोर्स ःशादी को लेकर एक सप्ताह पहले से ही लड़की-लड़का दोनों का पार्लर कोर्स शुरू हो रहा है। इसमें अच्छा खासा बजट खर्च हो रहा है। सहालग के सीजन में मेंस और लेडीज पार्लर दोनों जगहों पर बुकिंग की होड़ मची हुई है।
एक शादी में लड़की सजाने के लिए जहां 10 से 25 हजार तक की बुकिंग हो रही है, वहीं मेंस पार्लर में भी 15 हजार तक की बुकिंग चल रही है। बुटिक बबिता ने बताया कि शादी में दुल्हन सजाने के लिए सबसे अच्छा पैकेज 25 हजार का है। इसमें एक बुटिक कर्मचारी आयोजन के दौरान मौजूद रहेगा।
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बस्ती। बिटिया का हाथ पीला करना मध्यम वर्गीय परिवार के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। नए-नए रस्म ने शादियों का खर्च बढ़ा दिया है। नोटों की गड्डियों के बूते ही आजकल शहनाई गूंज रही है। परिणय सूत्र में बंधने के भी अलग-अलग कोर्स हो गए हैं।
इसे पूरा करने में अभिभावक को पसीना छूट जा रहा है। शादी तय होने के बाद कन्या और वर पक्ष के बीच दिखावे के लिए नए-नए रस्म पूरे किए जा रहे हैं। इससे शादी का बजट डेढ़ से दोगुना बढ़ गया है।
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भौतिकता की चकाचौंध में शादी-ब्याह का खर्च भी बढ़ गया है। दिखावे की होड़ में हर आयोजन महंगा होता जा रहा है। बैंड बाजे से लेकर कैटर्स, रोड लाइट, गाड़ियों के रेट भी बढ़ गए हैं। ढोल, पगड़ी, रैंप के चलन बढ़ गए हैं। इसके कारण शादियों का बजट डेढ़ गुना बढ़ गया है।
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महंगाई के बोझ तले निम्न एवं मध्यम वर्ग के लिए यह सब व्यवस्थित करने में काफी दिक्कतें आ रही है। शादी तय होने के बाद से ही खर्च का सिलसिला शुरू हो जाता है। पहला आयोजन रिंग सेरेमनी का हो रहा है। इसमें कन्या और वर पक्ष से परिवार और रिश्तेदार मिलाकर लगभग सौ लोगों की पार्टी होती है।
इस दौरान दूल्हे-दुल्हन कोे अंगूठी पहनाई का रस्म पूरा किया जाता है। इस दिन कन्या पक्ष वर पक्ष के लोगों की खातिरदारी करता है तो वर पक्ष के लोग लड़की की गोदभराई में किस्म-किस्म के उपहार आदि में अच्छा खासा बजट खर्च करते हैं।
होटल या मैरिज लॉन में यह आयोजन बजट के अनुसार डेढ़ से पांच लाख तक का खर्च करा रहा है। इसके बाद शादी और विदाई तक दोनों पक्ष पर खर्च का बोझ बढ़ता ही चला जा रहा है। जयपुरवा के राम लखन कहते हैं कि पहले शादी से संबंधित सभी तैयारियां घर में होती है। बाहर पुरुष वर्ग व्यवस्था संभालते रहे और अंदर महिलाएं रस्म पूरी करती रहीं। अब तो घर के अंदर का रस्म मैरिज हॉल और होटल में पहुंच गया है। इसलिए खर्च बढ़ना स्वाभाविक है।
एक सप्ताह पहले से ही शुरू हो रहा पार्लर कोर्स ःशादी को लेकर एक सप्ताह पहले से ही लड़की-लड़का दोनों का पार्लर कोर्स शुरू हो रहा है। इसमें अच्छा खासा बजट खर्च हो रहा है। सहालग के सीजन में मेंस और लेडीज पार्लर दोनों जगहों पर बुकिंग की होड़ मची हुई है।
एक शादी में लड़की सजाने के लिए जहां 10 से 25 हजार तक की बुकिंग हो रही है, वहीं मेंस पार्लर में भी 15 हजार तक की बुकिंग चल रही है। बुटिक बबिता ने बताया कि शादी में दुल्हन सजाने के लिए सबसे अच्छा पैकेज 25 हजार का है। इसमें एक बुटिक कर्मचारी आयोजन के दौरान मौजूद रहेगा।
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