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Basti News: क्रेता-विक्रेता के आधार का बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद होगा बैनामा
Fri, 01 Dec 2023 11:20 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 01 Dec 2023 11:20 PM IST
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काश्तकार की जगह दूसरे को खड़ा करके नहीं करा पाएंगे रजिस्ट्री
नए वर्ष से यह व्यवस्था लागू करने की तैयारी
बस्ती। जमीनों की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए निबंधन विभाग बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब क्रेता-विक्रेता के फिंगर प्रिंट का उनके आधार कार्ड के डाटा में फीड फिंगर प्रिंट से मिलान किया जाएगा। दोनों फिंगर प्रिंट एक जैसे मिलने पर ही जमीन की रजिस्ट्री होगी। अंतर मिलने पर रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। इसके लिए रजिस्ट्रार कार्यालयों में नई बॉयोमीट्रिक मशीनें लगाईं जाएंगी। नए साल से यह सुविधा शुरू हो सकती है।
जिले के सदर सहित चार रजिस्ट्री कार्यालयों में एक माह में करीब तीन हजार जमीनों की रजिस्ट्री होती है। रजिस्ट्री में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने आधार डाटा से सत्यापन कराना अनिवार्य कर दिया है। अब तक रजिस्ट्रार कार्यालयों में बॉयोमीट्रिक मशीन से क्रेता-विक्रेता के अंगूठे व अंगुलियों के निशान लिए जाते हैं, लेकिन इसका आधार डाटा से मिलान नहीं किया जाता है। इस कारण फर्जीवाड़ा भी होता है।
नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रार कार्यालयों में रजिस्ट्री का सॉफ्टवेयर डिजिटल रूप से आधार से लिंकअप किया गया है। अब जमीन के दस्तावेजों में आधार कार्ड की जानकारी तो देनी ही होगी, साथ ही, अंगुलियों के निशान लेकर इसका आधार डाटा से सत्यापन किया जाएगा।
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उल्लेखनीय है कि आधार सत्यापन की नई व्यवस्था लागू होने से पहले अक्सर शिकायतें आती रहती है कि फर्जीवाड़ा कर जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई। क्रेता के मरने के बाद मामला सामने आता था। उस समय जमीन मालिक कौन है, इसे साबित करना मुश्किल हो जाता था। अब नई व्यवस्था से फर्जीवाड़े पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
ये होंगे फायदे
-कोई विक्रेता एक ही जमीन को फर्जीवाड़ा कर दो बार नहीं बेच सकेगा।
-आधार डाटा से रजिस्ट्री के लिंकअप होने से जब चाहे आधार कार्ड के डाटा से जमीन की जानकारी की जा सकेगी।
-बेनामी जमीनों की बिक्री भी रुक जाएगी।
जमीन के फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। अब रजिस्ट्री की प्रक्रिया आधार कार्ड से अटैच हो जाएगी। लखनऊ स्थित निबंधन विभाग के सर्वर से इसे जोड़ा जा रहा है। अभी अलीगढ़ और मेरठ में इसका ट्रायल चल रहा है। नए साल से यहां भी सुविधा शुरू हो सकती है।
-धर्मेंद्र सिंह, उप निबंधक
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नए वर्ष से यह व्यवस्था लागू करने की तैयारी
बस्ती। जमीनों की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए निबंधन विभाग बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब क्रेता-विक्रेता के फिंगर प्रिंट का उनके आधार कार्ड के डाटा में फीड फिंगर प्रिंट से मिलान किया जाएगा। दोनों फिंगर प्रिंट एक जैसे मिलने पर ही जमीन की रजिस्ट्री होगी। अंतर मिलने पर रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। इसके लिए रजिस्ट्रार कार्यालयों में नई बॉयोमीट्रिक मशीनें लगाईं जाएंगी। नए साल से यह सुविधा शुरू हो सकती है।
जिले के सदर सहित चार रजिस्ट्री कार्यालयों में एक माह में करीब तीन हजार जमीनों की रजिस्ट्री होती है। रजिस्ट्री में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने आधार डाटा से सत्यापन कराना अनिवार्य कर दिया है। अब तक रजिस्ट्रार कार्यालयों में बॉयोमीट्रिक मशीन से क्रेता-विक्रेता के अंगूठे व अंगुलियों के निशान लिए जाते हैं, लेकिन इसका आधार डाटा से मिलान नहीं किया जाता है। इस कारण फर्जीवाड़ा भी होता है।
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नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रार कार्यालयों में रजिस्ट्री का सॉफ्टवेयर डिजिटल रूप से आधार से लिंकअप किया गया है। अब जमीन के दस्तावेजों में आधार कार्ड की जानकारी तो देनी ही होगी, साथ ही, अंगुलियों के निशान लेकर इसका आधार डाटा से सत्यापन किया जाएगा।
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उल्लेखनीय है कि आधार सत्यापन की नई व्यवस्था लागू होने से पहले अक्सर शिकायतें आती रहती है कि फर्जीवाड़ा कर जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई। क्रेता के मरने के बाद मामला सामने आता था। उस समय जमीन मालिक कौन है, इसे साबित करना मुश्किल हो जाता था। अब नई व्यवस्था से फर्जीवाड़े पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
ये होंगे फायदे
-कोई विक्रेता एक ही जमीन को फर्जीवाड़ा कर दो बार नहीं बेच सकेगा।
-आधार डाटा से रजिस्ट्री के लिंकअप होने से जब चाहे आधार कार्ड के डाटा से जमीन की जानकारी की जा सकेगी।
-बेनामी जमीनों की बिक्री भी रुक जाएगी।
जमीन के फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। अब रजिस्ट्री की प्रक्रिया आधार कार्ड से अटैच हो जाएगी। लखनऊ स्थित निबंधन विभाग के सर्वर से इसे जोड़ा जा रहा है। अभी अलीगढ़ और मेरठ में इसका ट्रायल चल रहा है। नए साल से यहां भी सुविधा शुरू हो सकती है।
-धर्मेंद्र सिंह, उप निबंधक