{"_id":"66a6b214f43a864d39017654","slug":"the-municipality-is-staring-at-the-budget-of-strangers-its-treasury-is-empty-basti-news-c-207-1-bst1001-121220-2024-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: नगर पालिका निहार रही गैरों का बजट... अपना कोष खाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: नगर पालिका निहार रही गैरों का बजट... अपना कोष खाली
Mon, 29 Jul 2024 02:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 29 Jul 2024 02:33 AM IST
विज्ञापन
ढाई साल बीत गए, छिटपुट कार्यों के लिए भी बजट नहीं जुटा पा रही पालिका
सभासद और चेयरमैन दूसरी संस्थाओं के बजट पर हुए निर्भर, विकास कार्य ठप
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले की इकलौती नगर पालिका धनाभाव से उबर नहीं पा रही है। ढाई वर्ष से पालिका का कोष खाली है। बड़ी परियोजनाएं अटक गई हैं। छिटपुट विकास कार्य भी हो पाना कठिन हो गया है। अब तो पालिका गैरों का बजट निहारने लगी है। सभासद से लेकर चेयरमैन तक जनप्रतिनिधियों और अन्य निर्माण संस्थाओं से विकास कार्यों के लिए बजट मांगते फिर रहे हैं। इधर वार्डों में दुश्वारियां बढ़ती जा रहीं हैं।
निकाय चुनाव के बाद उम्मीद थी नगर पालिका पहले से समृद्धि बनेगी। मगर, हुआ इसका उलटा। ढाई वर्ष बीतने को है पालिका दिन-ब-दिन कंगाल होती जा रही है। रूटीन बजट के सिवाय पालिका के हाथ कुछ खास नहीं लग सका। गली-मोहल्लों से लेकर प्रमुख सड़क और नाली-नालों की दशा बिगड़ चुकी है। इनके पुनर्निर्माण को कौन कहें, मरम्मत कराने की भी व्यवस्था पालिका के पास नहीं है।
विकास कार्यों की 20 से अधिक फाइलें धनाभाव में डंप पड़ी है। शासन से पांचवें राज्य वित्त आयोग के मद में मिलने वाला धन कर्मचारियों के तनख्वाह और पेंशन भर का ही नहीं है। इसकी कमी कभी-कभी बोर्ड फंड से पूरी करनी पड़ रही है। ऊपर से कर्ज में डूबी पालिका को प्रतिमाह 30- 35 लाख रुपये ऋण का किस्त भी चुकता करना होता है। प्रत्येक माह पांचवें राज्य वित्त आयोग से मिलने वाला धन भी डेढ़ से दो करोड़ की सीमा में है। जबकि पालिका का खर्च इससे कहीं ज्यादा है।
विज्ञापन
केवल कर्मचारियों और पेंशनराें के प्रतिमाह देयक का खर्च 2.15 लाख रुपये है। इसके अलावा प्रतिमाह कूड़ा वाहनों के लिए डीजल खर्च दस लाख रुपये और ऋण अदायगी का 35 लाख रुपये प्रतिमाह अलग से भार है। शेष धनराशि में विकास कार्य और तनख्वाह, पेंशन का भुगतान देना होता है। ऐसे में हर माह राज्य वित्त आयोग के मद में प्राप्त धन से अपना खर्च पूरा करने की उधेड़बुन में पालिका रह जा रही है।
...
धनाभाव के चलते सभासदों की नाराजगी आई सामने
पिछले दिनों नगर पालिका बोर्ड की बैठक काफी मान-मनव्वल के बाद दूसरे प्रयास में हो पाई। जुलाई में पहली बार प्रस्तावित बैठक का सभासदों ने बहिष्कार कर दिया था। उनका कहना था था कि पालिका की तरफ से शहर के नालों की सफाई नहीं कराई गई है। विकास कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं। जनता के सवालों का जवाब सभासदों से देते नहीं बन रहा है। दूसरे प्रयास में किसी तरह सभासद बैठक के लिए राजी हुए तो इस बार धनाभाव का दर्द छलक उठा। बैठक में मौजूद एमएलसी सुभाष यदुवंश से सभासदों के एक समूह ने धन उपलब्ध कराने की मांग भी की।
..
सड़क निर्माण के लिए डीएम से मिलीं चेयरमैन
एक दिन पहले नगर पालिका अध्यक्ष नेहा वर्मा पति अंकुर वर्मा के साथ डीएम रवीश गुप्ता से मुलाकात की। उन्होंने नगर पालिका की खस्ताहाल सड़क मालवीय मार्ग के निर्माण के लिए लिखित पत्रक सौंपा है। इसमें मांग उठाई कि इस सड़क का निर्माण बीडीए से कराया जाए। इससे साफ जाहिर है कि पालिका के पास इतना भी बजट नहीं कि अपने क्षेत्र की सड़कों की मरम्मत करा सकें।
...
नालों की सफाई के लिए नहीं हो पाया टेंडर
मानसून आने से पहले शहर के नालों की सफाई के लिए पालिका ने टेंडर नहीं निकाला। धनाभाव इसमें भी कारण बना। सभासदों के विरोध करने के बाद पालिका खुद के संसाधन से कुछ जगहों पर नालों की सफाई अब जाकर करा पाई है। इसी तरह ठंड के मौसम में धनाभाव के चलते अलाव की व्यवस्था भी नहीं बन पाई थी।
...
कूड़ा वाहन भी नहीं खरीद पा रही पालिका
नगर पालिका के पास कूड़ा वाहनों की कमी है। 25 वार्डों की गलियों और मोहल्लों में कूड़ा ढोने के लिए 17 मैजिक और 10 पुराने टेंपो हैं। इसमें से आधा दर्जन वाहन कबाड़ होने के कगार पर हैं तो कुछ हो चुके हैं। जबकि वार्डों का विस्तार हो जाने से प्रति वार्ड में दो कूड़ा ढोने वाले छोटे वाहन की जरूरत है। तीन साल से नगर पालिका एक भी नए वाहन की खरीदारी नहीं कर सकी है। इससे वार्डों में कई-कई दिनों तक कूड़े का ढेर लगा रहता है। इसके अलावा तीन ट्रक, तीन जेसीबी, एक डंपर और 6 ट्रैक्टर-ट्राॅली हैं। मगर, यह भी नाकाफी हैं।
...
सेवानिवृत्त कर्मचारियों का देयक भी फंसा
नगर पालिका से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों का विभिन्न तरह का देयक फंसा हुआ है। धन की कमी के चलते पालिका शत-प्रतिशत देयक का भुगतान नहीं कर पा रही है। विवश होकर सेवानिवृत्त कर्मचारी न्यायालयों का शरण ले रहे हैं।
..
बिगड़ती जा रही पार्कों की दशा
शहर में बनाए गए पार्कों का भी खेवनहार कोई नहीं रह गया है। कुछ हद तक कटेश्वर पार्क ठीक है, मगर रखरखाव के अभाव में यह भी बदरंग हो चला है। अमहट घाट के पास विकसित किया जा रहा पार्क मझधार में ही ठप हो गया। यहां चहारदीवारी निर्माण के बाद कोई कार्य नहीं हो सका। इसके अलावा आवास विकास, शिवा काॅलोनी में बनाए गए पार्क का भी देखरेख नहीं हो पा रहा है।
...
कोट
नगर पालिका को उबारने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। सीमित बजट में जितना हो पा रहा उतना कार्य कराया जा रहा है। बजट की डिमांड शासन से लगातार की जा रही है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री से भी मिला गया है। मालवीय मार्ग का निर्माण बीडीए से कराने की मांंग की गई है। हमारा लक्ष्य हैं कि जनता की समस्या दूर होनी चाहिए।
-नेहा वर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद
विज्ञापन
सभासद और चेयरमैन दूसरी संस्थाओं के बजट पर हुए निर्भर, विकास कार्य ठप
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले की इकलौती नगर पालिका धनाभाव से उबर नहीं पा रही है। ढाई वर्ष से पालिका का कोष खाली है। बड़ी परियोजनाएं अटक गई हैं। छिटपुट विकास कार्य भी हो पाना कठिन हो गया है। अब तो पालिका गैरों का बजट निहारने लगी है। सभासद से लेकर चेयरमैन तक जनप्रतिनिधियों और अन्य निर्माण संस्थाओं से विकास कार्यों के लिए बजट मांगते फिर रहे हैं। इधर वार्डों में दुश्वारियां बढ़ती जा रहीं हैं।
निकाय चुनाव के बाद उम्मीद थी नगर पालिका पहले से समृद्धि बनेगी। मगर, हुआ इसका उलटा। ढाई वर्ष बीतने को है पालिका दिन-ब-दिन कंगाल होती जा रही है। रूटीन बजट के सिवाय पालिका के हाथ कुछ खास नहीं लग सका। गली-मोहल्लों से लेकर प्रमुख सड़क और नाली-नालों की दशा बिगड़ चुकी है। इनके पुनर्निर्माण को कौन कहें, मरम्मत कराने की भी व्यवस्था पालिका के पास नहीं है।
विज्ञापन
विकास कार्यों की 20 से अधिक फाइलें धनाभाव में डंप पड़ी है। शासन से पांचवें राज्य वित्त आयोग के मद में मिलने वाला धन कर्मचारियों के तनख्वाह और पेंशन भर का ही नहीं है। इसकी कमी कभी-कभी बोर्ड फंड से पूरी करनी पड़ रही है। ऊपर से कर्ज में डूबी पालिका को प्रतिमाह 30- 35 लाख रुपये ऋण का किस्त भी चुकता करना होता है। प्रत्येक माह पांचवें राज्य वित्त आयोग से मिलने वाला धन भी डेढ़ से दो करोड़ की सीमा में है। जबकि पालिका का खर्च इससे कहीं ज्यादा है।
विज्ञापन
केवल कर्मचारियों और पेंशनराें के प्रतिमाह देयक का खर्च 2.15 लाख रुपये है। इसके अलावा प्रतिमाह कूड़ा वाहनों के लिए डीजल खर्च दस लाख रुपये और ऋण अदायगी का 35 लाख रुपये प्रतिमाह अलग से भार है। शेष धनराशि में विकास कार्य और तनख्वाह, पेंशन का भुगतान देना होता है। ऐसे में हर माह राज्य वित्त आयोग के मद में प्राप्त धन से अपना खर्च पूरा करने की उधेड़बुन में पालिका रह जा रही है।
...
धनाभाव के चलते सभासदों की नाराजगी आई सामने
पिछले दिनों नगर पालिका बोर्ड की बैठक काफी मान-मनव्वल के बाद दूसरे प्रयास में हो पाई। जुलाई में पहली बार प्रस्तावित बैठक का सभासदों ने बहिष्कार कर दिया था। उनका कहना था था कि पालिका की तरफ से शहर के नालों की सफाई नहीं कराई गई है। विकास कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं। जनता के सवालों का जवाब सभासदों से देते नहीं बन रहा है। दूसरे प्रयास में किसी तरह सभासद बैठक के लिए राजी हुए तो इस बार धनाभाव का दर्द छलक उठा। बैठक में मौजूद एमएलसी सुभाष यदुवंश से सभासदों के एक समूह ने धन उपलब्ध कराने की मांग भी की।
..
सड़क निर्माण के लिए डीएम से मिलीं चेयरमैन
एक दिन पहले नगर पालिका अध्यक्ष नेहा वर्मा पति अंकुर वर्मा के साथ डीएम रवीश गुप्ता से मुलाकात की। उन्होंने नगर पालिका की खस्ताहाल सड़क मालवीय मार्ग के निर्माण के लिए लिखित पत्रक सौंपा है। इसमें मांग उठाई कि इस सड़क का निर्माण बीडीए से कराया जाए। इससे साफ जाहिर है कि पालिका के पास इतना भी बजट नहीं कि अपने क्षेत्र की सड़कों की मरम्मत करा सकें।
...
नालों की सफाई के लिए नहीं हो पाया टेंडर
मानसून आने से पहले शहर के नालों की सफाई के लिए पालिका ने टेंडर नहीं निकाला। धनाभाव इसमें भी कारण बना। सभासदों के विरोध करने के बाद पालिका खुद के संसाधन से कुछ जगहों पर नालों की सफाई अब जाकर करा पाई है। इसी तरह ठंड के मौसम में धनाभाव के चलते अलाव की व्यवस्था भी नहीं बन पाई थी।
...
कूड़ा वाहन भी नहीं खरीद पा रही पालिका
नगर पालिका के पास कूड़ा वाहनों की कमी है। 25 वार्डों की गलियों और मोहल्लों में कूड़ा ढोने के लिए 17 मैजिक और 10 पुराने टेंपो हैं। इसमें से आधा दर्जन वाहन कबाड़ होने के कगार पर हैं तो कुछ हो चुके हैं। जबकि वार्डों का विस्तार हो जाने से प्रति वार्ड में दो कूड़ा ढोने वाले छोटे वाहन की जरूरत है। तीन साल से नगर पालिका एक भी नए वाहन की खरीदारी नहीं कर सकी है। इससे वार्डों में कई-कई दिनों तक कूड़े का ढेर लगा रहता है। इसके अलावा तीन ट्रक, तीन जेसीबी, एक डंपर और 6 ट्रैक्टर-ट्राॅली हैं। मगर, यह भी नाकाफी हैं।
...
सेवानिवृत्त कर्मचारियों का देयक भी फंसा
नगर पालिका से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों का विभिन्न तरह का देयक फंसा हुआ है। धन की कमी के चलते पालिका शत-प्रतिशत देयक का भुगतान नहीं कर पा रही है। विवश होकर सेवानिवृत्त कर्मचारी न्यायालयों का शरण ले रहे हैं।
..
बिगड़ती जा रही पार्कों की दशा
शहर में बनाए गए पार्कों का भी खेवनहार कोई नहीं रह गया है। कुछ हद तक कटेश्वर पार्क ठीक है, मगर रखरखाव के अभाव में यह भी बदरंग हो चला है। अमहट घाट के पास विकसित किया जा रहा पार्क मझधार में ही ठप हो गया। यहां चहारदीवारी निर्माण के बाद कोई कार्य नहीं हो सका। इसके अलावा आवास विकास, शिवा काॅलोनी में बनाए गए पार्क का भी देखरेख नहीं हो पा रहा है।
...
कोट
नगर पालिका को उबारने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। सीमित बजट में जितना हो पा रहा उतना कार्य कराया जा रहा है। बजट की डिमांड शासन से लगातार की जा रही है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री से भी मिला गया है। मालवीय मार्ग का निर्माण बीडीए से कराने की मांंग की गई है। हमारा लक्ष्य हैं कि जनता की समस्या दूर होनी चाहिए।
-नेहा वर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद