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Basti News: टोल ले रहे पूरा... सुविधाओं का अकाल
Sat, 29 Jun 2024 01:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 29 Jun 2024 01:40 AM IST
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यात्रियों को नहीं मिल रही जरूरी सुविधाएं, शौचालयों में गंदगी
एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे जिम्मेदार, टोल प्लाजा पर पानी के लाले
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में एक लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन और दूसरा लुंबिनी-दुद्धी टू-लेन हाईवे पर तीन टोल प्लाजा हैं। यहां यात्री सुविधाओं में कटौती की जा रही है। भीषण गर्मी में अधिकतर टोल प्लाजा पर पीने के लिए पानी तक के लाले पड़े हैं। शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है। समय बिताने के लिए छायादार जगह की व्यवस्था नहीं है। इससे अनुमानित एक लाख यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जबकि तीनों टोल प्लाजा पर मिलाकर 24 घंटे के दौरान औसतन 50 से 55 लाख रुपये की वसूली हो रही है।
लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन पर 40 किमी के दायरे में दो टोल प्लाजा हैं। छावनी क्षेत्र के चौकड़ी और कोतवाली क्षेत्र के मड़वानगर में टोल है। इस हाईवे से 24 घंटे के दौरान 10 से 12 हजार वाहन गुजरते हैं। यहां यात्रियों का भार अनुमानित एक लाख है। इन वाहनों से दोनों टोल पर औसतन 50 लाख की वसूली हो रही है। लुंबिनी-दुद्धी मार्ग स्थित टोल से करीब दो हजार वाहन गुजर रहे हैं। यहां 24 घंटे के दौरान औसतन दो लाख की वसूली हो रही है।
इतने के बाद भी यात्री सुविधाओं में कटौती की जा रही है। जबकि टोल वसूली की व्यवस्था में कोई कसर नहीं है। चालक एवं यात्रियों के लिए पीने के लिए पानी तक की सुविधा नहीं है। शुरुआत में शौचालय, कैंटीन, वाटर कूलर की जो व्यवस्था बनी, उसका रखरखाव नहीं हो पा रहा है। शौचालयों में गंदगी पसरी हुई है। कैंटीन में भी कुछ खास सुविधा नहीं है। टोल कंपनी के अधिकारी एनएचएआई को जिम्मेदार ठहराकर अपनी जवाबदेही से बच रहे हैं एनएचएआई का स्थानीय स्तर पर कोई कार्यालय ही नहीं है, जिससे यात्री सुविधाओं की नियमित निगरानी हो सकें।
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मड़वानगर टोल प्लाजा : पानी की सुविधा न ठहरने का ठौर
मड़वानगर टोल प्लाजा यात्रियों का हब बन गया है। लखनऊ, बिहार, दिल्ली, मुंबई तक की यात्रा करने वाले लोकल लोग यहां रूककर एसी कोच बसों का इंतजार करते हैं। करीब दस हजार लोकल यात्री प्रतिदिन यहां से महानगरों के लिए बस पकड़ते हैं। इसके अलावा 10 से 12 हजार वाहनों से एक लाख यात्री गुजरते हैं। यात्रियों की चहल-पहल यहां हर समय बनी रहती है। टोल वसूली का औसत प्रतिदिन 20 से 25 लाख रुपये है। मगर, चालक और यात्रियों के लिए सुविधाएं कुछ खास नहीं है। टोल प्लाजा के दोनों तरफ डेढ़ दशक पहले बना शौचालय रखरखाव के अभाव में दम तोड़ रहा है। कैंटीन के बाहर यात्रियों के खड़े होने के लिए छाजन तक के इंतजाम नहीं है। पानी के लिए लगे केबिन में कर्मचारियों का कपड़ा एवं सामान भरा है। टोटियां टूटी पड़ीं हैं। टोल कार्यालय भवन के बाहर वाटर कूलर खराब पड़ा है। प्यास बुझाने के लिए यात्रियों को बोतल बंद पानी का सहारा लेना पड़ रहा है।
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चौकड़ी टोल प्लाजा : शौचालय-पानी की सुविधा नहीं
चौकड़ी टोल प्लाजा की भी स्थिति खराब है। यहां से भी 10 से 12 हजार वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं। इनसे 20 से 25 लाख रुपये की औसत वसूली हो रही है। सुबह-शाम लोकल यात्री भी यहां आकर बसों का इंतजार करते हैं। बावजूद इसके दोनों तरफ बने शौचालयों की हालत दयनीय है। नियमित सफाई न होने से गंदगी का अंबार है। भीषण गर्मी में पीने के लिए पानी तक की सुविधा नहीं है। यहां अक्सर यांत्रिक खराबी के कारण किसी न किसी टोल लेन में जाम लग रहा है। आने-जाने वाले यात्री परेशान हो रहे हैं। महिला यात्रियों को टोल पर रुकने के दौरान ज्यादा समस्या उठानी पड़ रही है।
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खड़ौआ टोल प्लाजा : सुविधाएं नदारद, सिर्फ दिखावा
लुंबिनी-दुद्धी मार्ग स्थित खड़ौआ टोल प्लाजा की दशा सबसे दयनीय है। यहां औसतन 2000 वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं। इनसे अनुमानित दो लाख रुपये की वसूली हो रही है। सुविधाएं कुछ भी नहीं है। यात्रियों के लिए शौचालय बनाया गया है। मगर, वहां तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। पीने के लिए पानी का इंतजाम नहीं है। यात्रियों के रुकने के लिए छाजन की व्यवस्था नहीं है। टोल मैनेजर आशुतोष उपाध्याय ने बताया कि लोकल गाड़ियों से टोल वसूली नहीं हो पा रही है। जबकि उन्हें प्रतिमाह केवल 30 से 40 रुपये देना होता है। जहां तक सुविधाओं की बात है तो इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। पेट्रोलिंग और एंबुलेंस की व्यवस्था बनाई गई है।
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कोट
-वाटर कूलर खराब है। इसे जल्द ठीक कराया जाएगा। शौचालय, सड़क आदि के मरम्मत का कार्य एनएचएआई का है। टोल कंपनी की जिम्मेदारी नहीं है।
विनय मिश्रा, प्रबंधक, टोल प्लाजा फोरलेन
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पेट्रोलिंग का कार्य निरंतर किया जाता है। यात्रियों को जहां असुविधा होती है, तत्काल उनकी मदद की जाती है। कहीं सड़क क्षतिग्रस्त है या अन्य कोई अवरोध सामने आता है तो इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी जाती है। आम यात्री भी 1033 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
-अंबरीश, पेट्रोलिंग प्रभारी, मड़वानगर
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एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे जिम्मेदार, टोल प्लाजा पर पानी के लाले
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में एक लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन और दूसरा लुंबिनी-दुद्धी टू-लेन हाईवे पर तीन टोल प्लाजा हैं। यहां यात्री सुविधाओं में कटौती की जा रही है। भीषण गर्मी में अधिकतर टोल प्लाजा पर पीने के लिए पानी तक के लाले पड़े हैं। शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है। समय बिताने के लिए छायादार जगह की व्यवस्था नहीं है। इससे अनुमानित एक लाख यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जबकि तीनों टोल प्लाजा पर मिलाकर 24 घंटे के दौरान औसतन 50 से 55 लाख रुपये की वसूली हो रही है।
लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन पर 40 किमी के दायरे में दो टोल प्लाजा हैं। छावनी क्षेत्र के चौकड़ी और कोतवाली क्षेत्र के मड़वानगर में टोल है। इस हाईवे से 24 घंटे के दौरान 10 से 12 हजार वाहन गुजरते हैं। यहां यात्रियों का भार अनुमानित एक लाख है। इन वाहनों से दोनों टोल पर औसतन 50 लाख की वसूली हो रही है। लुंबिनी-दुद्धी मार्ग स्थित टोल से करीब दो हजार वाहन गुजर रहे हैं। यहां 24 घंटे के दौरान औसतन दो लाख की वसूली हो रही है।
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इतने के बाद भी यात्री सुविधाओं में कटौती की जा रही है। जबकि टोल वसूली की व्यवस्था में कोई कसर नहीं है। चालक एवं यात्रियों के लिए पीने के लिए पानी तक की सुविधा नहीं है। शुरुआत में शौचालय, कैंटीन, वाटर कूलर की जो व्यवस्था बनी, उसका रखरखाव नहीं हो पा रहा है। शौचालयों में गंदगी पसरी हुई है। कैंटीन में भी कुछ खास सुविधा नहीं है। टोल कंपनी के अधिकारी एनएचएआई को जिम्मेदार ठहराकर अपनी जवाबदेही से बच रहे हैं एनएचएआई का स्थानीय स्तर पर कोई कार्यालय ही नहीं है, जिससे यात्री सुविधाओं की नियमित निगरानी हो सकें।
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मड़वानगर टोल प्लाजा : पानी की सुविधा न ठहरने का ठौर
मड़वानगर टोल प्लाजा यात्रियों का हब बन गया है। लखनऊ, बिहार, दिल्ली, मुंबई तक की यात्रा करने वाले लोकल लोग यहां रूककर एसी कोच बसों का इंतजार करते हैं। करीब दस हजार लोकल यात्री प्रतिदिन यहां से महानगरों के लिए बस पकड़ते हैं। इसके अलावा 10 से 12 हजार वाहनों से एक लाख यात्री गुजरते हैं। यात्रियों की चहल-पहल यहां हर समय बनी रहती है। टोल वसूली का औसत प्रतिदिन 20 से 25 लाख रुपये है। मगर, चालक और यात्रियों के लिए सुविधाएं कुछ खास नहीं है। टोल प्लाजा के दोनों तरफ डेढ़ दशक पहले बना शौचालय रखरखाव के अभाव में दम तोड़ रहा है। कैंटीन के बाहर यात्रियों के खड़े होने के लिए छाजन तक के इंतजाम नहीं है। पानी के लिए लगे केबिन में कर्मचारियों का कपड़ा एवं सामान भरा है। टोटियां टूटी पड़ीं हैं। टोल कार्यालय भवन के बाहर वाटर कूलर खराब पड़ा है। प्यास बुझाने के लिए यात्रियों को बोतल बंद पानी का सहारा लेना पड़ रहा है।
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चौकड़ी टोल प्लाजा : शौचालय-पानी की सुविधा नहीं
चौकड़ी टोल प्लाजा की भी स्थिति खराब है। यहां से भी 10 से 12 हजार वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं। इनसे 20 से 25 लाख रुपये की औसत वसूली हो रही है। सुबह-शाम लोकल यात्री भी यहां आकर बसों का इंतजार करते हैं। बावजूद इसके दोनों तरफ बने शौचालयों की हालत दयनीय है। नियमित सफाई न होने से गंदगी का अंबार है। भीषण गर्मी में पीने के लिए पानी तक की सुविधा नहीं है। यहां अक्सर यांत्रिक खराबी के कारण किसी न किसी टोल लेन में जाम लग रहा है। आने-जाने वाले यात्री परेशान हो रहे हैं। महिला यात्रियों को टोल पर रुकने के दौरान ज्यादा समस्या उठानी पड़ रही है।
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खड़ौआ टोल प्लाजा : सुविधाएं नदारद, सिर्फ दिखावा
लुंबिनी-दुद्धी मार्ग स्थित खड़ौआ टोल प्लाजा की दशा सबसे दयनीय है। यहां औसतन 2000 वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं। इनसे अनुमानित दो लाख रुपये की वसूली हो रही है। सुविधाएं कुछ भी नहीं है। यात्रियों के लिए शौचालय बनाया गया है। मगर, वहां तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। पीने के लिए पानी का इंतजाम नहीं है। यात्रियों के रुकने के लिए छाजन की व्यवस्था नहीं है। टोल मैनेजर आशुतोष उपाध्याय ने बताया कि लोकल गाड़ियों से टोल वसूली नहीं हो पा रही है। जबकि उन्हें प्रतिमाह केवल 30 से 40 रुपये देना होता है। जहां तक सुविधाओं की बात है तो इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। पेट्रोलिंग और एंबुलेंस की व्यवस्था बनाई गई है।
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कोट
-वाटर कूलर खराब है। इसे जल्द ठीक कराया जाएगा। शौचालय, सड़क आदि के मरम्मत का कार्य एनएचएआई का है। टोल कंपनी की जिम्मेदारी नहीं है।
विनय मिश्रा, प्रबंधक, टोल प्लाजा फोरलेन
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पेट्रोलिंग का कार्य निरंतर किया जाता है। यात्रियों को जहां असुविधा होती है, तत्काल उनकी मदद की जाती है। कहीं सड़क क्षतिग्रस्त है या अन्य कोई अवरोध सामने आता है तो इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी जाती है। आम यात्री भी 1033 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
-अंबरीश, पेट्रोलिंग प्रभारी, मड़वानगर