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Basti News: सोना न खरीदने की अपील से असमंजस में ग्राहक, कारोबारियों की बढ़ी उलझन

Wed, 13 May 2026 12:48 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 13 May 2026 12:48 AM IST
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The appeal to avoid buying gold has left customers confused and traders confused.
सराफा, मंगलबाजार ​स्थित सराफा दुकान पर खरीदारी करते ग्राहक संवाद
बस्ती। जिले के सर्राफा बाजार में हलचल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपील के बाद कारोबारी उलझन में हैं तो ग्राहक भी असमंजस में हैं। खैर, अपनी जरूरत के हिसाब से खरीदारी जरूर कर रहे हैं, मगर बाजार में मानों रौनक गायब होने जैसा है।
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पुरानी बस्ती हो या फिर गांधीनगर बाजार यहां सराफा की दुकानें रोज खुलती हैं। शोकेस में सजे हार, चूड़ियां और मंगलसूत्र पहले की तरह चमकते हैं, लेकिन बाजार की रफ्तार अब बदली-बदली नजर आने लगी है। ग्राहक दुकानों तक पहुंच रहे हैं, डिजाइन देख रहे हैं, दाम पूछ रहे हैं, मगर खरीदारी पर हाथ रोक ले रहे हैं। सोना खरीद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद बाजार में यह रुककर देखने वाला रुझान तेज हुआ है, जिसका सबसे पहला असर कारीगरों की रोजी-रोटी पर दिखने लगा है।
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ऐसे में व्यापारी, कारीगर और ग्राहक सबके मन में उथल-पुथल मची है। हालांकि व्यापारी कहते हैं कि सर्राफा बाजार अभी ठहरा नहीं, लेकिन रफ्तार जरूर थमी है और अगर यह ठहराव लंबा चला, तो सोने की चमक सबसे पहले कारीगरों की जिंदगी से फीकी पड़ती दिखेगी। कारोबारियों का कहना है कि बाजार पूरी तरह ठंडा नहीं पड़ा है, लेकिन उसकी चाल जरूर धीमी हुई है। इसका सबसे पहला असर छोटे कारीगरों और ज्वेलरी वर्कशॉप पर दिखाई देने लगा है, जहां काम पूरी तरह ऑर्डर पर टिका होता है।
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शादी की खरीद जारी, निवेश वाली मांग घटी
सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक शादी-विवाह की जरूरी खरीद अभी जारी है, लेकिन निवेश और अतिरिक्त खरीद टाली जा रही है। एक व्यापारी ने बताया कि ग्राहक पहले तुरंत खरीद का फैसला कर लेते थे, लेकिन अब कई लोग केवल भाव लेकर लौट जा रहे हैं। अन्य कारोबारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो दुकानों में स्टॉक अटक सकता है और नया माल बनवाने के ऑर्डर घट सकते हैं। इसका असर केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी सप्लाई चेन प्रभावित होगी।
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चिंता में सोना संबंधित कारीगर
सर्राफा बाजार की सुस्ती का सबसे तेज असर छोटे कारीगरों पर पड़ने की आशंका है। शहर और कस्बों के छोटे वर्कशॉप में काम करने वाले सुनार, डिजाइनर और पॉलिश कारीगर रोज मिलने वाले ऑर्डर पर निर्भर रहते हैं। वर्कशॉप में काम करने वाले कारीगरों का कहना है कि उनकी कमाई रोज के काम से चलती है। एक दिन काम कम हुआ तो उसी दिन घर का बजट बिगड़ जाता है। महंगाई के बीच पहले ही काम सीमित है, अब मांग और घटने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि छोटे शहरों में ज्वेलरी सेक्टर केवल व्यापार नहीं, बल्कि हजारों लोगों के अनौपचारिक रोजगार का जरिया है। बाजार की रफ्तार धीमी होने का असर सबसे पहले दिहाड़ी और पीस रेट पर काम करने वाले मजदूरों पर पड़ता है।

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बंगाल के कारीगरों पर भी संकट
जिले के कई ज्वेलरी वर्कशॉप में पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद और नदिया से आए कारीगर काम करते हैं। ये कारीगर महीनों तक जिले में रहकर गहनों की बारीक डिजाइनिंग और फिनिशिंग का काम करते हैं। मालदा से आए एक कारीगर अहमद बताते हैं कि सीजन में छह से आठ महीने तक यहां काम करते हैं। काम घटा तो गांव लौटना पड़ेगा। व्यापारियों के अनुसार, काम बढ़ने पर बाहर से कारीगर बुलाए जाते हैं, लेकिन सुस्ती आते ही सबसे पहले इन्हीं का काम प्रभावित होता है।
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शहरी बाजारों में कम पहुंचेंगे ग्राहक
गांव-कस्बों से आने वाली भीड़ अब शहरी बाजारों में भी खरीदारी कम आएंगे, ऐसा दुकानदार अनुमान लगाए हैं। कारोबारियों का कहना है कि ग्राहक नई खरीद के बजाय पुराने गहनों की अदला-बदली या हल्के गहनों की तरफ ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। युवाओं में भारी गहनों के बजाय हल्के डिजाइन और कम वजन वाली ज्वेलरी की मांग बढ़ रही है। वहीं निवेश के तौर पर सोना खरीदने वाले ग्राहक फिलहाल वेट एंड वॉच मोड में हैं।

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बाजार में असर
ग्राहक खरीद टाल रहे।
निवेश वाली मांग घटी।
छोटे वर्कशॉप में ऑर्डर कम होने की आशंका।
कारीगरों की दिहाड़ी पर दबाव।
हल्के गहनों की मांग बढ़ी।
शहरी बाजार में कम हो रही रौनक।
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फिलहाल बाजार पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन ग्राहकों का रुझान बदलता दिख रहा है। लोग खरीदारी टाल रहे हैं और केवल जरूरी सामान ले रहे हैं। अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो सर्राफा कारोबार की रफ्तार टूट सकती है। जनता से ऐसी अपील कारोबार के हित में नहीं है।
गौरव भारत, स्वर्ण व्यवसायी
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- ग्राहक दुकानों पर आ रहे हैं, डिजाइन और रेट भी पूछ रहे हैं, लेकिन खरीदारी का फैसला तुरंत नहीं ले रहे। इसका असर छोटे कारोबारियों और वर्कशॉप पर सबसे पहले दिखाई देगा, क्योंकि पूरा काम ऑर्डर पर चलता है। ऐसे अपील से लोगों को बचना चाहिए। कारोबार में यह अपील हित में नहीं है।

- कुंदन वर्मा, अध्यक्ष सराफा संघ बस्ती
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शादी-ब्याह की जरूरत होने पर थोड़ा बहुत खरीदना पड़ रहा है, लेकिन अतिरिक्त गहनों की खरीद फिलहाल रोक दी है। पहले जैसे तुरंत खरीद का मन नहीं बन रहा, लोग अब सोच-समझकर पैसा खर्च कर रहे हैं।

- शैलेंद्र पटेल, ग्राहक
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