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जलस्तर घटा पर संकट बरकरार
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Wed, 03 Aug 2016 11:07 PM IST
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विक्रमजोत ब्लाक क्षेत्र कल्याणपुर मुख्य रास्ते पर भी भरा बाढ़ का पानी।
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घाघरा का जलस्तर बुधवार को 93. 000 मीटर पहुंच गया। इस तरह पिछले 24 घंटे में नदी के जल स्तर में सात सेमी की गिरावट आई है। नदी का जलस्तर कम होने से विभाग और प्रशासन ने राहत केे सांस ली है पर खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। अभी भी घाघरा खतरे के निशान 92.730 से 25 सेमी ऊपर बह रही है। नदी से सटे गांवों में कटान रूकने का नाम नही ले रही है। विभाग बंधे और स्पर को बचाने में लगा हुआ है। मगर बुनियादी और संसाधनों के अभाव में कटान रोकना तो दूर बांध व स्पर कि सुरक्षा नही कर पा रहे हैं। तटबंधों से सटे गांव कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक, पड़ाव, संदलपुर, बाघानाला सहित लगभग 12 गांवों में ग्रामीणों के दिन का चैन रातों की नींद हराम हो गई है।
गौरिया नयन के सामने लोलपुर बिक्रमजोत बांध के13 ठोकरों में से छह के नोज बह गए हैं। अपुष्ट जानकारी के मुताबिक विभाग बाढ़, बंधा और स्पर को बचाने के नाम पर अब तक सैकड़ों ट्रक बोल्डर गिरा चुका है, जिसमें अधिकतर बोल्डर धारा में विलीन हो गए। इसकी अगर कोई जांच भी करना चाहे तो नहीं कर सकता है। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग का कहना है कि लगता है विभाग बाढ़ आने का इंतजार करता है। बाढ़ के बहाने विभाग इतना धन व्यय कर देता है कि उससे पूरी नदी को पाटी जा सकती है। ठोकर नंबर सात व आठ के बीच का बांध का एक हिस्सा कट गया है जिसे डीएम दौरे के पहले ठीक कर लिया गया था मगर प्रशासन गांव वालों में भरोसा नही जगा पाया। गांव वालों को विभाग और प्रशासन से कम और भगवान पर अधिक भरोसा है।
गौरिया नयन गांव के प्रधान ईश्वरदीन मौर्य का कहना है कि खेतों का दो हिस्सा कटान में चला गया हैं गांव के लोग दूसरे शहर जाकर नौकरी पर मजबूर है। जिन लोगों ने दुधारू जानवर पाल रखा हैं उनके सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है। महिलाएं दूरदराज गांव से तो पुरुष नदी पार से हरा चारा काटकर ला रहे हैं।
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कल्याणपुर के प्रधान संजय यादव ने बताया कि सात गांवों की ग्राम पंचायत में पहले से ही चार गांव नदी के आगोश में समा चुके है, बाकी बचे गांवों के लोगों के होश उड़ गए हैं। कई लोग घर का सामान ढोकर दूसरी जगह जाने लगे है । बाढ़ विभाग केवल तीन ठोकर बनाकर गांव बचाने का दिखावा कर रहा है। गांव में बीमारी फैली हैं, कोई डॉक्टर अभी तक यहां नहीं पहुंचा।
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गौरिया नयन के सामने लोलपुर बिक्रमजोत बांध के13 ठोकरों में से छह के नोज बह गए हैं। अपुष्ट जानकारी के मुताबिक विभाग बाढ़, बंधा और स्पर को बचाने के नाम पर अब तक सैकड़ों ट्रक बोल्डर गिरा चुका है, जिसमें अधिकतर बोल्डर धारा में विलीन हो गए। इसकी अगर कोई जांच भी करना चाहे तो नहीं कर सकता है। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग का कहना है कि लगता है विभाग बाढ़ आने का इंतजार करता है। बाढ़ के बहाने विभाग इतना धन व्यय कर देता है कि उससे पूरी नदी को पाटी जा सकती है। ठोकर नंबर सात व आठ के बीच का बांध का एक हिस्सा कट गया है जिसे डीएम दौरे के पहले ठीक कर लिया गया था मगर प्रशासन गांव वालों में भरोसा नही जगा पाया। गांव वालों को विभाग और प्रशासन से कम और भगवान पर अधिक भरोसा है।
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गौरिया नयन गांव के प्रधान ईश्वरदीन मौर्य का कहना है कि खेतों का दो हिस्सा कटान में चला गया हैं गांव के लोग दूसरे शहर जाकर नौकरी पर मजबूर है। जिन लोगों ने दुधारू जानवर पाल रखा हैं उनके सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है। महिलाएं दूरदराज गांव से तो पुरुष नदी पार से हरा चारा काटकर ला रहे हैं।
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कल्याणपुर के प्रधान संजय यादव ने बताया कि सात गांवों की ग्राम पंचायत में पहले से ही चार गांव नदी के आगोश में समा चुके है, बाकी बचे गांवों के लोगों के होश उड़ गए हैं। कई लोग घर का सामान ढोकर दूसरी जगह जाने लगे है । बाढ़ विभाग केवल तीन ठोकर बनाकर गांव बचाने का दिखावा कर रहा है। गांव में बीमारी फैली हैं, कोई डॉक्टर अभी तक यहां नहीं पहुंचा।